पीएम मोदी ने मन की बात के 133वें एपिसोड में जनगणना को दुनिया का सबसे बड़ा अभियान बताया। अब तक 1.20 करोड़ घरों की लिस्टिंग पूरी हो चुकी है, साथ ही पर्यावरण, ऊर्जा और बांस उद्योग पर भी जोर दिया।
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को प्रसारित ‘मन की बात’ के 133वें एपिसोड में जनगणना अभियान को देश के लिए बेहद अहम बताया। उन्होंने कहा कि यह दुनिया की सबसे बड़ी जनगणना प्रक्रिया है और इसमें हर नागरिक की भागीदारी जरूरी है।पीएम ने जानकारी दी कि अब तक करीब 1 करोड़ 20 लाख घरों की लिस्टिंग का काम पूरा हो चुका है। जिन राज्यों में स्व-गणना पूरी हो चुकी है, वहां घर-घर लिस्टिंग का कार्य जारी है।
जनगणना प्रक्रिया को बनाया गया आसान
प्रधानमंत्री ने बताया कि इस बार जनगणना की प्रक्रिया को सरल बनाया गया है। नागरिक खुद भी अपनी जानकारी ऑनलाइन दर्ज कर सकते हैं। कर्मचारी के आने से 15 दिन पहले यह सुविधा उपलब्ध होगी।जानकारी दर्ज करने के बाद नागरिकों को एक विशेष आईडी दी जाएगी, जिसे बाद में सत्यापन के लिए उपयोग किया जा सकेगा। इससे दोबारा जानकारी देने की आवश्यकता नहीं होगी।
बुद्ध पूर्णिमा पर दी शुभकामनाएं
पीएम मोदी ने आने वाले बुद्ध पूर्णिमा पर्व की अग्रिम शुभकामनाएं भी दीं। उन्होंने कहा कि भगवान गौतम बुद्ध का संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है। शांति और आत्मविजय का उनका मार्ग आज के समय में भी प्रेरणादायक है।
कच्छ के फ्लेमिंगो बने पर्यावरण का प्रतीक
प्रधानमंत्री ने कच्छ के रण में आने वाले फ्लेमिंगो पक्षियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि हर साल लाखों की संख्या में ये पक्षी यहां आते हैं और इसे ‘फ्लेमिंगो सिटी’ के रूप में पहचान मिलती है। स्थानीय लोग इन्हें ‘लाखा जी के बाराती’ कहते हैं, जो अब पर्यावरण संरक्षण का प्रतीक बन गए हैं।
विंड एनर्जी में भारत की बड़ी उपलब्धि
पीएम मोदी ने कहा कि भारत पवन ऊर्जा के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। देश की विंड एनर्जी उत्पादन क्षमता 56 गीगावॉट से अधिक हो चुकी है और पिछले एक वर्ष में करीब 6 गीगावॉट की वृद्धि दर्ज की गई है।गुजरात, तमिलनाडु, महाराष्ट्र और राजस्थान जैसे राज्य इस क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। इससे रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो रहे हैं।
बांस उद्योग को मिला बढ़ावा
प्रधानमंत्री ने उत्तर-पूर्व भारत में बांस उद्योग के विकास का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि 2017 में कानून में बदलाव कर बांस को पेड़ की श्रेणी से बाहर किया गया, जिसके बाद इस क्षेत्र में तेजी आई है।आज बांस उद्योग से जुड़े काम-धंधे में वृद्धि हो रही है और स्थानीय लोगों को नए रोजगार के अवसर मिल रहे हैं।