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Mani Shankar Aiyar questions Rahul's INDIA leaders

मणिशंकर अय्यर बोले राहुल छोड़ें INDIA की कमान, ममता बनें लीडर: उमर का जवाब- राहुल ने लड़ाई में कमी नहीं छोड़ी

मणिशंकर अय्यर ने कहा राहुल गांधी INDIA गठबंधन का नेतृत्व छोड़ें और ममता बनर्जी को मौका मिले। उमर अब्दुल्ला ने राहुल का बचाव किया।


मणिशंकर अय्यर बोले राहुल छोड़ें india की कमान ममता बनें लीडर उमर का जवाब- राहुल ने लड़ाई में कमी नहीं छोड़ी

कोलकाता। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर के ताजा बयान ने एक बार फिर विपक्षी राजनीति में हलचल मचा दी है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि राहुल गांधी को INDIA गठबंधन का नेतृत्व छोड़ देना चाहिए और छोटी पार्टियों को आगे आने का मौका देना चाहिए। अय्यर ने कहा, “ममता दीदी के बिना INDIA गठबंधन का ‘I’, ‘N’, ‘D’, ‘I’, ‘A’ ही खत्म हो जाएगा।' उनका इशारा साफ तौर पर ममता बनर्जी की ओर था।

'छोटी पार्टियों को मिले जिम्मेदारी'

अय्यर ने कहा कि गठबंधन में कई ऐसे नेता हैं जो नेतृत्व की भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने नाम गिनाते हुए कहा कि स्टालिन, ममता, अखिलेश, तेजस्वी जैसे नेताओं को मौका दिया जाना चाहिए। उनके मुताबिक, राहुल गांधी को खुद आगे रहकर नेतृत्व करने के बजाय इन क्षेत्रीय नेताओं को जिम्मेदारी सौंपनी चाहिए। बयान में उन्होंने सीधे तौर पर यह नहीं कहा कि राहुल अयोग्य हैं, लेकिन यह जरूर जताया कि नेतृत्व का चेहरा बदलने से गठबंधन मजबूत हो सकता है।

उमर अब्दुल्ला का संतुलित जवाब

वहीं जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से जब इस बयान पर सवाल किया गया तो उन्होंने संतुलित प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कोई यह नहीं कह सकता कि अय्यर को अपनी राय देने का हक नहीं है। लेकिन जब फैसला होगा, तो वह INDIA ब्लॉक मिलकर करेगा। उमर ने यह भी जोड़ा कि लीडरशिप का मुद्दा पहले गठबंधन के भीतर चर्चा का विषय होना चाहिए। साथ ही उन्होंने राहुल गांधी का बचाव करते हुए कहा कि बीजेपी और केंद्र सरकार के खिलाफ लड़ाई में राहुल ने कोई कसर नहीं छोड़ी है।

'मैं ममता का राइट हैंडमैन था'

अय्यर ने अपने पुराने राजनीतिक सफर को याद करते हुए कहा कि जब ममता बनर्जी ने अपनी पार्टी बनाई थी, तब वे तीन हफ्तों तक उनके साथ रहे। उन्होंने कहा मैं खुद टीएमसी में ममता दी का पहला नेशनल सेक्रेटरी था। लेकिन जल्द ही एहसास हुआ कि यह बंगालियों की पार्टी है और मैं बंगाली नहीं हूं, तो मैंने पार्टी छोड़ दी। पर तीन हफ्ते तक मैं उनका राइट-हैंड मैन था। यह बयान भी राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है।

छह दिन में दूसरा बयान

यह पहला मौका नहीं है जब अय्यर ने राहुल को लेकर अलग राय रखी हो। 16 फरवरी को उन्होंने खुद को “गांधियन, नेहरूवियन और राजीवियन' बताया था, लेकिन “राहुलियन' नहीं। उन्होंने कहा था कि राहुल उनसे करीब 30 साल छोटे हैं और उन्हें उनके साथ काम करने का मौका नहीं मिला, इसलिए खुद को ‘राहुलवादी’ नहीं कह सकते।

कांग्रेस के लिए असहज स्थिति?

लगातार आ रहे बयानों से कांग्रेस के भीतर असहजता बढ़ सकती है, हालांकि पार्टी की ओर से अब तक इस पर आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। INDIA गठबंधन पहले ही कई राज्यों में सीट बंटवारे और रणनीति को लेकर चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे में नेतृत्व को लेकर सार्वजनिक बयानबाजी विपक्षी एकता पर असर डाल सकती है, यह राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है। 

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