कोलकाता के तारातला इलाके में निर्माणाधीन शेड ढहने से कई मजदूर मलबे में दब गए। प्रत्यक्षदर्शियों ने भयावह मंजर बताया, जबकि राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है।
कुछ सेकंड का कंपन, तेज धमाका और फिर चारों तरफ धूल का गुबार। कोलकाता के तारातला इलाके में बुधवार को ऐसा ही मंजर देखने को मिला। जब निर्माणाधीन फैक्ट्री शेड अचानक भरभराकर गिर पड़ा। हादसे के बाद इलाके में चीख-पुकार मच गई और मलबे के नीचे दबे लोग मदद की गुहार लगाने लगे।
इस दुर्घटना में 5 लोगों के मौत की खबर सामने आ रही है जबकि 16 लोग घायल हुए हैं। वहीं, कई अन्य के मलबे में फंसे होने की आशंका बनी हुई है। प्रशासन ने तत्काल राहत अभियान शुरू किया और घायलों को इलाज के लिए SSKM अस्पताल पहुंचाया गया। बचाए गए लोगों में चार की हालत गंभीर बताई जा रही है।
मलबे से आती रही मदद की पुकार
हादसे के तुरंत बाद घटनास्थल पर पहुंचे स्थानीय लोगों ने बताया कि मलबे के नीचे दबे मजदूर लगातार पानी और मदद मांग रहे थे। प्रत्यक्षदर्शी उज्ज्वल कुमार के अनुसार, कई लोग दबे होने के बावजूद आवाज लगाकर अपनी मौजूदगी का संकेत दे रहे थे। स्थानीय लोगों ने राहत दल के पहुंचने तक घायलों को पानी पिलाने और मदद पहुंचाने की कोशिश की।
काम के दौरान ढहा पूरा ढांचा
प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक ग्राउंड फ्लोर पर मजदूर काम कर रहे थे, जबकि ऊपर की मंजिलों का कंक्रीट ढांचा तैयार हो चुका था। इसी दौरान अचानक पूरी संरचना नीचे की ओर आ गिरी। हादसे ने निर्माण स्थल पर सुरक्षा इंतजामों और कार्यस्थल मानकों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
भारी बीम बनी सबसे बड़ी चुनौती
रेस्क्यू टीम को राहत कार्य में सबसे ज्यादा परेशानी लोहे के विशाल बीम और मोटी सरिया के कारण हो रही है। इन्हें हटाने के लिए गैस कटर का इस्तेमाल किया जा रहा है, जबकि मलबे के भीतर रास्ता बनाने के लिए ड्रिलिंग की जा रही है। आपदा प्रबंधन टीम आवाजों के आधार पर फंसे लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है ताकि हर संभावित जीवन को सुरक्षित निकाला जा सके।
जांच के घेरे में निर्माण प्रक्रिया
दमकल विभाग के अधिकारियों ने संकेत दिया है कि कंक्रीट डालने के दौरान ढांचा गिरा। साथ ही निर्माण सामग्री की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। जानकारी के अनुसार पिछले छह से सात महीनों से यहां निर्माण कार्य चल रहा था। जमीन शंभू बेहेरा की बताई जा रही है, जबकि परियोजना का विकास असगर खान के नेतृत्व में किया जा रहा था। इन सभी पहलुओं की जांच की जाएगी।
राजनीति से लेकर प्रशासन तक सक्रिय
राज्य मंत्री इंद्रनील खान ने घटनास्थल पहुंचकर कहा कि फिलहाल प्राथमिकता लोगों की जान बचाना है, जबकि हादसे के कारणों की अलग से जांच होगी। पश्चिम बंगाल सरकार ने नबन्ना में कंट्रोल रूम स्थापित किया है। वहीं केंद्रीय मंत्री सुकांता मजुमदार ने भी मामले की निगरानी और निष्पक्ष जांच की बात कही है। यदि जांच में सुरक्षा नियमों की अनदेखी या अवैध निर्माण की पुष्टि होती है, तो यह मामला केवल एक निर्माण दुर्घटना तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि शहरी विकास परियोजनाओं में जवाबदेही और सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर सकता है।