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कर्नाटक में जनेऊ विवाद से सियासी बवाल

क्या कर्नाटक में हिंदू होना अपराध है?: छात्रों से जनेऊ उतरवाने के आरोपों पर BJP ने कांग्रेस को घेरा

कर्नाटक CET परीक्षा में छात्रों से जनेऊ हटाने के आरोप पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। बीजेपी ने कांग्रेस सरकार पर हिंदू विरोधी रवैये का आरोप लगाया, जिससे राजनीतिक माहौल गरमा गया है।


क्या कर्नाटक में हिंदू होना अपराध है छात्रों से जनेऊ उतरवाने के आरोपों पर bjp ने कांग्रेस को घेरा

कर्नाटक में कॉमन एंट्रेंस टेस्ट (CET) परीक्षा के दौरान कथित तौर पर कुछ छात्रों से जनेऊ हटाने के मामले ने राजनीतिक विवाद का रूप ले लिया है। इस घटना के सामने आते ही राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और बीजेपी ने कांग्रेस सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। बीजेपी का कहना है कि यह घटना हिंदू धार्मिक प्रतीकों के प्रति असंवेदनशील रवैये को दर्शाती है।

परीक्षा केंद्र पर जनेऊ हटाने के आरोप

मामले के अनुसार, परीक्षा देने पहुंचे कुछ छात्रों से कथित रूप से परीक्षा केंद्र पर जनेऊ उतारने के लिए कहा गया। छात्रों का दावा है कि उन्हें स्पष्ट रूप से बताया गया कि बिना जनेऊ हटाए परीक्षा हॉल में प्रवेश नहीं दिया जाएगा। जनेऊ, जिसे हिंदू धर्म में विशेष रूप से पवित्र प्रतीक माना जाता है, को हटाने की बात पर छात्रों ने आपत्ति जताई। इसके बाद मामला सोशल मीडिया और राजनीतिक मंचों पर तेजी से फैल गया।

बीजेपी का कांग्रेस पर तुष्टिकरण के आरोप

केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने इस घटना पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि यह हिंदू आस्था का अपमान है। वहीं बीजेपी प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने सवाल उठाते हुए कहा कि क्या कर्नाटक में हिंदू होना अपराध बनता जा रहा है। बीजेपी ने कांग्रेस सरकार पर तुष्टिकरण की राजनीति करने और धार्मिक प्रतीकों के प्रति भेदभावपूर्ण रवैया अपनाने का आरोप लगाया है। विपक्षी दल ने इसे शिक्षा व्यवस्था में हस्तक्षेप और धार्मिक असंतुलन का मुद्दा बताया है।

जांच के आदेश 

विवाद बढ़ने के बाद परीक्षा केंद्र के संबंधित निरीक्षक को निलंबित कर दिया गया है। साथ ही राज्य सरकार ने मामले की जांच के आदेश जारी किए हैं। पुलिस ने ड्यूटी पर तैनात कुछ कर्मचारियों से पूछताछ भी शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है और छात्रों के आरोपों की सत्यता की पुष्टि के बाद ही आगे की कार्रवाई तय होगी।

कर्नाटक में यह पहला मामला नहीं है जब परीक्षा केंद्रों में धार्मिक प्रतीकों को लेकर विवाद खड़ा हुआ हो। पिछले साल भी ऐसे ही मामले सामने आने के बाद दिशानिर्देश जारी किए गए थे, लेकिन इस ताजा घटना ने एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक बहस को तेज कर दिया है।