आईआरसीटीसी ने ऑनलाइन टिकट बुकिंग में नई एआई तकनीक लागू की है। अब टाइपिंग स्पीड, लॉगिन पैटर्न और गतिविधियों के आधार पर असली यूजर की पहचान होगी। संदिग्ध गतिविधि मिलने पर आईडी 24 घंटे के लिए लॉक हो सकती
भोपाल। ऑनलाइन रेल टिकट बुकिंग को ज्यादा पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए Indian Railway Catering and Tourism Corporation ने नई एआई तकनीक लागू कर दी है। मार्च से शुरू हुई इस प्रणाली में अब टिकट बुकिंग के दौरान टाइपिंग की गति, लॉगिन पैटर्न और अन्य गतिविधियों का विश्लेषण किया जाएगा। इससे यह पता लगाया जाएगा कि टिकट कोई वास्तविक यात्री बुक कर रहा है या किसी ऑटोमेटेड सॉफ्टवेयर की मदद ली जा रही है। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि इस तकनीक का उद्देश्य दलालों और अवैध सॉफ्टवेयर के जरिए कन्फर्म टिकट हासिल करने वालों पर रोक लगाना है। माना जा रहा है कि इससे आम यात्रियों को कन्फर्म टिकट मिलने की संभावना करीब 40 प्रतिशत तक बढ़ सकती है।
टाइपिंग स्पीड से पहचानेगा असली यूजर
नई एआई तकनीक टिकट बुकिंग के दौरान यूजर की टाइपिंग स्पीड को भी मापेगी। यदि पांच यात्रियों की जानकारी जैसे नाम, उम्र और जेंडर 4.2 सेकंड से कम समय में भर दी जाती है, तो सिस्टम इसे संदिग्ध गतिविधि मान सकता है। ऐसे मामलों में यूजर को रेड फ्लैग कर दिया जाएगा और अकाउंट अस्थायी रूप से लॉक भी किया जा सकता है।
संदिग्ध गतिविधि पर 24 घंटे के लिए अकाउंट बैन
एआई सिस्टम कई अन्य संकेतों के आधार पर भी यूजर की गतिविधि पर नजर रखेगा। यदि कोई व्यक्ति एक ही आईडी से आधे घंटे में पांच बार से ज्यादा लॉगिन या लॉगआउट करता है, तो अकाउंट को 24 घंटे के लिए अस्थायी रूप से बैन किया जा सकता है। सिस्टम आईपी एड्रेस और मोबाइल नंबर की लोकेशन का भी मिलान करेगा। यदि दोनों अलग-अलग क्षेत्रों में पाए गए, तो ट्रांजेक्शन बीच में ही रोक दिया जाएगा।
देर रात गतिविधि भी बनेगी शक की वजह
रेलवे का एल्गोरिदम देर रात नाम जोड़ने या हटाने जैसी गतिविधियों को भी संदिग्ध मान सकता है। ऐसे मामलों में यूजर आईडी को अस्थायी रूप से लॉक किया जा सकता है, ताकि टिकट बुकिंग में किसी तरह की गड़बड़ी न हो।
दलालों पर लगेगी लगाम
रेलवे अधिकारियों का मानना है कि नई एआई तकनीक से दलालों और ऑटोमेटेड सॉफ्टवेयर के जरिए बड़ी संख्या में टिकट बुक करने की प्रवृत्ति पर रोक लगेगी। इससे वास्तविक यात्रियों को टिकट मिलने की संभावना बढ़ेगी और ऑनलाइन बुकिंग सिस्टम ज्यादा भरोसेमंद बनेगा। इस बारे में Naval Agrawal ने कहा कि आईआरसीटीसी ने यह तकनीक आम यात्रियों के हित में लागू की है, ताकि असली यात्रियों को कन्फर्म टिकट मिल सके और दलालों की गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सके।