ईरान-इजराइल-अमेरिका संघर्ष पर राज्यसभा में विदेश मंत्री एस जयशंकर के बयान के दौरान विपक्ष का वॉकआउट। भारत ने शांति की अपील की, खाड़ी में भारतीयों की सुरक्षा और एनर्जी संकट पर भी चिंता जताई।
नई दिल्ली। संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण सोमवार से शुरू हुआ और पहले ही दिन सदन का माहौल गर्म दिखाई दिया। राज्यसभा में जब विदेश मंत्री Subrahmanyam Jaishankar ने वेस्ट एशिया में बढ़ते तनाव, खासकर Iran और Israel के बीच जारी संघर्ष पर बयान देना शुरू किया तो विपक्षी सांसदों ने जोरदार हंगामा कर दिया। कुछ देर तक शोर-शराबा चलता रहा और आखिरकार विपक्ष ने वॉकआउट कर दिया। जयशंकर ने अपने बयान में कहा कि भारत इस पूरे मामले में शांति और बातचीत का समर्थक है। लेकिन हालात इतने तनावपूर्ण हैं कि इस समय ईरान की शीर्ष नेतृत्व से संपर्क करना भी आसान नहीं रह गया है।
खाड़ी में भारतीयों की सुरक्षा सबसे बड़ी चिंता
विदेश मंत्री ने कहा कि वेस्ट एशिया की स्थिति भारत के लिए बेहद अहम है। सिर्फ इसलिए नहीं कि वहां युद्ध का खतरा है, बल्कि इसलिए भी कि खाड़ी देशों में बड़ी संख्या में भारतीय रहते और काम करते हैं। उन्होंने बताया कि करीब एक करोड़ भारतीय अलग-अलग खाड़ी देशों में काम कर रहे हैं। इसके अलावा ईरान में भी हजारों भारतीय छात्र और प्रोफेशनल मौजूद हैं। जयशंकर ने कहा इस इलाके में स्थिरता हमारे लिए भी उतनी ही जरूरी है। यह हमारी ऊर्जा सुरक्षा से सीधे जुड़ा हुआ है।
67 हजार भारतीय सीमा पार कर चुके
सरकार ने वेस्ट एशिया में फंसे भारतीयों को सुरक्षित निकालने की प्रक्रिया तेज कर दी है। विदेश मंत्री के मुताबिक 8 मार्च तक करीब 67,000 भारतीय नागरिक अंतरराष्ट्रीय सीमाएं पार कर सुरक्षित स्थानों पर पहुंच चुके हैं। उन्होंने कहा कि अलग-अलग मंत्रालय और भारतीय दूतावास मिलकर लगातार समन्वय कर रहे हैं ताकि जरूरत पड़ने पर और लोगों को निकाला जा सके।

नाविकों की मौत और एडवाइजरी
संघर्ष के दौरान समुद्री मार्ग भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं। जयशंकर ने बताया कि मर्चेंट शिपिंग से जुड़े दो भारतीय नाविकों की मौत हो चुकी है और एक अभी भी लापता है। मुंबई स्थित शिपिंग महानिदेशालय ने 14 जनवरी को ही भारतीय नाविकों को एडवाइजरी जारी कर दी थी कि वे दूतावास के निर्देशों का पालन करें और अनावश्यक रूप से किनारे पर आने-जाने से बचें।
एनर्जी सप्लाई पर भी असर की आशंका
वेस्ट एशिया दुनिया के सबसे बड़े तेल और गैस सप्लायर क्षेत्रों में से एक है। ऐसे में युद्ध का असर सीधे ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है। विदेश मंत्री ने कहा कि सप्लाई चेन में रुकावट या अस्थिरता भारत के लिए चिंता का विषय है। तेल और गैस की कीमतों में उछाल आने की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
ईरान से संपर्क मुश्किल
जयशंकर ने यह भी बताया कि मौजूदा हालात में ईरान की शीर्ष नेतृत्व से संपर्क करना काफी कठिन हो गया है, क्योंकि वहां कई बड़े सैन्य और राजनीतिक नेताओं की मौत की खबरें सामने आई हैं और बुनियादी ढांचा भी नुकसान झेल रहा है। हालांकि उन्होंने यह भी बताया कि ईरान के विदेश मंत्री ने भारत का आभार जताया है, क्योंकि भारत ने ईरानी युद्धपोत लावन को कोच्चि बंदरगाह पर डॉक करने की अनुमति दी थी। विपक्ष का कहना है कि सरकार को इस पूरे संकट पर संसद में विस्तृत चर्चा करानी चाहिए। कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge ने कहा कि मिडिल ईस्ट में बढ़ते युद्ध का असर भारत की ऊर्जा सुरक्षा और अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है, इसलिए इस पर शॉर्ट डिबेट जरूरी है।
लोकसभा में भी टकराव के आसार
इसी बीच सोमवार को Om Birla को लोकसभा स्पीकर पद से हटाने के प्रस्ताव पर भी चर्चा होने वाली है। विपक्ष का आरोप है कि स्पीकर सदन की कार्यवाही में निष्पक्षता नहीं बरत रहे और विपक्ष को बोलने का पर्याप्त मौका नहीं मिलता। कांग्रेस समेत विपक्ष के 118 सांसदों ने 10 फरवरी को इस प्रस्ताव का नोटिस लोकसभा सचिवालय को सौंपा था। ऐसे में माना जा रहा है कि संसद के इस सत्र में राजनीतिक तापमान अभी और बढ़ सकता है। विपक्ष जहां बहस की मांग कर रहा है, वहीं सरकार का कहना है कि वह स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है, और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।