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India-US Trade Ties Hit by Tariff Confusion

घटता-बढ़ता टैरिफः भारत-अमेरिका व्यापार रिश्तों में फिर नई उलझन

टैरिफ में बार-बार बदलाव से भारत-अमेरिका व्यापार संबंध उलझे। उद्योग जगत में असमंजस, निर्यातकों पर सीधा असर


घटता-बढ़ता टैरिफः भारत-अमेरिका व्यापार रिश्तों में फिर नई उलझन

भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंध पिछले एक वर्ष में लगातार उतार-चढ़ाव से गुजरे हैं। टैरिफ (आयात शुल्क) को लेकर लिए गए फैसलों ने न केवल दोनों देशों के निर्यातकों और उद्योग जगत को प्रभावित किया है, बल्कि वैश्विक व्यापार व्यवस्था में भी नई बहस छेड़ दी है। शुक्रवार को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले, राष्ट्रपति के विशेषाधिकार और रूस-यूक्रेन युद्ध की पृष्ठभूमि में भारत पर लगाए गए टैरिफ अब अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और अर्थनीति का बड़ा मुद्दा बन गए हैं।अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा लगाए गए व्यापक टैरिफ को रद्द किए जाने के बाद भारत को अपने अमेरिकी निर्यात पर कितना टैरिफ देना होगा, इसे लेकर असमंजस बना हुआ है। भारत पर अमेरिकी टैरिफ बीते समय में बढ़ता-घटता रहा है।

दोगुना कर दिया था टैरिफ

डोनाल्ड ट्रंप ने बीते साल अप्रैल में जब दुनिया भर में टैरिफ अटैक की शुरुआत की थी, तो शुरुआत में भारत पर 25 प्रतिशत रेसिप्रोकल टैरिफ लगाया गया था। इसके बाद अगस्त में ट्रंप ने भारत पर लागू टैरिफ को दोगुना करते हुए 50 प्रतिशत कर दिया। इसके पीछे कारण भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद को बताया गया था।

धारा 122 से मिला ट्रंप को अधिकार

भारत पर टैरिफ 50 फीसदी होने के बाद दोनों देशों के बीच तनाव गहरा गया और भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर बातचीत भी अटक गई थी। हालांकि, बीते दिनों इसे लेकर दोनों देशों के बीच सहमति बनी और ट्रंप ने अचानक भारत पर टैरिफ को 50 प्रतिशत से घटाकर सीधे 18 फीसदी कर दिया।

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के बाद बढ़ा कन्फ्यूजन

बताया गया कि ट्रंप ने दावा किया था कि भारत रूसी तेल की खरीद बंद करेगा। इसके साथ ही उन्होंने 25 प्रतिशत का अतिरिक्त टैरिफ भी समाप्त कर दिया। सुप्रीम कोर्ट में मिली हार के बाद ट्रंप ने जिस धारा 122 का इस्तेमाल करते हुए 10 फीसदी वैश्विक शुल्क लागू किया, वह अमेरिकी राष्ट्रपति को 150 दिनों के लिए 15 प्रतिशत तक का शुल्क लगाने का अधिकार देती है। इसके बाद उन्हें कांग्रेस की मंजूरी लेनी होती है।ट्रंप ने एक बयान में कहा कि भारत पर टैरिफ पहले से तय ट्रेड डील के अनुसार 18 फीसदी ही रहेगा, लेकिन उनके इस दावे पर व्हाइट हाउस ने बाद में स्पष्ट किया कि कानूनी तौर पर फिलहाल भारत पर 10 फीसदी टैरिफ ही लागू रहेगा।

क्या होता है रेसिप्रोकल टैरिफ

रेसिप्रोकल टैरिफ एक ऐसी व्यापार नीति है, जिसमें एक देश द्वारा दूसरे देश पर लगाए गए टैरिफ के जवाब में समान स्तर का टैरिफ लगाया जाता है। यह नीति आमतौर पर अंतरराष्ट्रीय व्यापार में संतुलन बनाए रखने और अनुचित व्यापार प्रथाओं का जवाब देने के लिए अपनाई जाती है।रेसिप्रोकल टैरिफ के कई सकारात्मक प्रभाव होते हैं, जैसे यह व्यापार में समानता सुनिश्चित करता है, घरेलू उद्योगों को मजबूती प्रदान करता है और आर्थिक आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देता है। यदि एक देश दूसरे देश के माल पर शुल्क बढ़ाता है, तो प्रभावित देश भी पहले देश से होने वाले आयात पर अपने शुल्क बढ़ाकर प्रतिक्रिया दे सकता है। इसका उद्देश्य स्थानीय व्यवसायों की रक्षा करना, नौकरियों को संरक्षित करना और व्यापार असंतुलन को ठीक करना होता है।

 

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