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India US Trade Deal Key Changes Explained

भारत-US ट्रेड डील अपडेट: दाल और 500 अरब खरीद की शर्तें नरम

नई फैक्ट शीट में दाल और 500 अरब डॉलर खरीद की भाषा बदली, 25% पेनल्टी टैरिफ वापसी से कारोबारियों को राहत।

भारत-us ट्रेड डील अपडेट दाल और 500 अरब खरीद की शर्तें नरम

नई दिल्लीः भारत और अमेरिका के बीच हाल में घोषित ट्रेड डील को लेकर व्हाइट हाउस की नई फैक्ट शीट सामने आने के बाद तस्वीर कुछ बदली हुई दिख रही है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ऐलान और एग्जीक्यूटिव ऑर्डर के बाद जारी दस्तावेज में कई अहम बिंदुओं की भाषा में बदलाव किया गया है, जबकि कुछ बातों का जिक्र पूरी तरह हटा दिया गया है।

फैक्ट शीट में बदलाव, दाल का जिक्र हटा

पिछले हफ्ते दोनों देशों ने ट्रेड डील की घोषणा की थी। इसके बाद व्हाइट हाउस ने एक फैक्ट शीट जारी कर समझौते की रूपरेखा साझा की थी। अब उसी दस्तावेज का संशोधित संस्करण जारी किया गया है।

सबसे बड़ा बदलाव दाल को लेकर देखने को मिला है। पहले स्पष्ट तौर पर कहा गया था कि भारत अमेरिकी औद्योगिक और कृषि उत्पादों पर टैरिफ कम या समाप्त करेगा, जिसमें दाल भी शामिल थी। लेकिन नए दस्तावेज में दाल का उल्लेख हटा दिया गया है।

500 अरब डॉलर की खरीद पर बदली भाषा

भारत द्वारा अमेरिका से 500 अरब डॉलर के सामान की खरीद को लेकर भी शब्दों में बदलाव किया गया है। पहले यह लिखा गया था कि भारत इस खरीद के लिए “कमिटेड” है। अब संशोधित फैक्ट शीट में इसे बदलकर “इरादा रखता है” कर दिया गया है। इससे बाध्यता की जगह लचीलेपन का संकेत मिलता है।

डिजिटल सर्विस टैरिफ पर नरम रुख

नई फैक्ट शीट में ऊर्जा, सूचना एवं संचार तकनीक, कोयला और कुछ अन्य उत्पादों का जिक्र है। डिजिटल सर्विस टैरिफ को लेकर भी अमेरिका का रुख पहले से नरम नजर आ रहा है। पहले कहा गया था कि भारत यह टैरिफ समाप्त करेगा, जबकि अब सिर्फ इतना लिखा गया है कि भारत डिजिटल व्यापार से जुड़े नियमों पर बातचीत के लिए तैयार है।

25% टैरिफ वापस से 40 हजार करोड़ की राहत की उम्मीद

अमेरिका ने रूस से तेल आयात के कारण भारत पर लगाए गए 25% पेनल्टी टैरिफ को वापस लेने का फैसला किया है। यह टैरिफ 27 अगस्त 2025 से 6 फरवरी 2026 के बीच किए गए आयात पर लागू था। व्हाइट हाउस की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस अवधि में जिन इम्पोर्ट पर पेनल्टी लगी थी, उनका रिफंड दिया जाएगा। यह रिफंड अमेरिका के कस्टम्स एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन कानून के तहत जारी होगा।

हालांकि रिफंड की सटीक राशि अभी तय नहीं है। यह रकम पहले अमेरिकी इम्पोर्टर को दी जाएगी, जिसके बाद वे भारतीय निर्यातकों के साथ बातचीत कर राशि का बंटवारा करेंगे। इस फैसले से भारतीय कारोबारियों को लगभग ₹40 हजार करोड़ की राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

रूस से तेल आयात पर निगरानी के लिए टास्क फोर्स

अंतरिम समझौते के ढांचे के तहत भारत रूस से तेल आयात दोबारा शुरू न करे, इस पर नजर रखने के लिए राष्ट्रपति ट्रंप ने तीन मंत्रियों की एक टास्क फोर्स गठित की है। इसमें वाणिज्य मंत्री, विदेश मंत्री और वित्त मंत्री शामिल हैं।

यदि समिति को लगता है कि भारत ने रूस से तेल आयात फिर से शुरू किया है, तो वह राष्ट्रपति को दोबारा 25% पेनल्टी टैरिफ लगाने और अन्य कदम उठाने की सिफारिश कर सकती है।

भारत को समझौते से मिलने वाले प्रमुख लाभ

अमेरिकी टैरिफ में कमी: भारतीय उत्पादों पर अमेरिका के टैरिफ को 18% तक घटाया गया है, जिससे निर्यातकों को बेहतर बाजार पहुंच मिलेगी।

चुनिंदा उत्पादों पर जीरो टैरिफ: जेनेरिक दवाएं, रत्न और हीरे तथा विमान पार्ट्स पर टैरिफ समाप्त किया जाएगा।

30 ट्रिलियन डॉलर के बाजार तक पहुंच: भारतीय MSME, किसान, मछुआरे, महिला और युवा उद्यमियों के लिए अमेरिकी बाजार में अवसर बढ़ेंगे।

निर्यात क्षेत्रों को बढ़ावा: टेक्सटाइल, चमड़ा और फुटवियर, प्लास्टिक और रबर उत्पाद, ऑर्गेनिक केमिकल्स, होम डेकोर, हस्तशिल्प और कुछ मशीनरी सेक्टर को लाभ।

सेक्शन 232 छूट: विमान पार्ट्स को अमेरिकी सेक्शन 232 के तहत राहत।

ऑटो पार्ट्स पर टैरिफ रेट कोटा: कुछ ऑटो कंपोनेंट्स को विशेष पहुंच।

जेनेरिक दवाओं के लिए बेहतर शर्तें: टैरिफ और नियामकीय नियमों में सुधार की संभावना।

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