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सिंधु जल संधि पर भारत का बड़ा फैसला

बूंद-बूंद पानी को तरस रहा PAK: सिंधु जल संधि पर भारत का सख्त रुख से पाकिस्तान को बड़ा झटका लगा

भारत ने सिंधु जल संधि पर पाकिस्तान को बड़ा झटका देते हुए हेग के तथाकथित कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन के फैसले को खारिज कर दिया। जानिए आखिर क्यों सख्त हुआ भारत और इसका आगे क्या असर पड़ेगा।


बूंद-बूंद पानी को तरस रहा pak सिंधु जल संधि पर भारत का सख्त रुख से पाकिस्तान को बड़ा झटका लगा

भारत ने सिंधु जल संधि को लेकर एक बार फिर पाकिस्तान को साफ संदेश दे दिया है। केंद्र सरकार ने  हेग स्थित तथाकथित ‘कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन’ (COA) के फैसले को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा है कि यह न्यायाधिकरण भारत के लिए मान्य ही नहीं है।

विदेश मंत्रालय की ओर से शनिवार को जारी बयान में कहा गया कि पाकिस्तान लगातार अंतरराष्ट्रीय मंचों का इस्तेमाल राजनीतिक दबाव बनाने के लिए कर रहा है। ऐसे में भारत अब इस मुद्दे पर पहले से कहीं ज्यादा सख्त नजर आ रहा है। यही वजह है कि इस फैसले को सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि रणनीतिक और कूटनीतिक संदेश के तौर पर भी देखा जा रहा है।

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर की किशनगंगा और रतले हाइड्रो पावर परियोजनाओं को लेकर आपत्ति जताई थी। इसके बाद मामला हेग स्थित ‘कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन’ तक पहुंचा।

हालांकि भारत शुरू से ही कहता रहा है कि सिंधु जल संधि के तहत इस तरह के कोर्ट का गठन नियमों के खिलाफ है। भारत का दावा है कि संधि में विवाद सुलझाने के लिए अलग प्रक्रिया तय है और पाकिस्तान ने उसे नजरअंदाज किया।

15 मई 2026 को कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन ने जल भंडारण और संधि की व्याख्या से जुड़ा पूरक फैसला सुनाया था। लेकिन भारत ने इसे तुरंत अस्वीकार कर दिया।

विदेश मंत्रालय ने क्या कहा?

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत इस तथाकथित न्यायाधिकरण को कभी कानूनी मान्यता नहीं देता।

उन्होंने कहा कि इस अदालत की कोई भी कार्यवाही, आदेश या फैसला भारत पर लागू नहीं होता। भारत का मानना है कि पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं का इस्तेमाल अपने राजनीतिक एजेंडे के लिए कर रहा है।

अब समझिए… भारत का यह बयान सिर्फ एक प्रतिक्रिया नहीं है। यह संकेत है कि नई दिल्ली अब आतंकवाद और अंतरराष्ट्रीय दबाव की राजनीति को एक साथ नहीं चलने देना चाहती।

पहलगाम आतंकी हमले के बाद बदला रुख

भारत ने पहलगाम आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि को ‘अबयंस’ यानी अस्थायी रूप से निलंबित रखने का फैसला लिया था। सरकार ने साफ कहा था कि आतंकवाद और जल सहयोग साथ-साथ नहीं चल सकते।

यही वजह है कि अब सिंधु जल संधि से जुड़े हर कदम को सुरक्षा और रणनीति के नजरिए से भी देखा जा रहा है। पाकिस्तान के लिए यह मामला इसलिए भी अहम है क्योंकि उसकी बड़ी आबादी सिंधु नदी प्रणाली के पानी पर निर्भर है। 

हालांकि फिलहाल भारत ने साफ कर दिया है कि वह अपनी संप्रभुता और सुरक्षा से जुड़े मामलों में किसी बाहरी दबाव को स्वीकार नहीं करेगा। ऐसे में आने वाले दिनों में सिंधु जल संधि को लेकर दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

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