पद्मश्री सतेंद्र सिंह लोहिया ने दुनिया के सबसे चुनौतीपूर्ण समुद्री मार्गों में गिने जाने वाले Cook Strait को सफलतापूर्वक पार कर लिया। इस उपलब्धि के साथ वह एशिया के पहले पैरा स्विमर बन गए हैं।
जब समुद्र की तेज़ धाराएं और बर्फ़ जैसे ठंडे पानी भी किसी का रास्ता नहीं रोक पाते, तब इतिहास बनता है। मध्य प्रदेश के इंटरनेशनल पैरा स्विमर पद्मश्री Satendra Singh Lohia ने न्यूज़ीलैंड के खतरनाक माने जाने वाले Cook Strait को पार कर यह साबित कर दिया है कि हौसले की कोई सीमा नहीं होती। इस उपलब्धि के साथ वह कुक स्ट्रेट पार करने वाले एशिया के पहले पैरा तैराक बन गए हैं। उनकी इस सफलता से न केवल मध्य प्रदेश, बल्कि पूरा देश गर्व महसूस कर रहा है।
क्यों खास है कुक स्ट्रेट की चुनौती?
कुक स्ट्रेट न्यूज़ीलैंड के उत्तर और दक्षिण द्वीपों के बीच स्थित समुद्री मार्ग है। यह दुनिया के सबसे कठिन ओपन वॉटर स्विमिंग रूट्स में गिना जाता है।
क्या बनाता है इसे मुश्किल?
ओपन वॉटर स्विमिंग विशेषज्ञ मानते हैं कि यहां तैरना पूल में तैरने जैसा बिल्कुल नहीं होता। समुद्र में हर मिनट परिस्थितियां बदलती हैं। ऐसे में मानसिक संतुलन और धैर्य सबसे बड़ा हथियार बनता है।
संघर्ष से सफलता तक का सफर
भिंड जिले के सतेंद्र सिंह लोहिया का जीवन संघर्षों से भरा रहा है। शारीरिक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने खेल को ही अपनी पहचान बनाया। उन्होंने वर्षों तक ओपन वॉटर स्विमिंग की तैयारी की। ठंडे पानी में ट्रेनिंग, लंबी दूरी की स्विमिंग और मानसिक मजबूती इन सबने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया। परिवार और कोच का सहयोग भी उनकी यात्रा का अहम हिस्सा रहा। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी।

एशिया के पहले पैरा तैराक बने
इस उपलब्धि के साथ सतेंद्र लोहिया एशिया के पहले पैरा स्विमर बन गए हैं जिन्होंने कुक स्ट्रेट को पार किया। यह उपलब्धि सिर्फ व्यक्तिगत जीत नहीं है, बल्कि भारतीय पैरा स्पोर्ट्स के लिए एक बड़ा मील का पत्थर है। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि इससे देश में पैरा एथलीट्स के प्रति दृष्टिकोण और मजबूत होगा। युवा खिलाड़ियों के लिए यह संदेश है कि अगर लक्ष्य साफ हो और मेहनत सच्ची हो, तो दुनिया की सबसे कठिन राह भी पार की जा सकती है।
सतेंद्र लोहिया ने अपने राज्य और अपने शहर भिंड का नाम अंतरराष्ट्रीय मंच पर स्थापित किया है। उनकी उपलब्धि ने यह दिखाया है कि छोटे शहरों से भी विश्वस्तरीय खिलाड़ी निकल सकते हैं। उनकी यह सफलता आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करेगी और पैरा खेलों के प्रति जागरूकता बढ़ाएगी।