NFHS-6 रिपोर्ट में महिलाओं की शिक्षा, डिजिटल पहुंच और आर्थिक भागीदारी में बड़ा सुधार दिखा है। इंटरनेट उपयोग 33% से बढ़कर 64% हुआ, लेकिन सामाजिक बाधाएं अभी भी बनी हुई हैं।
भारत में महिलाओं की स्थिति को लेकर एक मिश्रित तस्वीर सामने आई है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे-6 (NFHS-6) के अनुसार देश में महिलाओं की डिजिटल पहुंच, शिक्षा और आर्थिक भागीदारी में तेज सुधार हुआ है। लेकिन इसके साथ ही सामाजिक और पारिवारिक बाधाएं अब भी बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। यह सर्वे 2023-24 के दौरान करीब 6.79 लाख घरों में किया गया, जिसमें 715 जिलों को शामिल किया गया। रिपोर्ट यह दिखाती है कि महिलाएं अब पहले से ज्यादा डिजिटल और आर्थिक रूप से सक्रिय हो रही हैं, लेकिन समान अवसर की राह अभी पूरी तरह आसान नहीं हुई है।
डिजिटल पहुंच में ऐतिहासिक बढ़ोतरी, महिलाओं की नई पहचान
NFHS-6 के मुताबिक भारत में महिलाओं के इंटरनेट उपयोग में बड़ा उछाल देखा गया है। यह आंकड़ा 33.3 प्रतिशत से बढ़कर 64.3 प्रतिशत तक पहुंच गया है, यानी लगभग दोगुनाइसके साथ ही मोबाइल फोन और बैंक खाते जैसी बुनियादी डिजिटल सुविधाओं तक महिलाओं की पहुंच भी बढ़ी है। अब अधिक महिलाएं डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए जानकारी, सेवाओं और वित्तीय लेनदेन से जुड़ रही हैं, अब समझिए, यह सिर्फ तकनीकी बदलाव नहीं है, बल्कि सामाजिक बदलाव की भी शुरुआत है।
आर्थिक भागीदारी बढ़ी, महिलाओं की वित्तीय आजादी मजबूत
रिपोर्ट के अनुसार महिलाओं के बैंक खातों का उपयोग और वित्तीय स्वतंत्रता में भी सुधार हुआ है। अब 89 प्रतिशत महिलाएं बैंकिंग सिस्टम से जुड़ चुकी हैं। यही नहीं, डिजिटल पेमेंट और मोबाइल आधारित सेवाओं के बढ़ते उपयोग ने महिलाओं को आर्थिक निर्णयों में ज्यादा सक्रिय बनाया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में देखने को मिल रहा है ।हालांकि, यही सवाल उठता है कि क्या यह भागीदारी वास्तविक स्वतंत्रता में बदल रही है या अभी भी सीमित दायरे में है।
शिक्षा और डिजिटल लर्निंग का बढ़ता असर
NFHS-6 यह भी संकेत देता है कि शिक्षा का स्तर बढ़ने के साथ महिलाओं की डिजिटल क्षमता में भी सुधार हुआ है। शोध और अध्ययनों के अनुसार, डिजिटल साक्षरता महिलाओं को न केवल तकनीक इस्तेमाल करने में मदद करती है, बल्कि उन्हें आर्थिक और सामाजिक निर्णयों में भी सक्षम बनाती है। यही वजह है कि जिन क्षेत्रों में शिक्षा और इंटरनेट की पहुंच बेहतर है, वहां महिलाओं का सशक्तिकरण भी तेजी से बढ़ा है।
सामाजिक बाधाएं अभी भी बड़ी चुनौती
हालांकि प्रगति साफ दिखाई देती है, लेकिन रिपोर्ट यह भी बताती है कि सामाजिक बाधाएं अभी खत्म नहीं हुई हैं। कई जगहों पर महिलाओं को डिजिटल उपयोग, शिक्षा और रोजगार में सीमित स्वतंत्रता मिलती है। ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट और तकनीक तक पहुंच अब भी असमान है। यही सवाल अब अहम हो जाता है कि क्या डिजिटल भारत का लाभ हर महिला तक बराबरी से पहुंच रहा है या नहीं।

समानता की ओर सफर जारी
NFHS-6 का निष्कर्ष है भारत में महिलाओं की स्थिति बेहतर हो रही है, लेकिन यह यात्रा अभी पूरी नहीं हुई है। डिजिटल पहुंच, शिक्षा और आर्थिक भागीदारी में सुधार एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन असली चुनौती इसे समान और व्यापक बनाना है। अगर यह गति बनी रहती है, तो आने वाले वर्षों में महिलाएं भारत की आर्थिक और सामाजिक संरचना में और मजबूत भूमिका निभा सकती हैं।