ईरान-इजराइल जंग बढ़ने पर भारत में रसोई गैस इमरजेंसी लागू। सरकार ने सभी तेल कंपनियों को LPG उत्पादन बढ़ाने का आदेश दिया। प्रोपेन-ब्यूटेन अब सिर्फ रसोई गैस में इस्तेमाल होंगे।
नई दिल्ली। ईरान-इजराइल जंग के बढ़ते तनाव के बीच भारत में रसोई गैस इमरजेंसी लागू कर दी गई है। सरकार ने सभी तेल कंपनियों IOC, HPCL और BPCL को LPG उत्पादन बढ़ाने का आदेश दिया है। इसका उद्देश्य देश के लगभग 33.2 करोड़ LPG कंज्यूमर्स को बिना किसी रुकावट के सिलेंडर उपलब्ध कराना है।
ईरान-इजराइल जंग का असर भारत की गैस सप्लाई पर
मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने और सप्लाई चेन में रुकावट की वजह से भारत में LPG और CNG की सप्लाई प्रभावित हो सकती है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के ड्रोन हमलों के बाद कतर ने LNG (लिक्विफाइड नेचुरल गैस) उत्पादन रोक दिया है। भारत को सालाना लगभग 2.7 करोड़ टन LNG कतर से आयात करना होता है, जिससे घरेलू बाजार में सप्लाई में 40% कटौती हो गई है। इस कमी के चलते सरकार ने इमरजेंसी पावर का उपयोग करते हुए सभी ऑयल रिफाइनरी कंपनियों को प्रोपेन और ब्यूटेन का इस्तेमाल सिर्फ रसोई गैस बनाने के लिए करने का निर्देश दिया है।
सरकारी कंपनियों को मिलेगी प्राथमिकता
सरकारी आदेश के मुताबिक, सभी रिफाइनरियों को अपने पास मौजूद प्रोपेन और ब्यूटेन की सप्लाई सरकारी तेल कंपनियों को करनी होगी। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि एलपीजी सिलेंडर देशभर में समय पर उपभोक्ताओं तक पहुंचें। प्राइवेट सेक्टर और रिलायंस इंडस्ट्रीज पर असर प्रोपेन और ब्यूटेन का डायवर्जन पेट्रोकेमिकल प्रोडक्शन में कमी लाएगा। रिलायंस जैसे कंपनियों के अल्काइलेट्स और पॉलीप्रोपाइलीन प्रोडक्शन पर असर पड़ेगा। पेट्रोकेमिकल प्रोडक्ट्स का मुनाफा LPG के मुकाबले ज्यादा होता है, इसलिए कंपनियों के मार्जिन पर असर दिख सकता है।
LPG, प्रोपेन और ब्यूटेन क्या हैं?
LPG (Liquefied Petroleum Gas): रसोई गैस के लिए इस्तेमाल होने वाला प्रोपेन और ब्यूटेन का मिश्रण। प्रोपेन / ब्यूटेन: ये हाइड्रोकार्बन गैसें हैं, जो कच्चे तेल की रिफाइनिंग के दौरान निकलती हैं। इनका इस्तेमाल पेट्रोकेमिकल और फ्यूल दोनों में होता है।
देश में संभावित गैस किल्लत और भाव बढ़ोतरी
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर मिडिल ईस्ट में संघर्ष लंबा चला, तो भारत में CNG और PNG की कीमतें भी बढ़ सकती हैं। शहरों में सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों (CGD) ने चेतावनी दी है कि सप्लाई बाधित होने पर उपभोक्ताओं को गैस सिलेंडर और पाइप्ड गैस के लिए अधिक कीमत चुकानी पड़ सकती है।

सरकार का उद्देश्य है देश के 33.2 करोड़ LPG उपभोक्ताओं को सुरक्षित और निरंतर सप्लाई सुनिश्चित करना। प्रोपेन और ब्यूटेन का सिर्फ रसोई गैस उत्पादन में इस्तेमाल करना और घरेलू गैस आपूर्ति संकट से बचाना और कीमतों में अस्थिरता रोकना।