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India Oil Supply Safe Despite Hormuz

होर्मुज बंद, फिर भी भारत को नहीं होगी तेल की कमी? सूत्रों का दावा 60% सप्लाई दूसरे रास्तों से

होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने के बावजूद भारत के पास 3-4 हफ्तों का कच्चे तेल का स्टॉक। 60% आयात अन्य समुद्री मार्गों से, सरकार ने कमी की आशंका खारिज की।


होर्मुज बंद फिर भी भारत को नहीं होगी तेल की कमी  सूत्रों का दावा 60 सप्लाई दूसरे रास्तों से

नई दिल्ली। होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने की खबरों के बीच जहां दुनिया भर में तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ी है, वहीं भारत सरकार के सूत्रों का दावा है कि देश फिलहाल ऊर्जा सुरक्षा के मामले में “comfortable position” में है। सूत्रों ने बताया कि भारत की कुल कच्चे तेल की आपूर्ति का करीब 60% हिस्सा ऐसे समुद्री मार्गों से आता है, जो होर्मुज से होकर नहीं गुजरते। यानी सिर्फ 40% सप्लाई इस संवेदनशील कॉरिडोर पर निर्भर है। 

4 हफ्तों का स्टॉक मौजूद

सरकारी अधिकारियों के मुताबिक भारत के पास इस समय 3 से 4 हफ्तों का कच्चे तेल और पेट्रोल-डीजल सहित ईंधन उत्पादों का भंडार मौजूद है। भारत, जो दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक है, अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से मंगाता है। ऐसे में Strait of Hormuz का बंद होना सामान्य तौर पर बड़ी चिंता की बात होती। लेकिन सूत्रों का कहना है कि एलपीजी और एलएनजी के मामले में भी भारत की स्थिति स्थिर है। 

मिडिल ईस्ट में तनाव

मौजूदा संकट ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच बढ़ते सैन्य टकराव के बाद गहरा गया। ईरान ने होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों को चेतावनी दी है कि वे इस रास्ते का इस्तेमाल न करें। ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन के बाद क्षेत्र में अस्थिरता और बढ़ गई है। इसके चलते वैश्विक बाजारों में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखा गया है। 

रूस से आयात बढ़ाने पर विचार?

सूत्रों ने संकेत दिए हैं कि आपात स्थिति में रूस से अधिक कच्चा तेल मंगाने का विकल्प भी खुला रखा गया है। हालांकि भारत पहले से तय अनुबंधों के तहत रूसी तेल आयात जारी रखे हुए है। दिलचस्प यह है कि हाल ही में हुए भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के बाद रूस से तेल खरीद सीमित करने की बात कही गई थी। इसके बावजूद, मौजूदा अनुबंधों के तहत आयात जारी है।  

तेल मंत्रालय और ऑयल मार्केटिंग कंपनियां लगातार हालात की समीक्षा कर रही हैं। सरकार का कहना है कि घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन हालात पर पैनी नजर रखी जा रही है। ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है , पर फिलहाल भारत के पास समय और विकल्प दोनों मौजूद हैं।