संसद सदन के दौरान एपस्टीन फाइल्स में नाम आने पर हरदीप पुरी ने राहुल गांधी के आरोपों को निराधार बताते हुए प्रतिनिधिमंडल में मुलाकात की बात कही।
नई दिल्लीः एपस्टीन फाइल्स को लेकर संसद में हुई टिप्पणी के बाद केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर तीखा पलटवार किया। बुधवार को पत्रकारों से बातचीत में पुरी ने साफ कहा कि बदनाम अमेरिकी फाइनेंसर जेफरी एपस्टीन से उनकी मुलाकात केवल 'कुछ मौकों पर, एक प्रतिनिधिमंडल के हिस्से के रूप में' हुई थी और उनके बीच सिर्फ एक ईमेल का आदान-प्रदान हुआ था। उन्होंने आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया।
बेबुनियाद आरोप लगाने की आदत
राहुल गांधी के संसद में दिए गए भाषण के कुछ घंटों बाद पुरी ने कहा कि एपस्टीन के साथ उनकी किसी भी बातचीत का उन आपराधिक आरोपों से कोई संबंध नहीं है, जिनका जिक्र फाइल्स में है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को बेबुनियाद आरोप लगाने की आदत है।
पुरी ने बताया कि उस समय उनका मुख्य संपर्क लिंक्डइन के सह-संस्थापक रीड हॉफमैन से था। उन्होंने हॉफमैन को भारत आने का निमंत्रण भी दिया था। तीन मिलियन ईमेल में उनका नाम तीन-चार बार आया है। पुरी ने दोहराया कि वह एक प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा थे और एपस्टीन से केवल औपचारिक मुलाकात हुई थी।
'मेक इन इंडिया' पर हुई थी चर्चा
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि उनकी बातचीत “मेक इन इंडिया” जैसे विषयों तक सीमित थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि एपस्टीन की गतिविधियों में उनकी कोई रुचि नहीं थी और न ही वे उन कथित अपराधों से किसी तरह जुड़े थे।
उन्होंने कहा, 'मेरी किसी भी बातचीत का उन अपराधों से कोई लेना-देना नहीं था, जिनके आरोप उन पर हैं।' पुरी ने यह भी कहा कि एपस्टीन ने उन्हें “दोमुंहा” कहा था और राहुल गांधी को ईमेल पढ़ने चाहिए।
एपस्टीन फाइल्स पर क्या कहा?
पुरी ने कहा कि एपस्टीन फाइल्स गंभीर आपराधिक आरोपों और कुकर्मों से संबंधित हैं, जिनमें एक निजी द्वीप पर लोगों को ले जाकर यौन शोषण किए जाने जैसे आरोप शामिल हैं। पीड़ितों ने इस मामले में शिकायतें भी दर्ज कराई हैं। उन्होंने दोहराया कि उनका इन मामलों से कोई संबंध नहीं है और उनके खिलाफ लगाए जा रहे आरोप पूरी तरह निराधार हैं।
मसखरेपन के तत्व वाला बयान
कांग्रेस सांसद पर हमला बोलते हुए पुरी ने कहा कि देश में दो तरह के नेता होते हैं-एक वे जो दिन-रात काम कर देश को आगे बढ़ाते हैं और दूसरे वे जिनके आचरण में 'मसखरेपन के तत्व' नजर आते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने राहुल गांधी को 'मसखरा' नहीं कहा, बल्कि उनके व्यवहार में 'मसखरेपन के तत्व' बताए हैं। पुरी ने दोहराया कि बिना तथ्यों के आरोप लगाना ठीक नहीं है।
देश की अर्थव्यवस्था पर भी टिप्पणी
पुरी ने कहा कि कुछ नेता राजनीतिक व्यवस्था के भीतर जिम्मेदारी निभाते हुए जनसेवा को प्राथमिकता देते हैं। उनके प्रयासों से देश दसवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था से चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है और अब तीसरे स्थान की ओर अग्रसर है।