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सरकार का बड़ा फैसला:रेल अधिकारी अब नहीं पहनेंगे काला कोट

सरकार का बड़ा फैसला:रेल अधिकारी अब नहीं पहनेंगे काला कोट

सरकार का बड़ा फैसलारेल अधिकारी अब नहीं पहनेंगे काला कोट

रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव ने रेलवे कर्मचारियों और अधिकारियों से औपनिवेशिक सोच को पूरी तरह पीछे छोड़ने का आह्वान किया और कहा कि अंग्रेजों के जमाने का बंद गले का काला कोट अब रेलवे का औपचारिक पोशाक नहीं रहेगा।

इस पहनावे की शुरुआत अंग्रेजों ने की थी, और अब इसे समाप्त कर दिया गया है। यह ड्रेस अब तक निरीक्षण, परेड, विशेष अवसरों और वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में पहनी जाती थी। हालांकि यह नियम ग्रुप-डी, ट्रैकमैन और तकनीकी स्टाफ पर लागू नहीं था।

रेलमंत्री यह बात दिल्ली में आयोजित 70वें अति विशिष्ट रेल सेवा पुरस्कार समारोह में बोल रहे थे। इस दौरान रेलवे के सौ अधिकारियों को उनके विशिष्ट कार्यों के लिए पुरस्कृत किया गया।

रेलमंत्री ने कहा कि औपनिवेशिक मानसिकता को खोज-खोजकर पूरी तरह हटाना होगा। चाहे वह काम करने का तरीका हो या पहनावा। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय कंपनियों और समाधानों पर भरोसा बढ़ाना होगा।

52 हफ्ते, 52 सुधार: नया लक्ष्य

रेलमंत्री ने वर्ष 2026 के लिए रेलवे के छह बड़े संकल्प भी साझा किए। उन्होंने बताया कि 2026 में ‘52 हफ्ते, 52 सुधार’ के लक्ष्य के साथ सेवा, उत्पादन, निर्माण, अनुरक्षण और सुविधाओं सहित हर आयाम में बड़े सुधार किए जाएंगे।

नवाचार और पुरस्कार

रेलमंत्री ने बताया कि अगले वर्ष 12 नए इनोवेशन अवार्ड दिए जाएंगे। इनमें सर्वश्रेष्ठ टीम को 1 लाख रुपये और अन्य को 50 हजार रुपये का नकद पुरस्कार मिलेगा। ये पुरस्कार उन टीमों को दिए जाएंगे जिन्होंने रेलवे के लिए उपयोगी नवाचार किए हैं।

उन्होंने कहा कि गलतियों से सीखकर आगे बढ़ना होगा और भारत में विकसित तकनीक को दुनिया तक पहुंचाना होगा।

तकनीक और भविष्य की योजना

रेलमंत्री ने कहा कि अब रेलवे को तकनीक, नवाचार और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को खुले मन से अपनाना होगा ताकि पिछले सौ वर्षों की कमी को दूर किया जा सके। इसके लिए नई तकनीकी नीति बनाई जा रही है।

युवा कार्यबल, नवाचार और आत्मविश्वास के साथ भारतीय रेल 2047 तक विकसित भारत की यात्रा का मजबूत स्तंभ बनेगी।


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