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UPI Charges: New MDR Rules From October 15

UPI Charge: यूपीआई चार्ज पर सरकार का रुख साफ, 15 अक्टूबर से लागू होगा नया MDR, SC में भी चुनौती

केंद्र सरकार ने 2000 रुपये से अधिक के चुनिंदा यूपीआई पेमेंट पर एमडीआर लागू करने के फैसले को वापस लेने से इनकार किया है। नया नियम 15 अक्टूबर से लागू होगा। इस बीच सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई।


upi charge यूपीआई चार्ज पर सरकार का रुख साफ 15 अक्टूबर से लागू होगा नया mdr sc में भी चुनौती

UPI MDR Charges Row |

नई दिल्ली। यूनिफाईड पेमेंट सिस्टम यानी यूपीआई  को लेकर बुधवार को सरकार ने अपना रुख साफ कर दिया। यूपीआई को 2000 से ज्यादा के कुछ मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर ललगने वाले मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी एमडीआर के फैसले को वापस लेने से फिलहाल वापस लेने से मना कर दिया है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह शुल्क सीधे ग्राहकों से नहीं लिया जाएगा। नया फ्रेमवर्क 15 अक्टूबर से लागू होगा।

हालांकि इसी फैसले के खिलाफ बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी दाखिल हुई है। याचिकाकर्ता ने वित्त मंत्रालय की ओर से 14 और 15 सितंबर को जारी नोटिफिकेशन को चुनौती दी है। मामले में केंद्र सरकार, भारतीय रिजर्व बैंक, एनपीसीआई और यूपीआई को पक्षकार बनाया गया है।

2000 रुपये से ऊपर के पेमेंट पर क्या बदलेगा

एनपीसीआई के नए फ्रेमवर्क के अनुसार, ऑनलाइन 2000 रुपये से अधिक के पर्सन टू मर्चेंट (P2M) यूपीआई ट्रांजैक्शन पर सामान्य तौर पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर लागू होगा। वहीं, 75000 रुपये या उससे अधिक के लेनदेन पर यह शुल्क अधिकतम 300 रुपये प्रति ट्रांजैक्शन रहेगा। उदाहरण से समझे तो 2000 से अधिक ट्रांजैक्शन पर 0.4 प्रतिशत के हिसाब से 8 रुपये एमडीआर बनता है। यह शुल्क मर्चेंट पेमेंट इकोसिस्टम में तय हिस्सेदारों के बीच बांटा जाएगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि एमडीआर कोई सरकारी टैक्स नहीं है और ग्राहक इसे अलग से वसूलने का प्रावधान नहीं है।

आम यूजर पर कितना असर

सरकार के अनुसार पर्सन टू पर्सन यानी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को किया जाने वाला यूपीआई भुगतान किसी भी राशि पर मुफ्त रहेगा। 2000 रुपये तक के मर्चेंट पेमेंट भी शुल्क से बाहर रहेंगे। छोटे कारोबारियों के लिए भी जीरो एमडीआर की व्यवस्था जारी रहेगी। सरकार का कहना है कि करीब 96 प्रतिशत P2M ट्रांजैक्शन इस बदलाव से प्रभावित नहीं होंगे।

इसका सीधा मतलब यह है कि किसी दोस्त या परिवार के सदस्य को पैसे भेजने पर नया एमडीआर नहीं लगेगा। रोजमर्रा की छोटी खरीदारी के लिए 2000 रुपये तक का यूपीआई भुगतान भी पहले की तरह शुल्क मुक्त रहेगा।

रेलवे, ईंधन और बीमा के लिए अलग व्यवस्था

कुछ जरूरी और कम मार्जिन वाले क्षेत्रों के लिए अलग शुल्क तय किया गया है। रेलवे, टेलीकॉम, बीमा, ईंधन और कृषि इनपुट जैसी श्रेणियों में 2000 रुपये से ऊपर के भुगतान पर 5 रुपये का फ्लैट एमडीआर रखा गया है। वहीं, कैपिटल मार्केट से जुड़े कुछ भुगतान के लिए 0.02 प्रतिशत एमडीआर और अधिकतम 300 रुपये की सीमा तय की गई है।

सरकार ने इस व्यवस्था के पीछे यूपीआई इकोसिस्टम को लंबे समय तक टिकाऊ बनाए रखने की जरूरत बताई है। दूसरी ओर, सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में इस व्यवस्था के आम नागरिकों पर पड़ने वाले संभावित असर का मुद्दा उठाया गया है। अब इस चुनौती पर अदालत में आगे की कार्यवाही होगी।

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