पश्चिम बंगाल की फाल्टा सीट पर दोबारा मतदान के दौरान लंबी कतारें दिखीं, जबकि TMC नेता जहांगीर खान पूरे दिन नदारद रहे। बदले माहौल ने मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है।
दक्षिण 24 परगना। पश्चिम बंगाल की फाल्टा विधानसभा सीट पर गुरुवार को दोबारा मतदान के दौरान ऐसा नजारा दिखा, जो पिछले कई चुनावों में कम ही देखने को मिला। सुबह से ही बूथों के बाहर लंबी कतारें लगी रहीं और बड़ी संख्या में लोग वोट डालने पहुंचे। इस बीच सबसे ज्यादा चर्चा तृणमूल कांग्रेस के बाहुबली नेता जहांगीर खान को लेकर रही। स्थानीय रिपोर्ट्स के मुताबिक वह सुबह से इलाके में नजर नहीं आए। यहां तक कि उनके घर पर भी ताला लगा मिला। हालांकि प्रशासन या उनकी तरफ से इस पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
फाल्टा में यह मतदान सिर्फ एक सीट का चुनाव नहीं माना जा रहा। इलाके के कई वोटर्स इसे डर और दबाव की राजनीति के खिलाफ मौके के तौर पर देख रहे हैं। यही वजह है कि इस बार वोटिंग प्रतिशत को लेकर भी अलग माहौल बन गया है।
TMC प्रत्याशी की गैरमौजूदगी ने बढ़ाई हलचल
फाल्टा सीट पर री-पोल के बीच जहांगीर खान का अचानक सार्वजनिक तौर पर गायब रहना राजनीतिक चर्चा का बड़ा मुद्दा बन गया। न्यूज18 बंगाली की रिपोर्ट के मुताबिक, श्रीरामपुर पश्चिम दुर्गापुर स्कूल के बाहर भारी भीड़ देखी गई, लेकिन खान वहां नहीं पहुंचे। यही वह इलाका है जहां वह पहले मतदान करते रहे हैं। दिलचस्प बात यह भी है कि मतदान से ठीक दो दिन पहले उन्होंने अपना नाम वापस ले लिया था। इसके बाद सीट का पूरा समीकरण बदल गया। स्थानीय स्तर पर इसे TMC की रणनीतिक पीछे हटने की चाल के रूप में भी देखा जा रहा है, हालांकि पार्टी की ओर से खुलकर कुछ नहीं कहा गया।
सालों बाद खुलकर वोट डालने की बात क्यों कर रहे लोग
री-पोल के दौरान कई मतदाताओं ने दावा किया कि पिछले डेढ़ दशक में वे खुलकर मतदान नहीं कर पाए थे। लोगों का कहना है कि इलाके में लंबे समय तक दबाव और डर का माहौल रहा, जिसकी वजह से कई वोटर्स बूथ तक नहीं पहुंचते थे। 29 मई को हुए पिछले मतदान में वोट नहीं डाल पाने को लेकर लोगों ने विरोध भी किया था। इस बार सुबह से बूथों पर महिलाओं और बुजुर्गों की मौजूदगी ने साफ संकेत दिया कि मतदाता अपने वोट को लेकर ज्यादा सक्रिय नजर आ रहे हैं।
फाल्टा सीट पर कुल 2 लाख 36 हजार से ज्यादा मतदाता हैं। इनमें करीब 1.15 लाख महिला वोटर्स शामिल हैं। चुनाव आयोग ने इलाके में 285 बूथ बनाए हैं ताकि मतदान प्रक्रिया प्रभावित न हो।
अब सीधा मुकाबला बीजेपी और लेफ्ट के बीच
जहांगीर खान के मैदान से हटने के बाद चुनावी लड़ाई पूरी तरह बदल गई है। अब मुकाबला मुख्य रूप से बीजेपी और लेफ्ट के बीच माना जा रहा है। बीजेपी ने यहां से देबांशू पंडा को उम्मीदवार बनाया है, जबकि CPM के शंभूनाथ कुड़मी मैदान में हैं। कांग्रेस ने अब्दुल रज्जाक को उतारा है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों की नजर फिलहाल बीजेपी और लेफ्ट के वोट ट्रांसफर पर टिकी हुई है। फाल्टा का यह चुनाव इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि यहां का नतीजा दक्षिण बंगाल में विपक्ष की पकड़ और TMC के स्थानीय प्रभाव दोनों का संकेत दे सकता है।
बीजेपी ने जीत का किया बड़ा दावा
बीजेपी उम्मीदवार देबांशू पंडा ने मतदान के दौरान माहौल को “उत्सव जैसा” बताया। उन्होंने दावा किया कि लोग बिना किसी डर के वोट डाल रहे हैं और पार्टी बड़ी जीत दर्ज करेगी। पंडा ने तंज कसते हुए कहा कि जहांगीर खान को पहले ही अंदाजा हो गया था कि उन्हें बहुत कम समर्थन मिलने वाला है। इसी वजह से उन्होंने चुनाव से दूरी बना ली।
हालांकि दूसरी ओर लेफ्ट भी शांत तरीके से अपने वोट बैंक को बूथ तक लाने में जुटी रही। ऐसे में फाल्टा की यह लड़ाई अब सिर्फ सीट जीतने तक सीमित नहीं दिख रही, बल्कि यह बंगाल की बदलती राजनीतिक जमीन का संकेत भी बनती जा रही है।