पश्चिम बंगाल की फलता विधानसभा सीट पर हुए पुनर्मतदान के नतीजों ने राज्य की राजनीति में नया संदेश दे दिया है। मतगणना के शुरुआती राउंड से ही बीजेपी उम्मीदवार ने ऐसी बढ़त बनाई, जिसे विपक्ष पकड़ नहीं सका। 16 राउंड की गिनती के बाद बीजेपी की लीड 77 हजार वोटों से आगे निकल गई।
इस सीट पर मुकाबला पहले टीएमसी और बीजेपी के बीच माना जा रहा था। लेकिन मतदान से ठीक पहले टीएमसी उम्मीदवार जहांगीर खान के चुनाव से पीछे हटने के ऐलान ने पूरा समीकरण बदल दिया। इसके बाद फलता का चुनाव सिर्फ एक सीट की लड़ाई नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक ताकत दिखाने का मैदान बन गया।
21 मई को यहां दोबारा मतदान कराया गया था। चुनाव आयोग ने पहले चरण के मतदान में ईवीएम से छेड़छाड़ और टेप लगाने जैसी शिकायतों के बाद री-पोलिंग का फैसला लिया था। भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच वोटिंग शांतिपूर्ण रही और लोगों ने लंबी कतारों में लगकर मतदान किया।
बीजेपी की बढ़त ने विपक्ष को किया बैकफुट पर
मतगणना के 16 राउंड पूरे होने तक बीजेपी उम्मीदवार को 1 लाख 11 हजार 270 वोट मिल चुके थे। सीपीआई (एम) उम्मीदवार 34 हजार 873 वोटों के साथ दूसरे स्थान पर रहे। कांग्रेस उम्मीदवार तीसरे नंबर पर पहुंच गए। दिलचस्प बात यह रही कि मैदान छोड़ने का एलान कर चुके जहांगीर खान को भी 5 हजार से ज्यादा वोट मिले।
फलता में बीजेपी की यह बढ़त सिर्फ चुनावी आंकड़ा नहीं मानी जा रही। राजनीतिक विश्लेषक इसे बंगाल में पार्टी की संगठनात्मक पकड़ और विपक्ष की कमजोर रणनीति से जोड़कर देख रहे हैं। खासतौर पर तब, जब पुनर्मतदान के बाद बीजेपी के पक्ष में माहौल साफ दिखाई देने लगा था।
जहांगीर खान के फैसले ने बदला चुनाव का मूड
री-पोलिंग से दो दिन पहले जहांगीर खान ने चुनावी मैदान से हटने की घोषणा कर दी थी। हालांकि तृणमूल कांग्रेस ने इसे उनका निजी फैसला बताया। इसके बावजूद इस फैसले का असर पूरे इलाके में महसूस किया गया। स्थानीय स्तर पर कई मतदाताओं के बीच भ्रम की स्थिति बनी रही। कुछ वोटर आखिरी समय तक उम्मीदवार की स्थिति समझने में लगे रहे। इसके बाद विपक्षी वोटों का बंटवारा साफ नजर आया, जिसका सीधा फायदा बीजेपी को मिला।
री-पोलिंग के पीछे क्या था विवाद
29 अप्रैल को हुए पहले मतदान के दौरान ईवीएम पर इत्र जैसी चीजें लगाने और एडहेसिव टेप इस्तेमाल करने के आरोप लगे थे। शिकायतें बढ़ने के बाद चुनाव आयोग ने मामले को गंभीर मानते हुए दोबारा मतदान कराने का आदेश दिया। री-पोलिंग के दिन 285 मतदान केंद्रों पर केंद्रीय बलों की 35 कंपनियां तैनात की गई थीं। सुबह से शाम तक सुरक्षा का सख्त घेरा दिखाई दिया। शाम पांच बजे तक 86.11 प्रतिशत मतदान दर्ज हुआ, जो पहले मतदान से थोड़ा कम था लेकिन लोगों की भागीदारी फिर भी काफी ज्यादा रही।
बंगाल की राजनीति में क्यों अहम मानी जा रही फलता सीट
फलता का परिणाम सिर्फ स्थानीय जीत-हार तक सीमित नहीं है। बीजेपी अगर यह सीट आधिकारिक तौर पर जीतती है तो विधानसभा में उसकी संख्या और मजबूत होगी। पार्टी पहले ही 2026 चुनाव में बड़ी बढ़त हासिल कर चुकी है। राजनीतिक तौर पर यह नतीजा इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि बंगाल में बीजेपी लगातार अपनी जमीन मजबूत करने की कोशिश कर रही है। वहीं टीएमसी के भीतर उम्मीदवार चयन और स्थानीय नेतृत्व को लेकर नए सवाल उठ सकते हैं।