'हाड़ा' विकास सिंह, सिद्धार्थनगर: भारत के पड़ोसी राष्ट्र नेपाल में दीपावली का पर्व अपनी अनूठी धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं के लिए विशेष पहचान रखता है। यहां दीपावली को 'तिहार' के नाम से मनाया जाता है। इस पर्व की सबसे खास बात यह है कि इसमें मनुष्य के साथ-साथ कौवे, कुत्ते, गाय और बैलों की भी पूजा की जाती है। इनके माध्यम से प्रकृति, जीव-जंतुओं और पारिवारिक रिश्तों के प्रति सम्मान एवं प्रेम का संदेश दिया जाता है।
तिहार पर्व को लेकर नेपाल में तैयारियां शुरू हो गई हैं। भारत के विभिन्न शहरों में रोजगार और व्यवसाय के सिलसिले में रह रहे नेपाली नागरिक भी दीपावली मनाने के लिए अपने घरों को लौटने लगे हैं। पांच पारंपरिक आयोजनों वाला यह पर्व इस बार चार दिनों में संपन्न होगा। इसकी शुरुआत 7 नवंबर को काग तिहार से होगी, जबकि 11 नवंबर को भाई टीका के साथ पर्व का समापन होगा।
भारत और नेपाल के बीच सदियों पुराने रोटी-बेटी के संबंधों के साथ धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं की भी गहरी समानता है। नेपाल में हिंदू धर्मावलंबी तिहार को पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाते हैं। पर्व के मद्देनजर घरों की साफ-सफाई कर उन्हें दीपों, फूलों और रंग-बिरंगी विद्युत झालरों से सजाया जाता है। यमपंचक के अंतर्गत अलग-अलग दिनों में कौवे, कुत्ते, गाय और बैलों की पूजा की जाती है। वहीं, अंतिम दिन बहनें भाइयों के माथे पर पांच रंगों का विशेष तिलक लगाकर उनकी लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं।
काग तिहार : कौवों की पूजा से होगी पर्व की शुरुआत
तिहार के पहले दिन 7 नवंबर को काग तिहार मनाया जाएगा। इस दिन कौवों को यमराज का दूत मानकर उनकी पूजा की जाती है। घरों की छतों और आंगन में कौवों के लिए भोजन रखा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि कौवों को भोजन कराने और प्रसन्न करने से परिवार पर आने वाली विपत्तियां दूर होती हैं।
कुकुर तिहार : कुत्तों को पहनाई जाती है फूलों की माला
8 नवंबर को कुकुर तिहार मनाया जाएगा। इस दिन कुत्तों को स्नान कराकर उनके माथे पर तिलक लगाया जाता है और गले में फूलों की माला पहनाई जाती है। इसके बाद उन्हें उनकी पसंद का भोजन कराया जाता है। हिंदू मान्यताओं में कुत्ते को यमराज का दूत और भगवान भैरव का प्रिय वाहन माना जाता है। नेपाल में यह परंपरा कुत्तों के प्रति प्रेम, निष्ठा और सम्मान प्रकट करने का अनूठा माध्यम है।
लक्ष्मी पूजा : गाय को माना जाता है मां लक्ष्मी का स्वरूप
9 नवंबर को गाई तिहार यानी गाय की पूजा और लक्ष्मी पूजा का आयोजन होगा। हिंदू धर्म में गाय को पवित्र एवं पूजनीय माना गया है। इस दिन श्रद्धालु गाय को तिलक लगाकर उसकी पूजा करते हैं। साथ ही घरों में मां लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर धन, धान्य, सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की जाती है। घरों को दीपों से सजाया जाता है। इस अवसर पर युवतियां और किशोरियां घर-घर जाकर पारंपरिक 'भाइलो' और 'देउसी' कार्यक्रम प्रस्तुत करती हैं।
गोवर्धन पूजा : बैलों का पूजन कर जताते हैं आभार
10 नवंबर को गोवर्धन पूजा, महापूजा और बैल पूजा की परंपरा निभाई जाएगी। कृषि प्रधान नेपाली समाज में बैलों का विशेष महत्व है। इस दिन बैलों को सजाकर उनका पूजन किया जाता है और कृषि कार्यों में उनके योगदान के प्रति आभार व्यक्त किया जाता है। इसके साथ ही कई स्थानों पर गोवर्धन पूजा भी श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाई जाती है।
भाई टीका : भाई-बहन के अटूट प्रेम का प्रतीक
11 नवंबर को तिहार का अंतिम और सबसे भावनात्मक आयोजन भाई टीका मनाया जाएगा। इस दिन बहनें अपने भाइयों के माथे पर पांच रंगों का विशेष तिलक लगाती हैं। इसके साथ ही भाइयों की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। भाई भी बहनों को उपहार देकर उनके प्रति प्रेम, सम्मान और सुरक्षा का संकल्प व्यक्त करते हैं। यह परंपरा भाई-बहन के अटूट प्रेम और पारिवारिक रिश्तों की मजबूती का प्रतीक है।
जीव-जंतुओं के प्रति करुणा और सामाजिक सद्भाव का संदेश देता है तिहार
नेपाल का तिहार केवल दीपों और रोशनी का त्योहार नहीं है, बल्कि यह जीव-जंतुओं के प्रति करुणा, प्रकृति के सम्मान, पारिवारिक रिश्तों और सामाजिक सद्भाव का अनूठा संदेश भी देता है। यही वजह है कि नेपाल के साथ-साथ भारत के सीमावर्ती क्षेत्रों में भी इस पर्व की परंपराओं और उत्सवों को लेकर खासा उत्साह देखने को मिलता है।