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Dr Mohan Bhagwat on Sanskrit at Bharati Event

संस्कृत राष्ट्र की आत्मा, सभी सीखने का करें प्रयास : डॉ. भागवत

संस्कृत भारती के केंद्रीय कार्यालय के शुभारंभ कार्यक्रम में सम्मिलित हुए सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत


संस्कृत राष्ट्र की आत्मा सभी सीखने का करें प्रयास  डॉ भागवत

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने संस्कृत को राष्ट्र की आत्मा बताते हुए लोगों से इसे सीखने अपील की है। डॉ. भागवत ने दिल्ली में दीनदयाल उपाध्याय मार्ग पर स्थित संस्कृत भारती के केंद्रीय कार्यालय के उद्घाटन अवसर पर सोमवार को कहा कि संस्कृत भारती एक ऐसी संस्था है, जो संस्कृत को एक जीवंत और व्यापक रूप से प्रयुक्त भाषा के रूप में बढ़ावा देने के लिए समर्पित है।

संस्कृत भाषा के पुनरुत्थान और वैश्विक प्रसार में अग्रणी संस्था संस्कृत भारती का नवनिर्मित केंद्रीय कार्यालय भवन 'प्रणव' नौ मंजिला है और यह अत्याधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित है। डॉ. भागवत ने कहा कि अक्षय तृतीया के दिन जो कार्य प्रारंभ होते हैं, वह अक्षुण्ण रहते हैं। यही बात संस्कृत के बारे में कहा गया है। कभी न क्षय होने वाला आभूषण संस्कृत है। उसका कार्यालय अपने आप में यह संदेश दे रहा है। कार्यालय के उद्घाटन में उसके आनंद उत्साह में कार्य का भाव भी स्थिर होना चाहिए। रुचि के साथ प्रयोजन भी हो तो कार्य अच्छा और निरंतर होता है। साधन नहीं अवस्था में कार्य आरम्भ होता है।

उन्होंने कहा, 'संस्कृत एक भाषा है, फिर भी यह मात्र एक भाषा नहीं है। भारत में संस्कृत राष्ट्र की आत्मा है, क्योंकि यह विचार, जीवन और संस्कृति की सबसे प्राचीन परंपरा है। एक ऐसी परंपरा जो आज भी जीवंत है जो भारत में विद्यमान है।' उन्होंने भारत के दार्शनिक विचार को और विस्तार से समझाते हुए कहा, 'भारत का अस्तित्व मात्र एक भौगोलिक तथ्य नहीं है। यह महज एक राजनीतिक या आर्थिक इकाई नहीं है। भारत एक जीवंत परंपरा है- वह आधारशिला जिस पर जीवन की निरंतरता टिकी हुई है।'

15 वर्षों में दिखा परिवर्तनकारी बदलाव 

उन्होंने कहा कि पिछले 15 वर्षों में संस्कृत के प्रति सामाजिक दृष्टिकोण में परिवर्तनकारी बदलाव साफ रूप से दिखाई दे रहा है। बदलती परिस्थितियां लोगों को अपनी सांस्कृतिक स्थिर होना चाहिए। रुचि के साथ प्रयोजन भी हो तो कार्य अच्छा और निरंतर होता है। साधन नहीं अवस्था में कार्य आरम्भ होता है। उन्होंने कहा, 'संस्कृत एक भाषा है, फिर भी यह मात्र एक भाषा नहीं है। भारत में संस्कृत राष्ट्र की आत्मा है, क्योंकि यह विचार, जीवन और संस्कृति की सबसे प्राचीन परंपरा है। एक ऐसी परंपरा जो आज जड़ों से फिर से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित कर रही हैं। ऐसे संदर्भ में संस्कृत सीखने और समझाने के अवसर प्रदान करना एक महत्वपूर्ण मिशन बन जाता है। 

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