Breaking News
  • ईरान संघर्ष के बावजूद 17 मार्च को 44 मध्य पूर्व की उड़ानें चलाएगी एयर इंडिया
  • लोकसभा: 8 विपक्षी सांसदों का सस्पेंशन वापस
  • श्रीलंका फ्यूल संकट: श्रीलंका ने दफ्तरों में चार दिन काम का नियम लागू किया
  • 47 हजार मीट्रिक टन LPG लेकर होर्मुज से 'नंदा देवी' शिप भी भारत लौटा
  • भारत ने काबुल अस्पताल पर पाकिस्तान के हमले की निंदा की
  • बंगाल में चुनाव से पहले मुख्य सचिव-DGP को हटाया: कोलकाता पुलिस कमिश्नर समेत 6 अधिकारी बदले
  • धार भोजशाला विवाद पर MP हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, जज खुद करेंगे मुआयना

होम > देश

DMK गठबंधन विस्तार

DMK ने बढ़ाया गठबंधन दायरा, तमिलनाडु चुनाव 2026 में ‘विजय फैक्टर’ से मुकाबला कड़ा

तमिलनाडु चुनाव 2026 में DMK ने गठबंधन मजबूत किया। अभिनेता विजय की एंट्री से मुकाबला दिलचस्प, सीट शेयरिंग और एंटी-इंकम्बेंसी बड़ी चुनौती।


dmk ने बढ़ाया गठबंधन दायरा तमिलनाडु चुनाव 2026 में ‘विजय फैक्टर’ से मुकाबला कड़ा

चेन्नई: तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर सियासी गतिविधियां तेज हो गई हैं। Dravida Munnetra Kazhagam (DMK) के नेतृत्व वाला गठबंधन इस बार अपने दायरे को और बड़ा कर रहा है। मुख्यमंत्री M. K. Stalin की अगुवाई में पार्टी लगातार दूसरी बार सत्ता में वापसी का लक्ष्य लेकर रणनीति बना रही है। DMK गठबंधन पहले ही 2021 विधानसभा और 2019 व 2024 लोकसभा चुनाव जीत चुका है। इस बार पार्टी ने छोटे दलों को जोड़कर गठबंधन को और मजबूत किया है, जिससे चुनावी मुकाबले में बढ़त बनाए रखने की कोशिश की जा रही है।

गठबंधन में 20 से ज्यादा दल, छोटे दलों पर फोकस

DMK ने अपने गठबंधन में कई छोटे और क्षेत्रीय दलों को शामिल किया है। इनमें Kamal Haasan की पार्टी Makkal Needhi Maiam, Desiya Murpokku Dravida Kazhagam (DMDK) और Social Democratic Party of India (SDPI) जैसे दल शामिल हैं। पार्टी सूत्रों के अनुसार, इन छोटे दलों का प्रभाव भले ही सीमित क्षेत्रों में हो, लेकिन करीबी मुकाबलों में ये निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। 

‘विजय फैक्टर’ से बढ़ी चुनौती

इस चुनाव की सबसे बड़ी नई बात अभिनेता Vijay की राजनीति में एंट्री है। उनकी पार्टी Tamilaga Vettri Kazhagam (TVK) पहली बार चुनावी मैदान में उतर रही है। विजय का युवाओं और महिलाओं के बीच बड़ा जनाधार माना जाता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मतदाताओं में “एक मौका देने” की सोच भी देखी जा रही है, जो चुनावी समीकरण बदल सकती है। हालांकि विजय ने DMK को राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी और भाजपा को वैचारिक विरोधी बताया है, लेकिन संभावित गठबंधन को लेकर सभी दल सतर्क हैं।

AIADMK और NDA को लेकर सतर्कता

DMK नेतृत्व विपक्ष को हल्के में लेने के मूड में नहीं है। खासतौर पर All India Anna Dravida Munnetra Kazhagam (AIADMK) को लेकर पार्टी सावधानी बरत रही है। 2021 के चुनाव में सत्ता विरोधी माहौल के बावजूद AIADMK गठबंधन ने 75 सीटें जीती थीं। इससे उसके वोट बैंक की मजबूती का संकेत मिलता है। यदि विपक्ष एकजुट होता है, तो कई सीटों पर मुकाबला बेहद करीबी हो सकता है।

सीट शेयरिंग बनी नई चुनौती

गठबंधन के विस्तार के साथ सीट बंटवारा भी जटिल हो गया है। सहयोगी दल ज्यादा सीटों की मांग कर रहे हैं। Indian National Congress को अतिरिक्त सीटें मिलने के बाद अन्य दल भी उसी तरह की मांग कर रहे हैं। DMK नेतृत्व के लिए सभी सहयोगियों को संतुष्ट रखना बड़ी चुनौती बन गया है। कुछ मामलों में पार्टी ने समझौते के तौर पर सहयोगी दलों को अपने चुनाव चिन्ह पर लड़ाने की रणनीति अपनाई है।

एंटी-इंकम्बेंसी से निपटने की कोशिश

सत्ता में होने के कारण DMK को एंटी-इंकम्बेंसी का भी सामना करना पड़ रहा है। महिलाओं की सुरक्षा और अपराध जैसे मुद्दों पर विपक्ष सरकार को घेर रहा है। ऐसे में पार्टी व्यापक गठबंधन के जरिए सामाजिक और राजनीतिक समर्थन दिखाकर इन चुनौतियों को संतुलित करने की कोशिश कर रही है।

Related to this topic: