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Dharmendra Pradhan Resigns

Dharmendra Pradhan Resigns: प्रधान का इस्तीफा! 29 साल पहले खाई थी लाठी!

29 साल पहले एक नौजवान नेता पेपर लीक के खिलाफ सड़क पर था। पुलिस की लाठियां खाईं। सवाल पूछे कि छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ क्यों?


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Dharmendra Pradhan Resigns: प्रधान का इस्तीफा! 29 साल पहले खाई थी लाठी! |

Dharmendra Pradhan Resigns: 29 साल पहले एक नौजवान नेता पेपर लीक के खिलाफ सड़क पर था। पुलिस की लाठियां खाईं। सवाल पूछे कि छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ क्यों? लेकिन वक्त बदला, कुर्सी बदली और अब उसी नेता को एक और पेपर लीक विवाद के बीच शिक्षा मंत्री की कुर्सी छोड़नी पड़ी। नाम है धर्मेंद्र प्रधान...

नीट पेपर लीक वो विवाद जिसने लाखों छात्रों की मेहनत पर सवाल खड़े कर दिए। देशभर में प्रदर्शन हुए। छात्र सड़कों पर उतरे। विपक्ष ने सरकार को घेरा। और लगातार एक ही मांग उठती रही जवाबदेही तय हो। कई हफ्तों तक सियासी घमासान चलता रहा। आखिरकार शनिवार को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना इस्तीफा भेज दिया। इस्तीफे के साथ उन्होंने एक भावुक संदेश भी लिखा।

इस्तीफे में क्या?

धर्मेंद्र प्रधान ने अपने इस्तीफे में ​लिखा है कि, मैं चार दशकों से छात्र, शिक्षक और शिक्षा सुधार के लिए काम करता रहा हूं। मेरा हमेशा मानना रहा कि मजबूत शिक्षा व्यवस्था ही मजबूत राष्ट्र की नींव है। लेकिन हाल की घटनाओं ने मुझे भीतर तक दुखी किया है। युवाओं की भावनाओं का सम्मान करते हुए मैं अपने पद से इस्तीफा दे रहा हूं। 

साल 1997 की वो कहानी...

ओडिशा में बारहवीं के पेपर लीक हुए थे। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने सरकार के खिलाफ बड़ा प्रदर्शन किया। उस प्रदर्शन की अगुवाई कर रहे थे धर्मेंद्र प्रधान। पुलिस ने लाठीचार्ज किया। कई कार्यकर्ता घायल हुए और उनमें धर्मेंद्र प्रधान भी शामिल थे। यानी जिस नेता ने कभी पेपर लीक के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी, आज उसी को पेपर लीक विवाद की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देना पड़ा।

धर्मेंद्र प्रधान का राजनीतिक सफर

धर्मेंद्र प्रधान का जन्म 26 जून 1969 को ओडिशा के तालचर अनुगुल जिला में हुआ था। उनके पिता देवेन्द्र प्रधान भी भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री रहे हैं। उन्होंने अपने छात्र जीवन में ABVP से राजनीति की शुरुआत की और तालचर कॉलेज छात्र संघ के अध्यक्ष रहे। उन्होंने साल 2000 में ओडिशा की पल्लहड़ा विधानसभा सीट से जीत दर्ज कर विधानमंडल में पहुंचे थे। इसके बाद 2004 में वे ओडिशा के देवगढ़ लोकसभा सीट से पहली बार 14वीं लोकसभा के सदस्य चुने गए। इतना ही नहीं भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव के रूप में उन्होंने बिहार, झारखंड और कर्नाटक जैसे राज्यों में पार्टी के संगठन को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई।

मोदी सरकार में प्रधान की भूमिका

मोदी सरकार के पहले और दूसरे कार्यकाल के दौरान उन्होंने लंबे समय तक पेट्रोलियम मंत्रालय का प्रभार संभाला। उनके कार्यकाल में प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना की शुरुआत हुई, जिसे भाजपा की एक बड़ी सफलता माना जाता है। उन्हें देश की राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू करने और शिक्षा क्षेत्र में सुधारों को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी सौंपी गई। 2024 के आम चुनावों के बाद भी उन्हें शिक्षा मंत्रालय का प्रभार दिया गया।

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