BRICS बिजनेस फोरम में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का अहम बयान रहा। उन्होंने पश्चिमी देशों और जी-7 पर निशाना साधा। साथ ही पीएम मोदी की तारीफ में बड़ी बात कह दी है।
नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली में BRICS बिजनेस फोरम में वैश्विक अर्थव्यवस्था, व्यापार और बदलते आर्थिक समीकरणों पर चर्चा हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीरी पुतिन समेत ब्रिक्स देशों के नेताओं ने कारोबार और आर्थिक सहयोग बढ़ाने की जरूरत बताई। इस दौरान पुतिन का पश्चिमी देशों को लेकर दिया बयान खास चर्चा में रहा।
पुतिन ने जी-7 लेकर कसा तंज
रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि दुनिया की आर्थिक तस्वीर तेजी से बदल रही है। उनके अनुसार, पुराने आर्थिक केंद्रों की जगह अब नए देश और नई अर्थव्यवस्थाएँ वैश्विक विकास को आगे बढ़ा रही हैं। इसके साथ ही उन्होंने पश्चिमी देशों पर तंज करते हुए कहा कि जब पश्चिम कमजोर हो रहा है तो कुछ देश अब भी खुद को जी-7 क्यों कहते हैं। उन्होंने ब्रिक्स की बढ़ती आर्थिक हिस्सेदारी का जिक्र करते हुए कहा कि पीपीपी के आधार पर ब्रिक्स की वैश्विक अर्थव्यवस्था में हिस्सेदारी करीब 40 प्रतिशत है। वहीं, जी-67 की हिस्सेदारी करीब 18 प्रतिशत है।
हालांकि पश्चिमी देशों का आर्थिक प्रभाव अभी भी मजबूत है। डॉलर, बैंकिंग, निवेश, तकनीक और वैश्विक वित्तीय संस्थानों में जी-7 देशों की भूमिका बड़ी बनी हुई है।
मोदी ने बताई ब्रिक्स की आर्थिक ताकत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फोरम को संबोधित करते हुए कहा कि ब्रिक्स देशों में दुनिया की लगभग आधी आबादी रहती है। इन देशों की वैश्विक जीडीपी में करीब 40 प्रतिशत हिस्सेदारी है और वैश्विक व्यापार में इनका योगदान 25 प्रतिशत से ज्यादा है। मोदी ने कहा कि पिछले वर्षों में दुनिया की जीडीपी करीब ढाई गुना बढ़ी, जबकि ब्रिक्स देशों की जीडीपी साढ़े चार गुना बढ़ी। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स देश अब इनोवेशन और नई तकनीक के महत्वपूर्ण केंद्र बन रहे हैं। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि भारत व्यापार को आगे बढ़ाना चाहता है। और इसके लिए सुरक्षित समुद्री रास्ते बेहद जरूरी हैं। उन्होंने ब्रिक्स बिजनेस फोरम को अब तक का सबसे बड़ा फोरम बताया।
चार देशों से 21 देशों तक पहुंचा ब्रिक्स
पीएम मोदी ने कहा कि ब्रिक्स की शुरुआत 2006 में सिर्फ चार देशों के साथ हुई थी। अब सदस्य और पार्टनर देशों को मिलाकर इसका परिवार 21 देशों तक पहुंच गया है। इस विस्तार को उन्होंने संगठन की बढ़ती स्वीकार्यतासे जोड़ते हुए कहा कि ब्रिक्स अब वैश्विक आर्थिक सहयोग को एक अहम मंच बन चुका है। दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा ने भी ब्रिक्स देशों के बीच निवेश बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अफ्रीका केवल अपने खनिज संसाधन उपलब्ध कराता रहे और बदले में उसे आर्थिक विकास के लिए निवेश न मिले, यह व्यवस्था आगे नहीं चल सकती।
अपनी करेंसी में कारोबार बढ़ाने पर जोर
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने ब्रिक्स देशों के बीच स्थानीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ाने की वकालत की है। उन्होंने कहा कि कुछ चुनिंदा करेंसी पर ज्यादा निर्भरता आर्थिक और राजनीतिक संकट के समय परेशानी पैदा कर सकती है। इसी बीच प्रधानमंत्री मोदी और पुतिन के बीच भारत मंडपम में करीब 45 मिनट की द्विपक्षीय बैठक भी हुई। दोनों नेताओं ने भारत-रूस व्यापार और आर्थिक सहयोग के सा था इंफ्रास्ट्रक्चर, ऊर्जा, तकनीक, रक्षा और संस्कृति जैसे क्षेत्रों पर चर्चा की है।
बातचीत के दौरान पुतिन ने प्रधानमंत्री मोदी को 24वें भारत-रूस शिखर सम्मेलन के लिए रूस आने का न्योता दिया। इसे पीएम मोदी ने स्वीकार कर लिया। बैठक के बाद दोनों नेता एक ही कार से औद्योगिक प्रदर्शन देखने पहुंचे।