ओडिशा राज्यसभा चुनाव में भाजपा ने बड़ा उलटफेर करते हुए तीसरी सीट भी जीत ली। कांग्रेस और बीजेडी विधायकों की क्रॉस वोटिंग से विपक्ष को झटका लगा और दिलीप रे भी जीत गए।
भुवनेश्वर। ओडिशा की राजनीति में सोमवार को बड़ा उलटफेर देखने को मिला। राज्यसभा चुनाव में जहां गणित के हिसाब से भाजपा की दो सीटें तय मानी जा रही थीं। वहीं, एक सीट विपक्षी बीजेडी के खाते में जाती दिख रही थी। हालांकि नतीजों ने पूरा समीकरण बदल दिया। क्रॉस वोटिंग के चलते भारतीय जनता पार्टी ने विपक्ष के हाथ से एक सीट छीन ली और तीनों सीटों पर जीत दर्ज कर ली। इस परिणाम ने राज्य की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है।
भाजपा के तीनों उम्मीदवारों की जीत
राज्यसभा चुनाव में भाजपा के उम्मीदवार मनमोहन सामल, सुजीत कुमार और भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार दिलीप रे ने जीत हासिल की। तीनों की जीत के बाद मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी ने इसे राज्य के लिए 'यादगार दिन' बताया। उन्होंने कहा कि राज्यसभा में ओडिशा की आवाज को मजबूत करने के लिए ये तीनों नेता महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
क्रॉस वोटिंग ने पलटा पूरा गणित
विधानसभा में विधायकों की संख्या के हिसाब से भाजपा की दो सीटें लगभग तय थीं। वहीं तीसरी सीट पर Naveen Patnaik की पार्टी बीजेडी का दावा मजबूत माना जा रहा था। बीजेडी को इस सीट के लिए कांग्रेस और वामदलों का समर्थन भी मिल रहा था। लेकिन मतदान के दौरान समीकरण अचानक बदल गए।
बताया जा रहा है कि कांग्रेस के तीन और बीजेडी के दो विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की, जिससे भाजपा समर्थित उम्मीदवार को बढ़त मिल गई और विपक्ष की संभावित सीट हाथ से निकल गई।
पुराने साथी दिलीप रे ने दिया बीजेडी को झटका
पूर्व केंद्रीय मंत्री दिलीप रे कभी बीजेडी के प्रमुख नेताओं में गिने जाते थे। इस बार उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा और भाजपा ने उन्हें समर्थन दिया। नतीजों में उनकी जीत ने बीजेडी के लिए बड़ा राजनीतिक झटका साबित किया। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि यह नतीजा आने वाले समय में ओडिशा की राजनीति पर असर डाल सकता है।
मुख्यमंत्री ने विपक्षी विधायकों का भी जताया आभार
परिणाम आने के बाद मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी ने क्रॉस वोटिंग करने वाले विधायकों का भी धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि सभी विधायकों ने राज्य के विकास को ध्यान में रखते हुए मतदान किया। उनका कहना था कि ओडिशा को समृद्ध बनाने के लिए सभी को मिलकर काम करना होगा, राजनीति से ऊपर उठकर भी।
राज्यसभा चुनाव के इस नतीजे ने साफ कर दिया है कि ओडिशा की राजनीति में फिलहाल समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। आने वाले दिनों में इसका असर राज्य की सियासी रणनीतियों पर भी देखने को मिल सकता है।