पश्चिम बंगाल में ऐतिहासिक जीत के बाद BJP ने सरकार गठन की कमान अमित शाह को दी। असम में जेपी नड्डा संभालेंगे जिम्मेदारी। जानिए कैसे तय होगा मुख्यमंत्री और आगे की रणनीति।
नई दिल्ली। पांच राज्यों के चुनाव खत्म होते ही अब सत्ता गठन की प्रक्रिया तेज हो गई है। सबसे ज्यादा नजरें पश्चिम बंगाल पर टिकी हैं, जहां पहली बार BJP सरकार बनाने की स्थिति में है। इस बड़े बदलाव के बीच पार्टी ने साफ संकेत दिया है कि वह कोई जोखिम नहीं लेना चाहती। इसलिए सरकार गठन की कमान सीधे केंद्रीय नेतृत्व को सौंपी गई है।
इसी कड़ी में गृह मंत्री अमित शाह को बंगाल का पर्यवेक्षक बनाया गया है। वहीं, असम में जिम्मेदारी जेपी नड्डा को दी गई है। इससे साफ है कि पार्टी हर कदम बेहद रणनीतिक तरीके से उठा रही है।
बंगाल में अमित शाह की एंट्री क्यों अहम
पश्चिम बंगाल में BJP की जीत ऐतिहासिक मानी जा रही है। पहली बार पार्टी यहां सरकार बनाने जा रही है, इसलिए नेतृत्व चयन बेहद अहम हो गया है। अमित शाह को पर्यवेक्षक बनाकर पार्टी ने संकेत दिया है कि मुख्यमंत्री का फैसला पूरी तरह केंद्रीय रणनीति के तहत होगा। वे विधायक दल की बैठक से लेकर अंतिम चयन तक हर प्रक्रिया पर नजर रखेंगे।
इस कदम से यह भी साफ होता है कि BJP बंगाल में मजबूत और स्थिर सरकार देने के लिए पूरी तैयारी में है।
असम में जेपी नड्डा को सौंपी जिम्मेदारी
असम में भी सरकार गठन की प्रक्रिया तेज हो गई है। यहां विधायक दल के नेता के चयन के लिए पार्टी ने जेपी नड्डा को पर्यवेक्षक बनाया है। वे बैठक में मौजूद रहेंगे और पूरी प्रक्रिया को व्यवस्थित तरीके से पूरा कराएंगे। पार्टी ने उनके अनुभव को देखते हुए यह जिम्मेदारी दी है। असम में BJP पहले से मजबूत स्थिति में है, इसलिए यहां प्रक्रिया अपेक्षाकृत सरल मानी जा रही है।
आंकड़ों ने बदली बंगाल की राजनीति
पश्चिम बंगाल में BJP ने 206 सीटों के साथ स्पष्ट बहुमत हासिल किया। वहीं, टीएमसी 80 सीटों पर सिमट गई और कांग्रेस को सिर्फ 2 सीटें मिलीं। पिछले चुनाव की तुलना में टीएमसी को भारी नुकसान हुआ है। 15 साल की सत्ता के बाद यह गिरावट सीधे तौर पर जनता के मूड को दर्शाती है। इन आंकड़ों ने राज्य की राजनीति को पूरी तरह बदल दिया है और BJP को एक मजबूत जनादेश मिला है।
जमीनी रणनीति बनी जीत की सबसे बड़ी वजह
बीजेपी की इस जीत के पीछे सबसे बड़ा कारण उसका मजबूत ग्राउंड नेटवर्क रहा। पार्टी ने बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय किया। कार्यकर्ताओं ने घर-घर जाकर संपर्क किया और लगातार अभियान चलाया। इसके साथ ही टीएमसी सरकार के खिलाफ एंटी-इनकंबेंसी भी बड़ा फैक्टर बनी। इन सभी प्रयासों ने मिलकर BJP को वह बढ़त दिलाई, जिसने बंगाल की राजनीति में नया अध्याय शुरू कर दिया।