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Gen Z Turns to ABVP Bengal

बंगाल नतीजों के बाद कैंपस में बदला माहौल, जेन-जी का रुझान ABVP की ओर तेज

बंगाल चुनाव नतीजों के बाद ABVP में जेन-जी की दिलचस्पी बढ़ी। सदस्यता के लिए छात्रों की होड़, कैंपस में विचारधारा बदलने के संकेत—जानिए पूरा मामला।


बंगाल नतीजों के बाद कैंपस में बदला माहौल जेन-जी का रुझान abvp की ओर तेज

west bengal News |

कोलकाता से एक नया राजनीतिक ट्रेंड उभरता दिख रहा है। विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद अब इसका असर सीधे कॉलेज कैंपस तक पहुंच गया है। छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने दावा किया है कि अचानक बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं सदस्यता लेने के लिए आगे आ रहे हैं। यह बदलाव खासकर जेन-जी यानी नई पीढ़ी के बीच देखने को मिल रहा है, जो अब छात्र राजनीति में नई दिशा तय करती दिख रही है।

सदस्यता के लिए बढ़ी होड़

संगठन के पदाधिकारियों के मुताबिक, चुनाव परिणाम के बाद से लगातार छात्रों के फोन और आवेदन आ रहे हैं। पिछले आंकड़ों के अनुसार, ABVP के करीब 55 हजार सदस्य हैं, जबकि संगठन का दावा है कि वह लाखों युवाओं तक पहुंच बना चुका है। अब नए ट्रेंड में तेजी आने से सदस्यता अभियान को और गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

“जेन-जी” पर खास फोकस

प्रदेश सचिव नीलकंठ भट्टाचार्य ने कहा कि संगठन की रणनीति का केंद्र जेन-जी है। उनका दावा है कि जहां कुछ देशों में यह पीढ़ी अलग रुख अपनाती है, वहीं भारत में युवा राष्ट्र निर्माण की सोच के साथ जुड़ रहे हैं। उन्होंने इसे 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य से जोड़ते हुए पश्चिम बंगाल की भूमिका को अहम बताया।

कैंपस में बदलती विचारधारा

ABVP ने कॉलेज यूनियन रूम में स्वामी विवेकानंद, मां सरस्वती और भारत माता की तस्वीर लगाने की मांग उठाई है। संगठन का कहना है कि बंगाल के महान व्यक्तित्वों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए, न कि विदेशी विचारधाराओं के प्रतीकों को प्राथमिकता मिले। यह मांग कैंपस में वैचारिक बदलाव और सांस्कृतिक पहचान को लेकर नई बहस को जन्म दे रही है।

छात्र संघ चुनाव का मुद्दा फिर गरमाया

बंगाल में लंबे समय से छात्र संघ चुनाव नहीं होने का मुद्दा भी फिर उठाया गया है। संगठन का कहना है कि चुनाव न होने से छात्रों में नेतृत्व विकसित नहीं हो पा रहा है। नई सरकार बनने के बाद इस मुद्दे को प्राथमिकता से उठाने की बात कही गई है।

राजनीतिक असर और आगे की दिशा

चुनाव नतीजों के बाद युवाओं का रुझान बदलना सिर्फ छात्र राजनीति तक सीमित नहीं है। इसका असर आने वाले समय में राज्य की बड़ी राजनीति और नीतियों पर भी पड़ सकता है। कैंपस से शुरू हुआ यह बदलाव पश्चिम बंगाल की राजनीतिक दिशा को लंबे समय में प्रभावित कर सकता है।

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