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Bar-Tailed Godwit Flies 13,560 km Nonstop Across P

300 ग्राम के पंछी ने 11 दिन में पूरी की 13,560 किमी की यात्रा

300 ग्राम का बार-टेल्ड गॉडविट बी-6 ने 11 दिन में प्रशांत महासागर पार किया, बिना रुके और बिना खाए। विज्ञान और प्रकृति का अद्भुत कमाल।


300 ग्राम के पंछी ने 11 दिन में पूरी की 13560 किमी की यात्रा

अक्टूबर 2022 में एक छोटे से पंछी ने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया, जिसका रिकॉर्ड तीन साल की साइंटिफिक स्टडी के बाद अब दर्ज किया गया है। बार-टेल्ड गॉडविट नाम का यह पंछी, जिसे बी-6 नाम दिया गया था, अमेरिका के अलास्का के कुस्कोक्किम डेल्टा से सीधे ऑस्ट्रेलिया के तस्मानिया तक बिना एक बार रुके उड़ गया। इसकी दूरी करीब 13,560 किलोमीटर थी।यह दुनिया की सबसे लंबी बिना रुके किसी पंछी की माइग्रेशन फ्लाइट है और गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज है।

लगातार उड़ान के दौरान न खाता, न सोता

अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वे के वैज्ञानिकों ने इस पंछी पर छोटा सोलर पावर्ड टैग लगाकर इसकी यात्रा को ट्रैक किया। बी-6 पंछी लगातार 11 दिन तक उड़ता रहा। इस दौरान वह न सोता, न खाता और न पानी पीता। लेकिन ब्रेन को आराम की जरूरत होती है। इसलिए यह आधी नींद लेता है- एक आंख और ब्रेन का आधा हिस्सा सो जाता है, जबकि दूसरा आधा जागता रहता है। इसे यूनिहेमिस्फेरिक स्लो-वेव स्लीप कहा जाता है।

महासागर पर खतरों भरी यात्रा

प्रशांत महासागर बहुत बड़ा है और नीचे सिर्फ पानी है। पंछी को तूफान, तेज हवाएं और ठंड का सामना करना पड़ता है। कभी-कभी हवा उसके खिलाफ चलती है, जिससे उड़ान और मुश्किल हो जाती है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह प्रवास इतना लंबा इसलिए है क्योंकि अलास्का में गर्मियों में बहुत खाना मिलता है और तस्मानिया में सर्दियों में सुरक्षित जगह होती है।

नेविगेशन और शरीर की अद्भुत तैयारी

बार-टेल्ड गॉडविट उड़ते हुए एक आंख बंद करके सोता है और दूसरी आंख से रास्ता देखता रहता है। नेविगेशन के लिए यह पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र का उपयोग करता है। इसकी आंखों में क्वांटम मैकेनिज्म होता है, जिससे चुंबकीय लाइनों को देखने जैसा अनुभव होता है। साथ ही यह तारे, सूरज, हवा का दबाव और मौसम के बदलाव से भी रास्ता तय करता है।

इसका वजन सिर्फ 300-400 ग्राम होता है। लेकिन प्रवास से पहले यह अपनी बॉडी में बड़े बदलाव करता है। उड़ान से कुछ हफ्ते पहले यह बहुत ज्यादा खाता और शरीर में फैट जमा करता है। फैट इतना बढ़ जाता है कि पंछी का वजन दोगुना हो जाता है। फिर यह अपने अंदरूनी अंगों को सिकोड़ लेता है। पेट, आंतें और लीवर तक 55 प्रतिशत तक छोटे हो जाते हैं, क्योंकि रास्ते में कुछ नहीं खाया जाता। शरीर का फैट ऊर्जा देता है और पानी भी बनता है। इस तरह पक्षी अपना खुद का पेट भी “खाकर” हल्का होकर लंबी दूरी तय करता है। यह प्रकृति का एक कमाल का तरीका है जो लाखों सालों में विकसित हुआ है।

प्रकृति की ताकत का एहसास

एक 300 ग्राम का पंछी 11 दिन लगातार उड़ता है, जबकि सबसे लंबी कॉमर्शियल फ्लाइट भी सिर्फ 20 घंटे की होती है। मनुष्य अरबों रुपये खर्च करके मशीनें बनाते हैं, लेकिन यह पंछी बिना किसी इंजन के केवल फैट और इंस्टिंक्ट से यह कर सकता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि ऐसे पक्षी जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आवासों के नष्ट होने से खतरे में हैं।बी-6 की यह यात्रा हमें बताती है कि हमें प्रकृति के इन छोटे-छोटे चमत्कारों की रक्षा करनी चाहिए। यह रिकॉर्ड न केवल गिनीज बुक में दर्ज है, बल्कि हमें प्रकृति की अद्भुत ताकत का एहसास भी कराता है।