चुनाव आयोग आज शाम 4 बजे असम, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान कर सकता है। पांच राज्यों में चुनावी मुकाबला दिलचस्प होने की उम्मीद है।
नई दिल्ली। देश की राजनीति में रविवार, 15 मार्च को एक अहम दिन हो सकता है। चुनाव आयोग ने शाम 4 बजे नई दिल्ली के विज्ञान भवन में प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई है। माना जा रहा है कि इस कॉन्फ्रेंस में असम, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान किया जा सकता है।
इन पांच राज्यों में आने वाले महीनों में विधानसभा का कार्यकाल खत्म होने वाला है, इसलिए चुनाव कार्यक्रम का इंतजार काफी समय से किया जा रहा था। अगर आज तारीखों का ऐलान होता है तो आचार संहिता भी तुरंत लागू हो सकती है, और फिर चुनावी माहौल पूरी तरह गरमा जाएगा।
किन राज्यों में कब खत्म हो रहा है कार्यकाल
चुनाव आयोग के मुताबिक इन पांचों राज्यों की विधानसभा का कार्यकाल अलग-अलग तारीखों पर खत्म हो रहा है। पश्चिम बंगाल में 7 मई, तमिलनाडु में 10 मई, असम में 20 मई, केरल में 23 मई और पुडुचेरी में 15 जून को मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल पूरा होगा। इसका मतलब साफ है कि मई के पहले हफ्ते तक ज्यादातर राज्यों में मतदान की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इसलिए चुनाव आयोग आज से ही पूरा कार्यक्रम सामने रख सकता है।
पिछले चुनाव में क्या रहे थे नतीजे
असम में पिछली बार 126 सीटों के लिए तीन चरणों में मतदान हुआ था। एनडीए ने कुल 75 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी और बीजेपी लगातार दूसरी बार सत्ता में आई थी। वहीं, पश्चिम बंगाल में 294 सीटों वाले इस राज्य में आठ चरणों में चुनाव हुए थे। तृणमूल कांग्रेस ने 215 सीटें जीतकर भारी बहुमत हासिल किया था, जबकि बीजेपी को 77 सीटें मिली थीं। ममता बनर्जी मुख्यमंत्री बनी थीं।
बात करें साउथ में तो तमिलनाडु की 234 सीटों पर एक ही चरण में वोटिंग हुई थी। डीएमके ने 133 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी। एआईएडीएमके को 66 और बीजेपी को 5 सीटें मिली थीं। डीएमके की जीत के चलते एमके स्टालिन मुख्यमंत्री बने। वहीं, केरल में 140 सीटों वाली विधानसभा के लिए भी एक ही चरण में मतदान हुआ था। वाम मोर्चा यानी एलडीएफ ने 99 सीटें जीतकर लगातार दूसरी बार सत्ता हासिल की थी। पिनराई विजयन फिर मुख्यमंत्री बने।
इसके अलावा पुडुचेरी 30 सीटों के इस छोटे से केंद्र शासित प्रदेश में एनडीए गठबंधन ने 16 सीटें जीती थीं और एन. रंगास्वामी मुख्यमंत्री बने थे।
मतदाता सूची से लाखों नाम हटे
चुनाव से पहले मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर संशोधन भी हुआ है। स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया के दौरान कई राज्यों में मतदाताओं के नाम हटाए गए। सबसे ज्यादा नाम तमिलनाडु में कटे हैं। यहां करीब 74 लाख से ज्यादा नाम सूची से हटाए गए। पश्चिम बंगाल में लगभग 58 लाख नाम हटे, केरल में करीब 8 लाख, असम में करीब 2 लाख और पुडुचेरी में लगभग 77 हजार नाम हटाए गए।
इस बार मुकाबला किन मुद्दों परः-
पश्चिम बंगाल में ममता बनाम बीजेपी
पश्चिम बंगाल में पिछले 14 साल से ममता बनर्जी सत्ता में हैं। अगर इस बार भी टीएमसी जीतती है तो ममता लगातार चौथी बार मुख्यमंत्री बनेंगी, जो अपने आप में एक बड़ा रिकॉर्ड होगा। बीजेपी यहां मुख्य चुनौती बनकर उभरी है।
तमिलनाडु में तीसरी ताकत की एंट्री
तमिलनाडु की राजनीति पर दशकों से डीएमके और एआईएडीएमके का दबदबा रहा है। इस बार सुपरस्टार विजय की पार्टी भी मैदान में उतर चुकी है, जिससे मुकाबला दिलचस्प हो सकता है।
केरल में सत्ता बदलने की परंपरा
केरल में आमतौर पर हर चुनाव में सत्ता बदलती रही है, लेकिन 2021 में वाम मोर्चे ने इस परंपरा को तोड़ दिया था। इस बार कांग्रेस गठबंधन एंटी-इनकम्बेंसी के भरोसे वापसी की उम्मीद कर रहा है।
असम में बीजेपी का तीसरा मिशन
असम में बीजेपी पिछले 10 साल से सत्ता में है। पार्टी तीसरी बार सरकार बनाने का लक्ष्य लेकर चल रही है। वहीं कांग्रेस ने कई दलों के साथ गठबंधन बनाकर मुकाबले को कड़ा बनाने की कोशिश की है।
पुडुचेरी में गठबंधन की राजनीति
पुडुचेरी में 2021 में कांग्रेस सरकार गिरने के बाद एनडीए गठबंधन सत्ता में आया था। इस बार कांग्रेस और डीएमके गठबंधन वापसी की कोशिश कर रहे हैं। चुनाव आयोग की शाम 4 बजे होने वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस पर अब सभी की नजर है। तारीखों के ऐलान के साथ ही पांच राज्यों में चुनावी शोर, रैलियां और राजनीतिक बयानबाजी तेजी से बढ़ना तय है।