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सेना प्रमुख ने लिकाबाली सैन्य अड्डे का दौरा करके एलएसी पर देखीं युद्ध की तैयारियां

सेना प्रमुख ने लिकाबाली सैन्य अड्डे का दौरा करके एलएसी पर देखीं युद्ध की तैयारियां

- सामरिक महत्व सैन्य अभियानों के बारे में जनरल द्विवेदी को महत्वपूर्ण जानकारी दी गई

सेना प्रमुख ने लिकाबाली सैन्य अड्डे का दौरा करके एलएसी पर देखीं युद्ध की तैयारियां

नई दिल्ली। वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर चीन के साथ चल रहे तनाव के बीच सैन्य संरचना की युद्ध तत्परता का आकलन करने के लिए सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने गुरुवार को अरुणाचल प्रदेश के लिकाबाली सैन्य अड्डे का दौरा किया। सैन्य अधिकारियों ने जनरल द्विवेदी को कई महत्वपूर्ण पहलुओं के बारे में जानकारी दी, जिनमें परिचालन रणनीतियां, आंतरिक सुरक्षा परिदृश्य और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के साथ प्रौद्योगिकी का एकीकरण करने के साथ ही राष्ट्रीय विकास की पहल शामिल हैं।

चीन के सैनिकों के साथ 2020 में गलवान घाटी हिंसक संघर्ष के बाद से इस क्षेत्र में 60 हजार से अधिक सैनिकों की तैनाती है। इसके साथ ही विवादित मैकमोहन रेखा के पास स्थित अरुणाचल प्रदेश का सामरिक महत्व सैन्य अभियानों के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र बना हुआ है। भारत के 30वें सेनाध्यक्ष के रूप में कार्यभार संभालने के बाद जनरल द्विवेदी की यह यात्रा भारतीय सेना की पूर्वोत्तर सीमाओं पर उच्च स्तर की तत्परता और परिचालन क्षमता का आकलन करने के लिहाज से महत्वपूर्ण है, क्योंकि वर्तमान भू-राजनीतिक परिवेश में यह एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है।

अरुणाचल प्रदेश के लिकाबाली सैन्य अड्डे के इस आधिकारिक दौरे का उद्देश्य एलएसी पर चीन के साथ चल रहे तनाव के बीच सैन्य संरचना की युद्ध तत्परता का आकलन करना था। जनरल द्विवेदी ने सैन्य संरचना की युद्ध तैयारियों की समीक्षा की। उन्हें परिचालन संबंधी मामलों, क्षेत्र की आंतरिक सुरक्षा स्थिति, प्रौद्योगिकी समावेशन, अन्य सुरक्षा एजेंसियों के साथ एकीकरण और सैन्य संरचना के जरिए की जा रही राष्ट्र निर्माण पहलों के बारे में जानकारी दी गई। सेना प्रमुख ने दुनिया के सबसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में से एक पूर्वोत्तर में सैन्य अभियानों के दौरान कर्तव्य के प्रति समर्पण और अटूट प्रतिबद्धता के लिए सभी रैंकों की सराहना की।

चीन के साथ 1962 में युद्ध के बाद भारत ने तकनीकी प्रगति पर जोर दिया है, जहां चुनौतीपूर्ण भूभाग ने सैन्य अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। तत्कालीन वजह आज भी प्रासंगिक हैं, क्योंकि सेना अन्य सुरक्षा बलों के साथ समन्वय में सुधार करना चाहती है। जनरल द्विवेदी ने सुरक्षा ढांचे में अगली पीढ़ी की तकनीक को एकीकृत करने के लिए सैन्य टुकड़ियों के अभिनव प्रयासों को सराहा। उनकी यह समीक्षा भारतीय सेना की 2024 की 'तकनीक अवशोषण वर्ष' पहल के साथ मेल खाती है, जो युद्ध क्षमताओं के आधुनिकीकरण की एक व्यापक रणनीति का हिस्सा है। इस अध्ययन में बताया गया है कि तकनीकी रूप से मजबूत सेनाओं की अरुणाचल प्रदेश जैसे दुर्गम इलाकों में परिचालन दक्षता 30 फीसदी तक बढ़ सकती हैं।

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