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15 CRPF जवानों की हत्या के दोषियों की अपील खारिज, सजा का फैसला बरकरार

15 CRPF जवानों की हत्या के दोषियों की अपील खारिज, सजा का फैसला बरकरार

15 crpf जवानों की हत्या के दोषियों की अपील खारिज सजा का फैसला बरकरार

  • हाईकोर्ट ने कहा, नक्सली हमले राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी खतरा
  • 2014 में नक्सली मुठभेड़ में वीरगति को प्राप्त हुए थे जवान
  • Appeal of Convicts in Killing of 15 CRPF Jawans Rejected : बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने 2014 के ताहाकवाड़ा नक्सली हमले में चार आरोपियों की सजा को बरकरार रखा है, जिसमें 15 सुरक्षा कर्मियों और एक नागरिक की जान चली गई थी। हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए दोषियों की अपील को निरस्त कर दिया है।

    चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने नक्सली हमलों को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताते हुए कहा कि नक्सली हमले केवल अपराध नहीं होते, बल्कि यह एक बड़े विद्रोह का हिस्सा होते हैं जो राज्य की स्थिरता, कानून व्यवस्था और लोकतांत्रिक संस्थाओं को चुनौती देते हैं।

    यह था मामला

    ताहाकवाड़ा हमला 11 मार्च 2014 को हुआ था, जब नक्सलियों ने सीआरपीएफ और राज्य पुलिस के संयुक्त रोड ओपनिंग पार्टी पर हमला किया था। हमले में 15 सुरक्षा कर्मी वीरगति को प्राप्त हुए। एक नागरिक की भी मौत हो गई थी। इस मामले की जांच राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) द्वारा की गई थी और आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई थी।

    विशेष अदालत ने कवासी जोग, महादेव नाग सहित 4 आरोपियों को हत्या, हत्या की कोशिश, हथियार अधिनियम, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम और यूएपीए के तहत दोषी ठहराया था। आरोपी अदालत के फैसले से असहमत थे और उच्च न्यायालय में अपील की थी। हालांकि, उच्च न्यायालय ने यह मानते हुए कि आरोपी की भूमिका मामले में स्थापित है, उनकी अपील खारिज कर दी और उन्हें शेष सजा पूरी करने का आदेश दिया।


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