अहमदाबाद में विवाह पंजीकरण को लेकर विवाद, रजिस्ट्रार की भूमिका पर सवाल। वकीलों ने निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग उठाई।
अहमदाबादः विवाह रजिस्ट्रार की भूमिका पर उठे सवाल
गुजरात के अहमदाबाद में एक ऐसे कथित रैकेट का खुलासा हुआ है, जिसमें सुनियोजित तरीके से हिंदू युवतियों का विवाह मुस्लिम युवकों से कराने के आरोप सामने आए हैं। घी-कांटा स्थित विवाह पंजीकरण कार्यालय में सामने आए इस मामले में विवाह रजिस्ट्रार एम.एम. सैयद की भूमिका पर गंभीर सवाल उठे हैं।आरोप है कि रजिस्ट्रार की मदद से कई जोड़ों का विवाह पंजीकरण कराया गया और इसके लिए नियमों की अनदेखी की गई। वकील समुदाय ने इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की है।
न्यायालय परिसर में वकील के कपड़े पहने खड़े थे युवक-युवती
विवाह पंजीकरण से जुड़ा यह मामला इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। आरोप है कि शहर के घी-कांटा स्थित विवाह पंजीकरण कार्यालय में एक ऐसा नेटवर्क सक्रिय था, जो योजनाबद्ध तरीके से हिंदू युवतियों का विवाह मुस्लिम युवकों से कराने में मदद करता था।घटना के प्रत्यक्षदर्शियों में शामिल अधिवक्ता सुधा क्रिश्चियन ने बताया कि जिस दिन यह मामला सामने आया, उस दिन सुबह करीब 10 बजे युवती के परिवार के लोग न्यायालय परिसर पहुंचे थे। उन्हें बताया गया कि रजिस्ट्रार कार्यालय सुबह 11 बजे खुलेगा। लेकिन परिजनों का दावा था कि युवती पहले से ही कार्यालय के भीतर मौजूद है।सुधा के अनुसार, जब वह अपने काम से रजिस्ट्रार कार्यालय के अंदर पहुंचीं तो उन्होंने देखा कि वकील के कपड़े पहने एक युवक और युवती वहां खड़े थे। उनके साथ एक महिला अधिवक्ता और एक पुलिसकर्मी भी मौजूद था।जब उन्होंने इस पर आपत्ति जताई कि एक युवती को वकील के वेश में अंदर कैसे आने दिया गया, तो वहां मौजूद पुलिसकर्मी ने कार्यालय का दरवाजा बंद कर दिया और कहा कि विवाह प्रक्रिया पूरी होने तक दरवाजा नहीं खोला जाएगा।बाद में इस घटना की जानकारी अन्य वकीलों को दी गई, जिसके बाद न्यायालय परिसर में बड़ी संख्या में लोग एकत्र हो गए और मामला सार्वजनिक हो गया।
निर्धारित समय से पहले दिया गया प्रवेश
अधिवक्ताओं ने इस पूरे मामले पर गंभीर आपत्तियां जताई हैं। बताया गया कि एक मुस्लिम युवक और एक हिंदू युवती वकील के वेश में विवाह पंजीकरण कराने के लिए रजिस्ट्रार कार्यालय पहुंचे थे। दोनों ने वकीलों का काला कोट पहन रखा था, ताकि अदालत परिसर में उनकी पहचान एक जोड़े के रूप में न हो सके।आरोप है कि उन्हें निर्धारित समय से करीब दो घंटे पहले ही कार्यालय के पिछले दरवाजे से अंदर प्रवेश करने दिया गया।घटना के बाद जब युवती के परिजनों को जानकारी मिली तो वे कोर्ट पहुंचे। परिवार का आरोप है कि पेठापुर निवासी सलमान नामक युवक कुछ महीने पहले उनकी बेटी को अपने साथ ले गया था। जब दोनों विवाह पंजीकरण के लिए पहुंचे तो यह भी सामने आया कि युवती गर्भवती थी और उस पर विवाह के लिए दबाव डाला जा रहा था।
विवाह पंजीकरण रिकॉर्ड की पड़ताल
अधिवक्ता रागिनी दवे ने बताया कि यह केवल विवाह का मामला नहीं था, बल्कि अदालत परिसर में वकील का भेष धारण कर प्रवेश करने जैसी गंभीर अनियमितता भी थी।जांच के दौरान कुछ अधिवक्ताओं ने पिछले चार महीनों के विवाह पंजीकरण रिकॉर्ड की भी पड़ताल की। उनके अनुसार दिसंबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच कम से कम 11 ऐसे विवाह पंजीकृत हुए, जिनमें युवक मुस्लिम और युवती हिंदू थी।यह भी बताया गया कि कुछ जोड़े अन्य जिलों और राज्यों से अहमदाबाद आकर यहां विवाह पंजीकरण कराते थे। मामले को लेकर अब प्रशासन से विस्तृत जांच की मांग की जा रही है।