पूसा में राष्ट्रीय कृषि विज्ञान मेले का शुभारंभ। कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का सख्त संदेश—किसानों का भुगतान रोका तो देना होगा 12% ब्याज
भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, पूसा में बुधवार से शुरू हुए तीन दिवसीय राष्ट्रीय कृषि विज्ञान मेले का शुभारंभ केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किया। उद्घाटन मौके पर उन्होंने खेती-किसानी को “विकसित कृषि–आत्मनिर्भर भारत” की दिशा में आगे ले जाने वाले सुधारों का खाका रखा और साफ शब्दों में कहा कि अब किसानों के पैसे से कोई समझौता नहीं होगा।
कृषि मंत्री ने सबसे पहले किसानों के बकाया भुगतान में देरी का मुद्दा उठाया। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि जो भी एजेंसी या राज्य सरकार किसानों का भुगतान रोकेगी, उसे उस राशि पर 12 प्रतिशत ब्याज चुकाना होगा। मंत्री ने कहा कि सरकारी खातों में किसानों का पैसा “पार्क” कर उससे लाभ कमाने की प्रवृत्ति अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार अपनी ओर से भुगतान में देरी नहीं करेगी और यदि किसी योजना में राज्यों की वजह से विलंब होता है, तो केंद्र के हिस्से की राशि सीधे किसानों के खातों में भेजने के विकल्प पर काम चल रहा है। संदेश साफ था किसान को कम से कम केंद्र से मिलने वाला लाभ समय पर और बिना अड़चन मिले।
असली किसान तक पहुंचे योजनाओं का लाभ
कृषि यंत्रीकरण, ड्रिप, स्प्रिंकलर, पाली हाउस और ग्रीन हाउस जैसी तकनीकों का जिक्र करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि केंद्र सरकार राज्यों को 18 से अधिक योजनाओं के तहत संसाधन दे रही है, लेकिन केवल पैसा भेज देना ही काफी नहीं है. उन्होंने एक जिले का उदाहरण देते हुए बताया कि 700 किसानों की सूची होने के बावजूद सिर्फ 158 किसानों को ही मशीनें मिल सकीं। उन्होंने कहा कि जब केंद्र पैसा देता है तो यह भी उसकी जिम्मेदारी बनती है कि लाभ असली किसान तक पहुंचा या नहीं, इसके लिए मजबूत मॉनिटरिंग सिस्टम जरूरी है।
किसानों की सेवा भगवान की सेवा
केंद्रीय मंत्री ने किसानों को सिर्फ ‘अन्नदाता’ नहीं बल्कि ‘जीवनदाता’ बताते हुए कहा कि किसानों की सेवा उनके लिए भगवान की सेवा के समान है। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे देश की खाद्य सुरक्षा के साथ-साथ पोषण सुरक्षा और वैश्विक बाजार के लिए गुणवत्तापूर्ण उत्पाद देने का संकल्प लें, ताकि भारत दुनिया में “विश्व बंधु” की भूमिका निभा सके।
खाद पर दो लाख करोड़ से ज्यादा की सब्सिडी
खाद सब्सिडी पर बोलते हुए मंत्री ने बताया कि केंद्र सरकार खाद पर दो लाख करोड़ रुपये से अधिक की सब्सिडी दे रही है, जिससे 2400 रुपये की लागत वाली यूरिया की बोरी किसान को करीब 265–270 रुपये में मिल पा रही है. उन्होंने सुझाव दिया कि यदि इतनी बड़ी सब्सिडी सीधे डीबीटी के रूप में किसानों के खातों में दी जाए, तो किसान खुद तय कर सकेगा कि कौन-सा उर्वरक और कितनी मात्रा में लेना है। इससे यह भी सुनिश्चित होगा कि सब्सिडी का वास्तविक लाभ उसी को मिले, जो खेत में खाद डाल रहा है।
पौधारोपण से हुआ शुभारंभ, किसानों का सम्मान
इससे पहले मेले का शुभारंभ पौधारोपण के साथ हुआ। कार्यक्रम में सात किसानों को आईएआरआई कृषि अध्येता पुरस्कार से सम्मानित किया गया, जिससे “किसान प्रथम” की भावना को और मजबूती मिली।