ओस्कर नॉमिनेटेड फिल्म 'द वॉयस ऑफ हिंद राजब' को CBFC ने बिना किसी कट के सर्टिफिकेट दिया। 19 जून को होगी थिएटर रिलीज़। जानिए पूरा मामला।
नई दिल्ली, 2 जून 2026: ओस्कर नॉमिनेटेड फिल्म ‘द वॉयस ऑफ हिंद राजब’ को अंततः भारत में रिलीज़ के लिए हरी झंडी मिल गई है। सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) ने इस फिल्म को बिना किसी कट के सर्टिफिकेट दे दिया है, जिससे इसका रास्ता साफ हो गया है। यह फिल्म 19 जून 2026 को थिएटर में रिलीज़ होगी। यह फिल्म गाजा युद्ध के दौरान इज़रायली सेना द्वारा मारी गई पांच साल की फिलिस्तीनी बच्ची हिंद राजब की हृदयविदारक कहानी पर आधारित है।
दरअसल, यह फिल्म मार्च में भारत में रिलीज़ होने वाली थी, लेकिन CBFC के साथ लंबे समय तक उलझी रही। अब जाकर इसे मंजूरी मिली है। फिल्म के डिस्ट्रीब्यूटर मनोज नंदवाना की कंपनी जय विराट्रा एंटरटेनमेंट लिमिटेड ने भारत समेत पाकिस्तान, श्रीलंका, मालदीव, अफगानिस्तान और बांग्लादेश में इसके रिलीज़ के अधिकार हासिल किए हैं।
क्यों खास है यह फिल्म?
ट्यूनिशियन फिल्ममेकर कौथर बेन हनिया द्वारा निर्देशित इस फिल्म में हिंद राजब की असल आवाज़ के रिकॉर्डिंग्स का इस्तेमाल किया गया है, जो गाजा में इज़रायली हमले के दौरान अपनी जान गंवाने से पहले इमरजेंसी सर्विसेज को फोन कर मदद की गुहार लगाती है। यह आवाज़ सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी, जिसने दुनिया भर में हंगामा मचा दिया था। हिंद राजब अपनी फैमिली के साथ गाजा सिटी से भाग रही थी, तभी उनकी कार पर इज़रायली सेना ने गोलीबारी कर दी, जिसमें उनके सभी रिश्तेदार मारे गए। बाद में हिंद और उसके परिवार के शवों के साथ दो रेस्क्यू वर्कर्स के शव भी पास ही मिले थे।
निर्देशक ने क्यों बनाई यह फिल्म?
कौथर बेन हनिया ने मार्च में बताया था कि उन्हें सोशल मीडिया पर हिंद राजब की आवाज़ के कुछ क्लिप सुनने को मिले थे। उनकी यह आवाज़ इतनी शक्तिशाली थी कि उन्हें गुस्सा और दुख हुआ। उन्होंने कहा,
जब मैंने हिंद राजब की आवाज़ सुनी, तो मैं उस पल से गुस्से और उदासी में डूब गई। मैं इसे भूल नहीं सकी। मुझे लगा कि अगर मैं कुछ नहीं करूंगी, तो यह युद्ध अपराध में शामिल होने जैसा होगा।
भारत में रिलीज़ का क्या है मतलब?
जय विराट्रा एंटरटेनमेंट के मनोज नंदवाना ने कहा,
हम CBFC का धन्यवाद करना चाहते हैं कि उन्होंने इस फिल्म को बिना किसी कट के सर्टिफिकेट दिया। हमारा मानना है कि सिनेमा एक शक्तिशाली माध्यम है, जो कहानियों, संवाद और मानव अनुभवों को समझने में मदद करता है।
उनका कहना है कि यह फिल्म युद्ध के मानवीय पृष्ठभूमि को उजागर करती है और दर्शकों में सहानुभूति और समझ पैदा करने में मदद करेगी। फिलहाल, यह देखना दिलचस्प होगा कि भारतीय दर्शक इस फिल्म को कैसे स्वीकार करते हैं, खासकर जब यह एक ऐसा विषय है, जो अंतरराष्ट्रीय राजनीति और मानवाधिकारों से जुड़ा हुआ है।