Sushant Singh Rajput: आज, 14 जून 2025 को बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की 5वीं पुण्यतिथि है। 14 जून 2020 को जब उनकी मौत की खबर सामने आई थी, तो पूरा देश सदमे में आ गया था। सुशांत की मौत को पांच साल बीत चुके है, लेकिन उनके फैंस और परिवार आज भी उन्हें दिल से याद करते है।
बहन श्वेता सिंह का भावुक पोस्ट
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इस मौके पर सुशांत की बहन श्वेता सिंह कीर्ति ने सोशल मीडिया पर एक इमोशनल वीडियो और कुछ पुरानी तस्वीरें शेयर की। वीडियो में उन्होंने सुशांत के विचारों, मासूमियत और जीवन के प्रति उनके नजरिए को याद किया। उन्होंने कहा कि सुशांत सिर्फ एक एक्टर नहीं, बल्कि एक सोच थे जो ज्ञान, प्रेम और सच्चाई में विश्वास रखते थे।
श्वेता ने कहा, जब भी हम किसी की मदद करते है, किसी को बिना शर्त अपनाते है या कुछ नया सीखने की कोशिश करते है, तो हम सुशांत को अपने अंदर जिंदा रखते है।
उन्होंने ये भी कहा कि उनके भाई के नाम का इस्तेमाल नफरत फैलाने के लिए नहीं होना चाहिए क्योंकि सुशांत हमेशा अच्छाई और प्यार के साथ खड़े रहते थे।
इंसाफ की राह अभी बाकी है

श्वेता ने जानकारी दी कि CBI ने अपनी रिपोर्ट कोर्ट में सौंप दी है, और अब परिवार उसे प्राप्त करने की प्रक्रिया में है। उन्होंने कहा, "भले ही इंसाफ की राह लंबी हो, लेकिन हमें उम्मीद और विश्वास नहीं छोड़ना चाहिए।"
सुशांत की जिंदगी का सफर

सुशांत सिंह राजपूत का जन्म 1986 में पटना में हुआ था। बचपन से ही उन्हें पढ़ाई और एक्टिंग दोनों में दिलचस्पी थी। उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की, लेकिन आखिरी साल में छोड़कर मुंबई चले आए। वहां उन्होंने थिएटर किया और फिर टीवी शो ‘पवित्र रिश्ता’ से घर-घर में पहचान बनाई।
इसके बाद उन्होंने 'काई पो चे', 'एम.एस. धोनी', 'केदारनाथ', 'छिछोरे' जैसी कई फिल्मों में काम किया और सभी का दिल जीत लिया। उन्हें विज्ञान में भी दिलचस्पी थी और वे चांद पर जमीन खरीदने वाले पहले भारतीय अभिनेता बने।
सुशांत की मौत

14 जून 2020 को सुशांत मुंबई के फ्लैट में मृत पाए गए थे। पुलिस ने इसे आत्महत्या बताया था और जानकारी दी गई थी कि वह डिप्रेशन से जूझ रहे थे। उनकी आखिरी फिल्म ‘दिल बेचारा’ थी, जो उनकी मौत के बाद रिलीज हुई थी।
सुशांत की बहन, परिवार और फैंस आज भी उनके लिए इंसाफ की मांग कर रहे है। श्वेता ने इस दिन को सिर्फ याद का नहीं, बल्कि प्रेरणा की विरासत को आगे बढ़ाने का दिन बताया। सुशांत अपने विचारों और सकारात्मक सोच के जरिए आज भी हर उस इंसान में जीवित है, जो अच्छाई, ज्ञान और प्रेम में विश्वास करता है।