भोपाल में भारतीय भाषा पुस्तक योजना पर राज्य स्तरीय बैठक आयोजित हुई। योजना के तहत 22 भारतीय भाषाओं में 2.5 लाख किताबें लिखी जाएंगी, जिससे राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को नई गति मिलेगी।
भोपाल। मध्यप्रदेश भोज (मुक्त) विश्वविद्यालय में भारतीय भाषा पुस्तक योजना को लेकर राज्य स्तरीय प्रारंभिक बैठक आयोजित की गई। यह बैठक भारतीय भाषा समिति, शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार और मध्यप्रदेश भोज (मुक्त) विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न हुई। बैठक का उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप हिंदी सहित भारतीय भाषाओं में उच्च गुणवत्ता वाली अकादमिक पुस्तकों के लेखन की व्यापक कार्ययोजना तैयार करना था।
बैठक में मध्यप्रदेश के विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति, शिक्षाविद, विषय विशेषज्ञ और वरिष्ठ शिक्षकों ने भाग लिया। योजना के तहत अगले तीन वर्षों में 22 भारतीय भाषाओं में लगभग ढाई लाख पुस्तकों के लेखन का लक्ष्य रखा गया है।
6 हजार करोड़ की योजना, 22 भाषाओं में होगा पुस्तक लेखन
भारतीय भाषा समिति, शिक्षा मंत्रालय के अकादमिक समन्वयक डॉ. चंदन श्रीवास्तव ने बताया कि भारत सरकार ने इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए केंद्रीय बजट में लगभग 6 हजार करोड़ रुपए का प्रावधान किया है। इसके अंतर्गत राज्यों में उत्कृष्ट लेखकों की पहचान कर उन्हें विभिन्न विषयों की मौलिक पुस्तकें लिखने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि तैयार की जाने वाली पुस्तकें डिजिटल प्लेटफॉर्म पर वन नेशन वन सब्सक्रिप्शन (ONOS) के माध्यम से उपलब्ध कराई जाएंगी। पुस्तकें इंटरैक्टिव स्वरूप में होंगी, जिससे विद्यार्थियों को बेहतर अध्ययन सामग्री प्राप्त होगी।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को मिलेगा बल
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं प्रवेश एवं शुल्क विनियामक समिति, मध्यप्रदेश शासन के अध्यक्ष प्रो. रवींद्र कान्हेरे ने कहा कि यह योजना मातृभाषा आधारित शिक्षा को मजबूत करेगी। इससे राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रमुख उद्देश्यों—भारतीय ज्ञान परंपरा, भारत केंद्रित शिक्षा और स्थानीय भाषाओं में शिक्षण को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि इस पहल से न केवल विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण पुस्तकें मिलेंगी बल्कि नए लेखकों का एक बड़ा वर्ग भी विकसित होगा।
राज्य स्तरीय कार्यशाला और प्रशिक्षण कार्यक्रम होंगे आयोजित
बैठक में बताया गया कि पुस्तक लेखन को व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाने के लिए राज्य स्तरीय समन्वय समिति का गठन किया जाएगा। विषय विशेषज्ञों से पुस्तक प्रस्ताव आमंत्रित किए जाएंगे और चयनित लेखकों को निर्धारित समयसीमा में पुस्तक लेखन का कार्य सौंपा जाएगा। लेखकों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम, कार्यशालाएं और अकादमिक मार्गदर्शन सत्र भी आयोजित किए जाएंगे, ताकि उच्च गुणवत्ता की मौलिक पुस्तकें तैयार की जा सकें।
विश्वविद्यालयों के कुलपतियों ने जताया समर्थन
डॉ. हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. यशवंत सिंह ठाकुर ने कहा कि हिंदी भाषा में उच्च स्तरीय पुस्तकें उपलब्ध होने से शिक्षा की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार होगा। देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर के कुलगुरु प्रो. राकेश सिंघई ने कहा कि अंग्रेजी भाषा की बाधा के कारण जो ज्ञान बड़ी संख्या में विद्यार्थियों तक नहीं पहुंच पाता, वह भारतीय भाषाओं में उत्कृष्ट पुस्तकों के माध्यम से आसानी से उपलब्ध हो सकेगा।
मध्यप्रदेश भोज (मुक्त) विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. मिलिंद द. दांडेकर ने कहा कि भारतीय भाषा पुस्तक योजना उच्च शिक्षा में अंग्रेजी पर अत्यधिक निर्भरता को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने पुस्तक लेखन में सरल, मानक और भारतीय ज्ञान परंपरा आधारित शब्दावली के उपयोग पर जोर दिया।

उच्च शिक्षा में हिंदी पुस्तकों की बढ़ती मांग
प्रश्नोत्तर सत्र के दौरान डॉ. चंदन श्रीवास्तव ने कहा कि वर्तमान समय में विभिन्न विषयों, विशेषकर व्यावसायिक और अकादमिक क्षेत्रों में हिंदी की गुणवत्तापूर्ण पुस्तकों की बड़ी कमी है। भारतीय भाषा पुस्तक योजना इस कमी को दूर करने के साथ-साथ मौलिक और शोध आधारित लेखन को बढ़ावा देगी। बैठक में प्रदेशभर से शिक्षाविदों, प्राध्यापकों और विषय विशेषज्ञों ने सहभागिता कर पुस्तक लेखन की संभावनाओं और कार्ययोजना पर विचार-विमर्श किया।