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आर्मी, नेवी और एयरफोर्स के सैल्यूट में क्यों है अंतर? जानें PM मोदी कौनसा सैल्यूट करते हैं

आर्मी, नेवी और एयरफोर्स के सैल्यूट में क्यों है अंतर? जानें PM मोदी कौनसा सैल्यूट करते हैं

भारत में जल, थल, वायु तीनों सेना अलग-अलग तरह से सैल्यूट करते हैं। लेकिन क्या आप इसके पीछे की वजह जानते है?

आर्मी नेवी और एयरफोर्स के सैल्यूट में क्यों है अंतर जानें  pm मोदी कौनसा सैल्यूट करते हैं

भारत की तीनों सेना आर्मी, नेवी और एयरफोर्स देश की ताकत हैं और उनका अनुशासन पूरे विश्व में सम्मान पाता है। पर क्या आपने कभी ध्यान दिया है कि तीनों सेनाओं के जवान सैल्यूट अलग-अलग तरीके से करते हैं? अगर नहीं, तो हम आपको बताते है कि जल, थल, वायु सेना के सैल्यूट में क्या अंतर हैं और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कौनसा सैल्यूट करते हैं।   

सैल्यूट अलग-अलग करने के पीछे कोई परंपरा नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरे ऐतिहासिक और रणनीतिक कारण छिपे हैं। इसलिए जल, थल, वायु तीनों सेनाएं अलग-अलग तरह से सैल्यूट करती हैं। 

आर्मी का सैल्यूट कैसे होता है? 

भारतीय सेना में जवान अपनी पूरी हथेली सामने की ओर फैलाकर सैल्यूट करते हैं। उंगलियां और अंगूठा एक-दूसरे के सटे रहते हैं, और बीच वाली उंगली माथे को छूती है। इसके पीछे की वजह सैल्यूट लेने वाले के प्रति 'पारदर्शिता और विश्वास' को दर्शाना है। इसका मतलब है कि सैनिक पूरी तरह निहत्था है और अपने वरिष्ठ अधिकारी का सम्मान करते हुए भरोसे का संकेत दे रहा है। खुले हाथ वाला सैल्यूट विश्वास और अनुशासन का प्रतीक है।

भारतीय नौसेना का सैल्यूट

नौसैनिकों का सैल्यूट अलग होता है। हथेली नीचे की ओर झुकी होती है। जिससे सामने से हथेली नहीं दिखाई देती। इसकी वजह इतिहास में छुपी है। पुराने समय में नौसैनिक जहाजों पर काम करते थे। जहां हाथ अक्सर ग्रीस और तेल से सने होते थे और सामने खड़े आधिकारी को अपने हाथ की गंदगी नहीं दिखाना।  सीधे हाथ दिखाकर सैल्यूट करना मुश्किल था। इसलिए उन्होंने हथेली को नीचे झुका कर सैल्यूट करना शुरू किया। यह परंपरा आज भी जारी है। जिसके पीछे की वजह सामने वाले व्यक्ति का सम्मान और आदर करना है।

भारतीय वायु सेना का सैल्यूट

वायु सेना का सैल्यूट पहले आर्मी के जैसा ही था, लेकिन 2006 में इसमें बदलाव किया गया। अब वायु सेना के जवान हथेली को जमीन से 45 डिग्री के कोण पर उठाकर सैल्यूट करते हैं। यह एंगल आकाश की ऊंचाइयों की ओर संकेत करता है और वायु सेना के आदर्श वाक्य “नभ: स्पृशं दीप्तम्” (शान के साथ आकाश को छूना) का प्रतीक है।

PM मोदी कैसे सैल्यूट करते है?

 अब आप सोच रहे होंगे कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कैसे सैल्यूट करते हैं। तो हम आपको बता दें, पीएम मोदी परेड के दौरन परेड को लीड कर रहे कमांडर के हिसाब से सैल्यूट करते हैं। यह जल, थल और वायु सेना के अनुसार बदलता रहता है।


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सैल्यूट करने के तरीके भलें ही अलग हो, लेकिन सभी का भाव एक ही होता हैं। सामने वाले व्यक्ति का सम्मान और आदर करना।