सेंसेक्स 829 अंक गिरा और निवेशकों के 10 लाख करोड़ रुपये डूबे। जानिए शेयर बाजार में आई बड़ी गिरावट की 5 मुख्य वजहें।
नई दिल्ली। शेयर बाजार में गुरुवार, 12 मार्च को ऐसा दबाव बना कि निवेशकों के होश उड़ गए। कारोबार की शुरुआत से ही बिकवाली का माहौल रहा और दिन खत्म होते-होते बाजार बुरी तरह लुढ़क गया। आम निवेशकों के पोर्टफोलियो को तगड़ा झटका लगा और बाजार से करीब 10 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति साफ हो गई।
सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में बड़ी गिरावट
गुरुवार के कारोबारी दिवस में बीएसई सेंसेक्स करीब 829 अंक गिरकर 76,034 पर बंद हुआ। वहीं, निफ्टी 50 भी 227 अंक टूटकर 23,639 के स्तर पर आ गया। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी करीब 1 फीसदी तक की गिरावट दर्ज की गई, जिससे बाजार में बेचैनी और बढ़ गई।
निवेशकों के 10 लाख करोड़ रुपये डूबे
गिरावट का असर सीधे निवेशकों की संपत्ति पर पड़ा। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप गुरुवार को करीब 450 लाख करोड़ रुपये से घटकर 440 लाख करोड़ रुपये रह गया। यानी एक ही दिन में निवेशकों की संपत्ति में लगभग 10 लाख करोड़ रुपये की गिरावट दर्ज की गई।
कच्चे तेल की कीमतों में बड़ा उछाल
गिरावट की सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल है। ब्रेंट क्रूड करीब 9 फीसदी उछलकर 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तेल ले जा रहे जहाजों पर ईरान के हमलों की खबरों से ऊर्जा सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई।
विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली
विदेशी निवेशकों ने भी बाजार से तेजी से पैसा निकालना शुरू कर दिया है। मार्च में अब तक एफआईआई ने करीब 39,100 करोड़ रुपये निकाल लिए हैं। गुरुवार को भी उन्होंने 6,267 करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए। हालांकि डोमेस्टिक इंस्टीट्यूशनल इंवेस्टर्स बाजार को संभालने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन दबाव ज्यादा है।
ग्लोबल मार्केट में कमजोरी
दुनिया भर के बाजारों से भी सकारात्मक संकेत नहीं मिल रहे। अमेरिका और एशियाई बाजारों में सुस्ती है और निवेशकों को डर है कि तेल संकट के कारण महंगाई फिर बढ़ सकती है।
ट्रंप की टैरिफ नीति से बढ़ी चिंता
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत समेत 16 देशों के खिलाफ 'अनफेयर ट्रेड' की नई जांच शुरू कर दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर दबाव बढ़ सकता है और निवेशकों का भरोसा कमजोर पड़ सकता है।
रुपये की कमजोरी और बढ़ता डर
गुरुवार को भारतीय रुपया भी दबाव में रहा। इंडियन रुपया डॉलर के मुकाबले 30 पैसे गिरकर 92.34 के स्तर पर पहुंच गया, जो इसके ऐतिहासिक निचले स्तर के करीब है। बाजार के डर का अंदाजा इंडिया VIX से भी लगाया जा सकता है, जिसे शेयर बाजार का ‘फियर इंडेक्स’ कहा जाता है। इसमें करीब 6 फीसदी का उछाल दर्ज किया गया।