ईरान-इजराइल तनाव के बीच सेंसेक्स 1353 अंक गिरकर 77,566 पर बंद हुआ। रुपया 92.33 के ऑलटाइम लो पर पहुंचा और कच्चा तेल 10 दिनों में 50% तक महंगा हो गया।
मुंबई। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर अब भारत के शेयर बाजार पर साफ दिखाई देने लगा है। सोमवार 9 मार्च को कारोबार के दौरान भारी बिकवाली देखने को मिली और सेंसेक्स 1353 अंक गिरकर 77,566 पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी भी 422 अंक टूटकर 24,028 के स्तर पर बंद हुआ। दिनभर बाजार में उतार-चढ़ाव रहा, लेकिन आखिरी घंटे में बिकवाली तेज हो गई।विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच बढ़ती जंग की स्थिति से निवेशकों में घबराहट है, जिसका सीधा असर बाजार पर पड़ा।
बैंक, ऑटो और मेटल शेयरों में ज्यादा गिरावट
आज के कारोबार में कई सेक्टर दबाव में रहे। खासकर बैंकिंग, ऑटो, मेटल, एनर्जी और FMCG कंपनियों के शेयरों में तेज गिरावट देखी गई। निवेशकों का रुझान फिलहाल जोखिम भरे निवेश से हटकर सुरक्षित विकल्पों की ओर जाता दिख रहा है। बाजार के जानकार कहते हैं कि जब भी दुनिया में जियोपॉलिटिकल तनाव बढ़ता है, शेयर बाजार में ऐसी प्रतिक्रिया आम होती है।
बाजार गिरने की बड़ी वजह
विशेषज्ञों के मुताबिक सोमवार की गिरावट के पीछे कुछ प्रमुख कारण रहे ईरान-इजराइल युद्ध के कारण वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। अगर संघर्ष लंबा चलता है तो कई उद्योगों पर असर पड़ सकता है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। तेल महंगा होने से इंपोर्ट बिल और महंगाई दोनों बढ़ने का खतरा रहता है। अमेरिका और एशिया के कई बाजारों में भी गिरावट का माहौल रहा, जिसका असर भारतीय बाजार पर पड़ा।
निवेशकों की वेल्थ 22 लाख करोड़ घटी
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर निवेशकों की संपत्ति पर भी पड़ा है। 27 फरवरी को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप करीब ₹4.63 लाख करोड़ था। लेकिन लगातार बिकवाली के कारण 9 मार्च तक यह घटकर करीब ₹4.41 लाख करोड़ रह गया। यानी कुछ ही दिनों में निवेशकों की वेल्थ ₹22 लाख करोड़ से ज्यादा कम हो गई।
रुपया भी रिकॉर्ड निचले स्तर पर
शेयर बाजार के साथ-साथ भारतीय मुद्रा भी दबाव में रही। सोमवार को डॉलर के मुकाबले रुपया 92.33 के ऑलटाइम लो पर पहुंच गया। विशेषज्ञों के मुताबिक अगर वैश्विक तनाव लंबा चला, तो रुपये पर दबाव और बढ़ सकता है।
10 दिन में 50% महंगा हुआ कच्चा तेल
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भी तेज उछाल आया है। 9 मार्च को कारोबार के दौरान ब्रेंट क्रूड 115 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया। बाद में इसमें थोड़ी गिरावट आई और यह करीब 105 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहा। पिछले 10 दिनों में तेल करीब 50% तक महंगा हो चुका है, जो बाजार के लिए चिंता का संकेत माना जा रहा है।
पेट्रोल-डीजल महंगा होने की आशंका
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर तेल की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं तो यह 150 डॉलर प्रति बैरल तक भी जा सकती हैं। ऐसे में भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर असर पड़ सकता है। अनुमान है कि आने वाले समय में ईंधन 5 से 6 रुपए प्रति लीटर तक महंगा हो सकता है। हालांकि सरकार का कहना है कि फिलहाल देश के पास पर्याप्त तेल भंडार मौजूद है।