अमेरिका-ईरान तनाव के बीच सेंसेक्स 1048 अंक टूटा। सोना 7 हजार बढ़कर 1.66 लाख पहुंचा, कच्चा तेल 79 डॉलर पर। पाकिस्तान का बाजार 10% गिरा।
मुंबई। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने सोमवार को भारतीय शेयर बाजार की रफ्तार तोड़ दी। अमेरिका-ईरान और इजराइल के बीच जंग जैसे हालात का असर सीधे दलाल स्ट्रीट पर दिखा। BSE Sensex 1048 अंक यानी 1.29% टूटकर 80,239 पर बंद हुआ। वहीं Nifty 50 भी 313 अंक गिरकर 24,866 पर आ गया। बाजार खुलने से लेकर बंद होने तक बेचैनी साफ दिखी, और 30 में से 28 शेयर लाल निशान में रहे।
तेल में तेजी और बाजार में डर
जियोपॉलिटिकल तनाव का पहला असर कच्चे तेल पर पड़ा। Brent Crude 10% चढ़कर 79 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया। जानकार मान रहे हैं कि अगर हालात और बिगड़े तो कीमतें 120 डॉलर तक जा सकती हैं। तेल महंगा होने का मतलब साफ है महंगाई का दबाव। इससे कंपनियों की लागत बढ़ती है और मुनाफा घट सकता है। यही डर निवेशकों को बेचने पर मजबूर कर रहा है। दिल्ली में पेट्रोल ₹95 से बढ़कर ₹100 लीटर तक जा सकता है, डीजल भी 92 रुपए तक पहुंचने की आशंका जताई जा रही है।
सोना बना सुरक्षित ठिकाना
बाजार की गिरावट के बीच सोने-चांदी में जबरदस्त तेजी देखी गई। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन के मुताबिक 24 कैरेट सोना 7 हजार रुपए उछलकर 1.66 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। एक किलो चांदी भी 20 हजार बढ़कर 2.87 लाख पर पहुंच गई। कमोडिटी एक्सपर्ट अजय केडिया का कहना है कि अगर अनिश्चितता बनी रही तो सोना 1.90 लाख और चांदी 3.50 लाख तक जा सकती है। जंग के माहौल में निवेशक जोखिम से दूर भागते हैं, और सोने को सुरक्षित मानते हैं, इसलिए मांग अचानक बढ़ जाती है।

एशियाई बाजारों में भी हड़कंप
तनाव का असर सिर्फ भारत तक सीमित नहीं रहा। पाकिस्तान का KSE-30 9.73% टूटकर 46,326 पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान ट्रेडिंग एक घंटे के लिए रोकनी पड़ी। जापान का Nikkei 225 1.35% गिरा, जबकि हॉन्गकॉन्ग का Hang Seng Index 2.14% नीचे आया। चीन का Shanghai Composite हालांकि हल्की बढ़त के साथ बंद हुआ।
यूरोप और अमेरिका में भी दबाव
यूरोप में जर्मनी का DAX 2.3% और फ्रांस का CAC 40 1.8% गिरा। अमेरिका में पिछला कारोबारी सत्र मिला-जुला रहा। Dow Jones Industrial Average 1.05% गिरा, जबकि Nasdaq Composite और S&P 500 भी कमजोरी के साथ बंद हुए।डेनमार्क की शिपिंग कंपनी A.P. Moller-Maersk ने होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही अस्थायी रूप से रोक दी है। यह वही समुद्री रास्ता है, जहां से दुनिया के कुल पेट्रोलियम का करीब 20% गुजरता है। अगर यहां सप्लाई बाधित हुई, तो असर सिर्फ तेल पर नहीं, बल्कि भारत के नॉन-ऑयल एक्सपोर्ट पर भी पड़ेगा। बासमती चावल से लेकर इंजीनियरिंग सामान तक, सबकी ढुलाई प्रभावित हो सकती है।