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Iran War, Oil Prices Shake Indian Markets

ईरान युद्ध और महंगे तेल से हिला बाजार: निफ्टी ने एक दशक में दूसरी सबसे बड़ी मासिक गिरावट दर्ज की, निवेशकों में चिंता

ईरान युद्ध और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण भारतीय शेयर बाजार में तेज गिरावट देखी जा रही है। निफ्टी ने एक दशक की दूसरी सबसे बड़ी मासिक गिरावट दर्ज की.


ईरान युद्ध और महंगे तेल से हिला बाजार निफ्टी ने एक दशक में दूसरी सबसे बड़ी मासिक गिरावट दर्ज की निवेशकों में चिंता

भारतीय शेयर बाजार इस समय पिछले कई वर्षों के सबसे कठिन दौर से गुजर रहा है। बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल और विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली के कारण बाजार में गहरी गिरावट दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह गिरावट इतनी तेज है कि इसे कोविड महामारी के शुरुआती दौर के बाद का सबसे खराब महीना माना जा रहा है। प्रमुख सूचकांक निफ्टी-50 ने लगभग एक दशक में अपनी दूसरी सबसे बड़ी मासिक गिरावट दर्ज की है, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई है।

मार्च में अब तक निफ्टी करीब 8 प्रतिशत टूटा

मार्च 2020 में जब वैश्विक स्तर पर महामारी का संकट फैला था, तब भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट आई थी। उस समय निफ्टी लगभग 23 प्रतिशत तक टूट गया था। मार्च 2026 के दौरान अब तक निफ्टी में करीब 8 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की जा चुकी है। खास बात यह है कि महीने का आधा समय भी अभी बाकी है, जिससे यह आशंका बनी हुई है कि यदि परिस्थितियां नहीं सुधरीं तो गिरावट और गहरी हो सकती है। हाल के दिनों में बाजार में आई तेज गिरावट का मुख्य कारण पश्चिम एशिया में बढ़ता संघर्ष है, खासकर ईरान से जुड़ा युद्ध।

इस संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई है और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखी जा रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत लगभग 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई है। भारत अपनी जरूरत का लगभग 85 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए तेल की कीमतों में किसी भी प्रकार की बढ़ोतरी का सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था और बाजारों पर पड़ता है। इसके साथ ही एक और महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक क्षेत्र स्ट्रेट ऑफ होर्मुज भी चर्चा में है। यह वह समुद्री मार्ग है, जहां से भारत के लिए आने वाले तेल का बड़ा हिस्सा गुजरता है।

विदेशी निवेशकों ने इस माह 40 हजार करोड़ निकाले

बाजार की गिरावट को विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने और तेज कर दिया है। इस महीने अब तक विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से लगभग 40 हजार करोड़ रुपये निकाल लिए हैं। लगातार हो रही इस बिकवाली का असर बड़े शेयरों पर भी पड़ा है और बाजार के प्रमुख सूचकांक नीचे खिसक गए हैं। बीएसई सेंसेक्स इस सप्ताह लगभग 4000 अंक नीचे जाने की स्थिति में है, जबकि निफ्टी केवल पांच ट्रेडिंग सत्रों में करीब 5 प्रतिशत गिर चुका है। छोटे और मझोले कंपनियों के शेयर भी इससे अछूते नहीं रहे और उनके सूचकांक में भी लगभग 3 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई है।

गिरावट को अवसर के रूप में देखें निवेशक

कुछ विश्लेषकों का कहना है कि बाजार की कमजोरी केवल भू-राजनीतिक कारणों से नहीं है, बल्कि वैश्विक आर्थिक वृद्धि को लेकर चिंता और कुछ क्षेत्रों से जुड़ी चुनौतियां भी इसके पीछे हैं। उदाहरण के तौर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के तेजी से बढ़ते उपयोग ने आईटी सेवाओं के क्षेत्र को लेकर नई आशंकाएं पैदा कर दी हैं, जिससे निवेशक भविष्य की मांग को लेकर सावधानी बरत रहे हैं।

हालांकि इस उतार-चढ़ाव के बावजूद कई फंड मैनेजर्स का मानना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियादी स्थिति अभी भी मजबूत है। कंपनियों की आय में पिछले कुछ तिमाहियों में अच्छा सुधार देखने को मिला है। इसलिए निवेशकों को परेशान होने की जरूरत नहीं है। उन्हें हर गिरावट को एक अवसर के रूप में देखना चाहिए।