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Iran Israel War Impact on India Economy

ईरान-इजराइल जंग का असर: भारत की 50% तेल सप्लाई संकट में? सोना-चांदी और शेयर बाजार पर दबाव

ईरान-इजराइल जंग से भारत की 50% तेल सप्लाई पर संकट। होर्मुज रूट बाधित होने से 10% एक्सपोर्ट और शेयर बाजार प्रभावित हो सकते हैं। सोना-चांदी में तेजी की संभावना।


ईरान-इजराइल जंग का असर भारत की 50 तेल सप्लाई संकट में सोना-चांदी और शेयर बाजार पर दबाव

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ गया है। इजराइल द्वारा ईरान की राजधानी तेहरान समेत कई ठिकानों पर हमले के बाद हालात तेजी से बदल रहे हैं। इसका असर सिर्फ दो देशों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश पर भी पड़ सकता है। अगर यह टकराव लंबा खिंचता है, तो भारत की ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार और बाजार तीनों पर दबाव दिख सकता है।

क्यों अहम है होर्मुज स्ट्रेट?

ईरान और ओमान के बीच स्थित होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक है। खाड़ी देशों सऊदी अरब, इराक, यूएई से निकलने वाला बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। आंकड़ों के मुताबिक, भारत को हर महीने मिलने वाली कच्चे तेल की सप्लाई का करीब 50% हिस्सा इसी रूट से आता है। अगर जंग बढ़ती है और यह मार्ग बाधित होता है, तो भारत के लिए बड़ी सप्लाई चेन चुनौती खड़ी हो सकती है। तेल महंगा हुआ तो असर सीधा आम आदमी की जेब पर पड़ेगा पेट्रोल-डीजल से लेकर ट्रांसपोर्ट और रोजमर्रा की चीजें तक।

10% नॉन-ऑयल एक्सपोर्ट भी दांव पर

तेल ही नहीं, भारत का व्यापार भी इस रूट पर काफी निर्भर है। रिपोर्ट्स बताती हैं कि भारत के कुल नॉन-ऑयल एक्सपोर्ट का 10% से ज्यादा हिस्सा इसी समुद्री रास्ते से जाता है। इसमें बासमती चावल, चाय, मसाले, फल-सब्जियां और इंजीनियरिंग गुड्स शामिल हैं। अगर माल ढुलाई महंगी हुई या रूट असुरक्षित हुआ, तो भारतीय निर्यातकों की लागत बढ़ जाएगी। खाड़ी देशों (GCC) के साथ भारत का व्यापार खासा बड़ा है। ऐसे में शिपिंग बीमा और फ्रेट चार्ज बढ़ने का सीधा असर कीमतों पर पड़ेगा।

शेयर बाजार पर क्यों बढ़ेगा दबाव?

भारतीय शेयर बाजार के लिए क्रूड ऑयल एक संवेदनशील कारक है। अगर ब्रेंट क्रूड की कीमतें 80-85 डॉलर प्रति बैरल के पार जाती हैं, तो बाजार में बड़ी बिकवाली देखी जा सकती है।शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड 2.87% चढ़कर 72.87 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया था। पेंट, टायर, एविएशन, लॉजिस्टिक्स जैसे सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे। पहले से ही विदेशी निवेशकों (FIIs) की बिकवाली जारी है। ऐसे में जियो-पॉलिटिकल तनाव निवेशकों का भरोसा और कमजोर कर सकता है।

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सोना-चांदी में क्यों आ सकती है तेजी?

जब दुनिया में अनिश्चितता बढ़ती है, तो निवेशक सुरक्षित विकल्प तलाशते हैं। सोना और चांदी को पारंपरिक तौर पर ‘सेफ हेवन’ माना जाता है। कमोडिटी एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर युद्ध का दायरा बढ़ता है, तो सोने की मांग और तेज हो सकती है। सिर्फ एक दिन में सोने में ₹1,075 और चांदी में ₹6,033 की तेजी दर्ज की गई।

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