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Invest in Metro Real Estate with ₹500 via REITs

सिर्फ 500 रुपए से मेट्रो शहर के रियल एस्टेट में निवेश !

अब सिर्फ 500 रुपये से दिल्ली-मुंबई जैसे मेट्रो शहरों के रियल एस्टेट में निवेश संभव है। जानिए REITs क्या हैं, कैसे कमाई होती है और जोखिम क्या हैं


सिर्फ 500 रुपए से मेट्रो शहर के रियल एस्टेट में निवेश

ज्ञानेश पाठक

रीयल एस्टेट में निवेश, हर निवेशक का सपना होता है। हो भी क्यों न। लंबे समय में रीयल एस्टेट से जुड़ी संपत्तियों ने बड़ा मुनाफा कमाकर दिया है। कई शहरों की संपत्ति तो मल्टीबैगर यानी कई गुना तक बढ़ी है। इस वजह से निवेशकों के बीच प्लॉट या फिर व्यावसायिक संपत्तियों की तरफ ज्यादा आकर्षण बढ़ा है। इसके बावजूद इस तरह की संपत्ति में सभी के लिए निवेश करना संभव नहीं होता। इसकी मुख्य वजह है, कीमत। अगर आपके पास लाखों या फिर करोड़ रुपए नहीं हैं तब तक रियल एस्टेट दूर का सपना है। इसके अलावा, सही संपत्ति, उचित कीमत पर कैसे खरीदी जाए? यह सवाल हर किसी के जेहन में उठता रहता है। सही टाइटल, संपत्ति का रखरखाव भी आपके लिए मायने रखता है। इन सभी बातों का समाधान अब निवेश की दुनिया में मौजूद है। सिर्फ 500-1000 रुपए जैसी छोटी सी रकम का निवेश करके अब आप दिल्ली और मुंबई जैसे मेट्रो शहरों में संपत्ति के मालिक बन सकते हैं। यह भी बिना किसी इंझंझाट के। इसे संभव बनाया है- रीट्स ने। भारत में यह एक नए तरह का संपत्ति वर्ग है। जिसकी शुरुआत 5-6 साल पहले हुई है। आम आदमी के बीच रीट्स चर्चा में तब आया जब पूर्व सेबी चैयरमेन माधवी पुरी चुच ने इस नई संपत्ति की तरफ निवेशकों का ध्यान खींचा। मुच ने खुद इसमें बड़ा निवेश किया है। आज के निवेश मंत्र में हम रीट्स के बारे में जानेंगे। रीट्स यानी रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट को आप आसान भाषा में रियल एस्टेट का 'म्यूचुअल फंड' समझ सकते हैं। यह उन लोगों के लिए बेहतरीन जरिया है जो प्रॉपर्टी में निवेश करना चाहते हैं, लेकिन उनके पास लाखों-करोड़ों रुपये नहीं हैं और न ही संपत्ति की समझ रखते हैं।

क्या होता है रीट्स

रोट्स एक तरह से ट्रस्ट होता है। यह ट्रस्ट कंपनी के रूप में काम करता है। कई रीट्स एनएसई बीएसई में सूचीबद्ध होते हैं। इनकी यूनिट्स सीधे एक्सचेंज से खरीदी जा सकती हैं। यह ऐसी कंपनी होती है, जो आय देने वाली कमर्शियल संपतियों (जैसे ऑफिस स्पेस, मॉल, होटल, या वेयरहाउस) का मालिकाना हक रखती है और उनका प्रबंधन करती है। जब आप रीट्स में निवेश करते हैं, तो आप सीधे जमीन खरीदे बिना इन बड़ी संपतियों के एक हिस्से के मालिक बन जाते हैं

कैसे होती है कमाई

रीट्स उन रियल एस्टेट में पैसा लगाते हैं, जहां से उन्हें तुरंत कमाई शुरू हो सके। रेडी टू मूद मूलमंत्र है। इन संपतियों को किराये पर दे दिया जाता है। ज्यादातर संपतियों की लोकेशन बेहतर होती है। इनमें अधिकतर मॉल या शॉपिंग कॉम्प्लेक्स होते हैं। जी किराया मिलता है उसमें से प्रबंधन खर्च काटकर 90 प्रतिशत आमदनी शेयर धारकों को डिविडेंड या किराए के रूप में वापस कर दी जाती है। निवेशकों की किराया तो मिलता ही है साथ में भविष्य में संपति की कीमत बढ़ने पर पूंजीगत लाभ भी मिलता है। पूंजीगत लाभ शेयर की कीमत में दिखाई देता है। इसलिए रीट्स खरीदते वक्त कीमत मायने रखती है। इसी के आधार पर आपके निवेश का वील्ड निकलकर सामने आता है। ग्रील्ड से आशय है- निवेश करते समय भुगतान की गई राशि पर जो डिवीडेड मिलता है, का प्रतिशत रूप। मान लीजिए एक यूनिट की वास्तविक कीमत 1000 रुपए है। इसे आध बाजार से 1200 रुपए में खरीदते हैं। इस निवेश पर 60 रुपए का सालाना डिविडेंड मिलता है। यील्ड की गणना 1200 रुपए पर की जाएगी न कि 1000 पर। इसलिए इसे 5 प्रतिशत माना जाएगा।

कैसे करता है काम

रीट निवेशकों से पैसे इकट्ठा करती है। इस पैसे से बड़े-बड़े व्यावसायिक प्रोजेक्ट्स खरीदे या बनाए जाते हैं। उसके बाद उन इमारतों से जो किराया आता है, उसे कंपनी अपने पास रखती है। बाजार नियामक सेबी के नियम के अनुसार, रीट्स को अपनी शुद्ध आय का ७० प्रतिशत हिस्सा अपने शेयरधारकों (निवेशकों) को लाभांश या डिविडेंड के रूप में बांटना होता है।

रीट्स में निवेश के फायदे

कम निवेश आपको पूरी बिल्डिंग खरीदने की जरूरत नहीं है। आप बहुत कम रकम से शुरुआत कर सकते हैं। नियमित आयः किराये के रूप में आपको समय-समय पर डिविडेड मिलता रहता है। लिक्रिडिटीः इसे शेयर बाजार (एनएसई/बीएसई) पर शेयर की तरह कभी भी खरीदा या बेचा जा सकता है। प्रोफेशनल मैनेजमेंटः संपत्तियों का रखरखाव विशेषज्ञों द्वारा किया जाता है.

भारत में प्रमुख रीट्स

भारत में फिलहाल कुछ मुख्य गेट्स सूचीबद्ध हैं, जिनमें आप निवेश कर सकते हैं

  • Embassy Office Parks REIT

  • Mindspace Business

  • Parks REIT

  • Brookfield India Real

  • Estate Trust

  • Ne&us Select Trust

जोखिम

  • बाजार जोखिमः शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव का असर इसकी कीमत पर पड़ता है। निवेश करते समय सालाना उतार चढ़ाव जरूर देखें ।

  • किराया जोखिमः अगर ऑफिस या मॉल खाली पड़े रहे और किराया न आए, तो आपका मुनाफा कम हो सकता है।

  • ब्याज दरें: बैंक की व्याज दरें बढ़ती हैं. तो अक्सर रीट्स के दाम थोड़े गिर जाते हैं।

  • जरूरी बातः भारत में रीट्स में निवेश करने के लिए निवेशक के पास एक डीमेट खाता होना जरूरी है। तभी आप इनमें निवेश कर सकते हैं।