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India Cardamom Export Likely to Touch 14,000 Tonne

भारतीय इलायची की विदेशी बाजार में मांग से उम्मीदें बढ़ीं

वैश्विक आपूर्ति संकट से भारतीय इलायची की मांग बढ़ी। साल 2026 में निर्यात 14,000 टन तक पहुंचने की उम्मीद, कीमतें मजबूत


भारतीय इलायची की विदेशी बाजार में मांग से उम्मीदें बढ़ीं

आपूर्ति संकट से भारतीय इलायची को विदेशी बाजार में सुनहरा मौका मिला है, जिससे भारतीय निर्यातकों को अच्छा कारोबार मिलने की उम्मीद है और किसानों को भी बेहतर दाम मिलने की संभावना बन रही है। साल 2026 भारतीय इलायची किसानों और निर्यातकों के लिए राहत और उम्मीद लेकर आया है। अनुमान है कि इस साल इलायची का निर्यात करीब 14,000 टन तक पहुंच सकता है, जो आमतौर पर होने वाले औसत निर्यात से लगभग दोगुना है।

ग्वाटेमाला में उत्पादन गिरा, भारत को मिला फायदा

निर्यात में इस तेज बढ़ोतरी की सबसे बड़ी वजह ग्वाटेमाला में इलायची के उत्पादन में आई करीब 50 प्रतिशत की गिरावट बताई जा रही है। बता दें कि ग्वाटेमाला दुनिया के बड़े इलायची उत्पादक देशों में से एक है। वहां उत्पादन घटने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में इलायची की भारी कमी हो गई है।इसी कमी की वजह से अब भारतीय इलायची की मांग तेजी से बढ़ रही है। इससे भारतीय निर्यातकों को अच्छा कारोबार मिलने की उम्मीद है और किसानों को भी बेहतर दाम मिलने की संभावना बन रही है।

गल्फूड एक्सपो के बाद निर्यातकों को मिला भरोसा

हाल ही में हुए गल्फूड एक्सपो के बाद भारतीय निर्यातकों को बड़ा फायदा मिला है। बोडिनायकन्नूर के इलायची निर्यातक एसकेएम धनवनधन ने बताया कि स्पॉट बुकिंग की सफलता के कारण भारत ने अपने कई पुराने बाजार फिर से हासिल कर लिए हैं। उन्होंने बताया कि ईरानी नववर्ष नवरोज को लेकर आयात में तेजी आई है। वहीं रमजान से पहले पूरे मध्य पूर्व, जैसे सऊदी अरब, कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में भी भारतीय उत्पादों की मांग काफी बढ़ गई है। इससे भारत ने इन देशों में अपनी मजबूत बाजार स्थिति फिर से बना ली है।

होली में देश के अंदर बढ़ेगी इलायची की मांग

घरेलू बाजार को लेकर व्यापार सूत्रों का कहना है कि होली के दौरान मांग बढ़ने से देश के अंदर भी बाजार में तेजी आने की उम्मीद है।उन्होंने यह भी कहा कि लाल सागर में चल रहे व्यापार संकट के बावजूद भारतीय उद्योग पर ज्यादा असर नहीं पड़ा है। वजह यह है कि पश्चिम एशिया के व्यापार मार्ग, यूरोप जाने वाले रास्तों की तुलना में कम प्रभावित हुए हैं, इसलिए माल ढुलाई लगभग सामान्य रूप से चल रही है।नीना की स्थिति के कारण फरवरी के अंत से मार्च तक बारिश होने की संभावना है, जिससे आने वाली फसल को फायदा मिलेगा। इसके अलावा अमेरिका द्वारा भारतीय मसालों पर लगाए गए अतिरिक्त टैक्स हटाने से भारत को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कारोबार के लिए एक नया और बेहतर मौका भी मिला है। इससे भारतीय निर्यातकों के लिए आगे और अच्छे अवसर बनने की उम्मीद है।पुन्नूसे ने कहा कि ग्वाटेमाला में इलायची की फसल खराब होने से भारतीय इलायची को विदेशी बाजार में बड़ा मौका मिला है। इससे भारतीय इलायची की मांग बढ़ी है और निर्यात के सहारे बाजार मजबूत बना हुआ है।

इलायची 2450 रुपये प्रति किलो पर स्थिर

इडुक्की के इलायची उत्पादक एसबी प्रभाकर ने कहा कि निर्यात बाजार में तेजी आने वाले कुछ महीनों तक बनी रहने की उम्मीद है, क्योंकि विदेशी खरीदार अच्छी क्वालिटी वाली, निर्यात योग्य इलायची के लिए आपस में प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं। इसी वजह से इलायची के दाम करीब 2450 रुपये प्रति किलो पर टिके हुए हैं।उन्होंने बताया कि अब फसल कटाई का मौसम धीरे-धीरे खत्म हो रहा है और मार्च-अप्रैल तक सिर्फ हल्की कटाई होने की संभावना है। अच्छे मौसम और किसानों की बेहतर देखभाल की वजह से 2025-26 की फसल करीब 32,000 से 35,000 टन होने का अनुमान है।

भारतीय इलायची में अच्छी है तेल की मात्रा

व्यापार सूत्रों ने मौजूदा हालात को अनुकूल और सुनहरा अवसर बताया। भारतीय इलायची में तेल की मात्रा अच्छी है और दानों का आकार भी बड़ा है, यानी 7-8 मिमी और 8 मिमी के मोटे दाने अधिक मिल रहे हैं। इसी वजह से इस सीजन में इलायची के दाम गिरे नहीं हैं, बल्कि लगातार मजबूत बने हुए हैं। आमतौर पर जब बाजार में ज्यादा आवक होती है तो कीमतें गिर जाती हैं, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ।