4 मार्च को सोना 6,149 सस्ता होकर 1.61 लाख पर आया, जबकि चांदी एक दिन में 23,417 टूटी। 34 दिनों में सोना 14 हजार रुपए गिर चुका है। जानिए क्यों अलग-अलग शहरों में दाम बदलते हैं।
नई दिल्ली। त्योहारी सीजन की हलचल के बीच सोना-चांदी बाजार से बड़ी खबर आई है। 4 मार्च को सोने की कीमतों में जोरदार गिरावट दर्ज की गई। जो सोना कुछ दिन पहले तक रिकॉर्ड स्तर पर था, वही अब फिसलकर नीचे आ गया है। और गिरावट भी मामूली नहीं, सीधे 6,149 की जानकार इसे मुनाफावसूली यानी प्रॉफिट बुकिंग का असर बता रहे हैं। होली के कारण मंगलवार को बाजार बंद था, लेकिन खुले ही दाम नीचे आ गए।
IBJA के ताज़ा रेट क्या कहते हैं
India Bullion and Jewellers Association (IBJA) के मुताबिक, 10 ग्राम 24 कैरेट सोना ₹6,149 सस्ता होकर ₹1.61 लाख पर आ गया है। सोमवार को यही सोना ₹1.67 लाख प्रति 10 ग्राम था। यानी एक ही झटके में बड़ी राहत अगर पिछले 34 दिनों का हिसाब देखें, तो सोना करीब ₹14 हजार तक टूट चुका है। निवेशकों के लिए यह संकेत है, जबकि शादी-ब्याह की खरीदारी करने वालों के लिए मौका भी हो सकता है।
चांदी ने भी चौंकाया
सिर्फ सोना ही नहीं, चांदी में तो और तेज गिरावट दिखी। एक किलो चांदी ₹23,417 टूटकर ₹2.66 लाख पर पहुंच गई। सोमवार को इसका भाव ₹2.89 लाख प्रति किलो था। सर्राफा बाजार के कारोबारियों का कहना है कि ऊंचे स्तर पर पहुंचने के बाद बिकवाली बढ़ी, जिसका असर सीधे कीमतों पर पड़ा।
आखिर क्यों गिर रहे हैं दाम?
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक इसके पीछे मुख्य वजह प्रॉफिट बुकिंग है। जब दाम तेजी से ऊपर जाते हैं तो बड़े निवेशक मुनाफा निकाल लेते हैं। इससे सप्लाई बढ़ती है और कीमतें नीचे आ जाती हैं। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी हलचल बनी हुई है, डॉलर की चाल और वैश्विक अनिश्चितता का असर भारतीय बाजार पर पड़ता है, यह कोई नई बात नहीं।
अलग-अलग शहरों में सोने के दाम अलग क्यों?
अक्सर लोग पूछते हैं कि दिल्ली में कुछ और, चेन्नई में कुछ और, ऐसा क्यों। इसके पीछे कई कारण हैं।
1. ट्रांसपोर्टेशन और सिक्योरिटी का खर्च
सोना एक शहर से दूसरे शहर लाना आसान काम नहीं। भारी सुरक्षा, बीमा और ईंधन का खर्च जुड़ता है। आयात केंद्रों से दूरी बढ़ेगी तो लागत भी बढ़ेगी।
2. खरीदारी की मात्रा
दक्षिण भारत में सोने की खपत लगभग 40% तक मानी जाती है। वहां ज्वेलर्स बड़ी मात्रा में खरीदारी करते हैं। बल्क खरीद पर उन्हें बेहतर रेट मिलता है, जिससे स्थानीय दाम थोड़े कम दिख सकते हैं।
3. लोकल ज्वेलरी एसोसिएशन की भूमिका
हर राज्य में अपने ज्वेलर्स संगठन होते हैं, जो स्थानीय मांग और सप्लाई के आधार पर रेट तय करते हैं। इसी वजह से शहर दर शहर अंतर दिखता है।
4. पुराना स्टॉक और खरीद मूल्य
ज्वेलर्स ने स्टॉक कब और किस रेट पर खरीदा, यह भी अहम है। जिनके पास पुराने और सस्ते रेट का माल है, वे कम कीमत पर भी बेच सकते हैं।