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Demat Account: A Must for Today’s Investors

निवेश मंत्र: डीमैट खाता आज की जरूरत

डीमैट खाता क्यों है आज की जरूरत? शेयर, म्यूचुअल फंड और बॉन्ड्स को सुरक्षित रखने का डिजिटल तरीका, फायदे और खाता खोलने की प्रक्रिया।


निवेश मंत्र डीमैट खाता आज की जरूरत

ज्ञानेश पाठक

शेयर खरीदना और बेचना मिनटों नहीं सैकेंड का काम है। खरीदने वाले निवेशक के खाते में एक दिन बाद शेयर दिखाई देने लगते हैं। इसके चलते लेनदेन में पारदर्शिता बढ़ी है। कागजी कार्रवाई एक तरह से खत्म हो गई है। खाता खुलवाना आसान है। कुछ मिनटों में खाता खुल जाता है। इसके कारण कंपनियों का खर्च भी कम हो गया है। डीमैट सिर्फ शेयर रखने के काम नहीं आता है, बॉड्स, म्युचुअल फंड की युनिट्स रखने में भी यह काम में आता है। माना जा रहा है, आने वाले समय में रियल एस्टेट, छात्रों की अंकसूची भी इलेक्ट्रॉनिक मोड में डीमैट खातों में रखी नज़र आएंगी। 

शेयर बाजार की दुनिया में कदम रखने के लिए डीमैट खाता सबसे पहली और अनिवार्य जरूरत है। जिस तरह हम अपने पैसे सुरक्षित रखने के लिए बैंक अकाउंट का उपयोग करते हैं, उसी तरह शेयरों को डिजिटल रूप में रखने के लिए डीमैट खाते का उपयोग किया जाता है।

पुराने समय में जब लोग शेयर खरीदते थे, तो उन्हें कागज के सर्टिफिकेट मिलते थे। अब यह पूरी प्रक्रिया डिजिटल हो गई है। डीमैट खाता एक ऐसा डिजिटल लॉकर है जहाँ आपके द्वारा खरीदे गए शेयर, बॉन्ड्स और म्यूचुअल फंड्स इलेक्ट्रॉनिक रूप में सुरक्षित रखे जाते हैं।

डीमैट खाता कैसे काम करता है

जब आप शेयर बाजार में कोई शेयर खरीदते हैं, तो वह आपके डीमैट खाते में क्रेडिट (जमा) हो जाता है। जब आप उसे बेचते हैं, तो वह वहां से डेबिट (निकल) जाता है। इसके लिए मुख्य रूप से तीन कड़ियों काम करती हैं: ब्रोकर या आपका बैंक। यह आपके और स्टॉक एक्सचेंज के बीच का जरिया है।

डिपॉजिटरीः भारत में दो मुख्य संस्थाएं हैं एक है एनएसडीएल और दूसरी है सोडीएसएल । भारत में डीमेट अकाउंट इन्हीं दो में से किसी एक में खाता खोला जा सकता है। यह आपके शेयरों को सुरक्षित रखती हैं।

ट्रेडिंग अकाउंटः शेयर खरीदने या बेचने का ऑर्डर देने के लिए इसका उपयोग होता है (अक्सर डीमैट और ट्रेडिंग अकाउंट साथ में ही खोले जाते हैं.

डीमैट खाते के मुख्य लाभ

सुरक्षाः फिजिकल सर्टिफिकेट के फटने, खोने या चोरी होने का डर खत्म हो गया है।

तेजीः शेयर खरीदना और बेचना अब चंद सेकंड्स का काम है।

सुविधाः आप एक ही खाते में शेयर, गोल्ड बॉन्ड्स, ईटीएफ और म्यूचुअल फंड्स रख सकते हैं।

लागत में कमीः स्टाम्प ड्यूटी और कागजी कार्रवाई का खर्च बच जाता है।

ऑटोमैटिक अपडेटः बोनस शेयर या स्टॉक स्प्लिट होने पर वे अपने आप आपके खाते में जुड़ जाते हैं।

खाता कैसे खोलें

ब्रोकर चुनें: अपनी सुविधा के हिसाब से एक विश्वसनीय स्टॉक ब्रोकर चुनें।

ऑनलाइन फॉर्म भरें: ब्रोकर की ऐप या वेबसाइट पर जाकर रजिस्ट्रेशन करें।

ई केवायसीः आधार से जुड़े मोबाइल नंबर के जरिए अपनी केवाईसी प्रक्रिया पूरी करें। वेरिफिकेशनः ब्रोकर आपके दस्तावेजों की जांच करेगा। एक्टिवेशनः वेरिफिकेशन के बाद आपका खाता 24-48 घंटों में सक्रिय हो जाएगा।

सावधानी

डीमैट खाता खोलते समय अकाउंट मेंटेनेंस चार्ज और ब्रोकरेज चार्ज के बारे में अच्छी तरह जान लें, क्योंकि ये अलग-अलग ब्रोकर्स के लिए भिन्न हो सकते हैं।

1996 से पहले शेयर खरीदना और बेचना बड़ा पेचीदगी भरा हुआ करता था। उस समय शेयर सर्टिफिकेट के रूप में होते थे। जब किसी शेयर का सौदा खरीददार और विक्रेता के बीच होता था तब विक्रेता सर्टिफिकेट पर हस्ताक्षर करके खरीददार को देता था। प्रमाण पत्र को कंपनी रजिस्ट्रार में नाम बदलवाने के लिए भेजा जाता था। जिसमें कई बार महीनों भी लग जाते थे। यही नहीं कई दफा शेयर सर्टिफिकेट खो भी जाते थे। कई बार कट फट जाते थे या फिर हस्ताक्षर का मिलान नहीं हो पाता था। मगर अब यह बातें गुजरे हुए जमाने की तरह है। अब डीमेट का समय है।


 

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