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अनिल अग्रवाल बोले- भारत नंबर-1 बनने का यही सही समय

भारत अभी नंबर-1 नहीं बनेगा तो कब बनेगा: अनिल अग्रवाल

वेदांता चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने कहा कि उद्यमिता, परोपकार और सरकारी प्रोत्साहन के साथ भारत दुनिया में नंबर-1 बन सकता है। जानें पूरी बात।


भारत अभी नंबर-1 नहीं बनेगा तो कब बनेगा अनिल अग्रवाल

नई दिल्ली । वेदांता समूह के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने कहा है कि परोपकारी सोच वाली उद्यमिता और सरकार के प्रोत्साहन के साथ भारत दुनिया में नंबर-1 बनने की क्षमता रखता है और इसके लिए मौजूदा समय सबसे उपयुक्त है। उन्होंने यह बात सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किए गए एक पोस्ट में कही।

अग्रवाल ने अपनी टिप्पणी की शुरुआत हिस्ट्री चैनल की एक श्रृंखला का उल्लेख करते हुए की। उन्होंने लिखा कि अमेरिका के निर्माण में प्रमुख भूमिका उद्यमियों की रही। इस श्रृंखला में कॉर्नेलियस वेंडरबिल्ट, एंड्रयू कार्नेगी, जॉन डी. रॉकफेलर, जे.पी. मॉर्गन और हेनरी फोर्ड जैसे उद्योगपतियों को शामिल किया गया, जिन्होंने क्रमशः अवसंरचना, इस्पात, तेल, बैंकिंग और ऑटोमोबाइल उद्योग की नींव रखी।

दान और उद्यमिता से बना अमेरिका का विकास मॉडल

अग्रवाल ने कहा कि अमेरिका के शीर्ष विश्वविद्यालयों में से अधिकांश निजी दान से स्थापित हुए हैं। वहां के कई प्रमुख पुस्तकालय, थिंक टैंक और अस्पताल भी उद्यमियों द्वारा समाज को लौटाई गई संपत्ति से बने हैं। उनके अनुसार, यह मॉडल देश के दीर्घकालिक विकास की मजबूत आधारशिला साबित हुआ। उन्होंने कहा कि भारत भी कई मायनों में अमेरिका जैसा है बड़ा बाजार, मजबूत उद्यमिता परंपरा और प्रचुर प्राकृतिक व मानव संसाधन इसकी सबसे बड़ी ताकत हैं।

उद्यमियों पर भरोसा जरूरी

अग्रवाल ने कहा कि भारत के निर्माण में उद्यमियों की भूमिका अहम होगी। उन्हें सम्मान, भरोसा और अनुकूल वातावरण दिया जाना चाहिए ताकि वे परिसंपत्तियां बना सकें, संसाधनों का बेहतर उपयोग कर सकें और रोजगार सृजन को बढ़ावा दे सकें। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि उद्यमियों को अनावश्यक प्रक्रियाओं में उलझाने के बजाय स्व-प्रमाणीकरण जैसी व्यवस्था दी जानी चाहिए, जिससे वे अपनी ऊर्जा व्यवसाय विस्तार में लगा सकें।

भारत अमेरिका से बेहतर कर सकता है

अग्रवाल ने विश्वास जताया कि भारत संसाधनों और मानव क्षमता के मामले में अमेरिका से भी बेहतर प्रदर्शन कर सकता है। उन्होंने विशेष रूप से महिलाओं की क्षमता और भागीदारी को देश की बड़ी ताकत बताया। उन्होंने कहा कि परोपकारी दृष्टिकोण वाली गतिशील उद्यमिता, सरकार की नीतिगत सहूलियत और समाज का समर्थन यही तीन कारक भारत को वैश्विक स्तर पर अग्रणी बना सकते हैं। 

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