1 अप्रैल 2026 से लागू होगा नया IT ACT , आसान होगी फाइलिंग या बढ़ेगी मुश्किलें, जानें डिटेल

1 अप्रैल 2026 से लागू होगा नया इनकम टैक्स एक्ट, ITR फाइलिंग होगी आसान

Update: 2026-01-20 15:00 GMT

केंद्र सरकार ने पुराने इनकम टैक्स एक्ट 1961 को बदलकर नया इनकम टैक्स एक्ट 2025 पेश किया था। यह कानून 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा। इस नए एक्ट में सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब ‘असेसमेंट ईयर’ और ‘प्रीवियस ईयर’ की जगह ‘टैक्स ईयर’ का इस्तेमाल होगा।

इस बदलाव का उद्देश्य टैक्स सिस्टम को और आसान, पारदर्शी और टैक्सपेयर-फ्रेंडली बनाना है। अब आम नागरिक के लिए ITR फाइल करना और समझना आसान होगा। इस बदलाव से टैक्सपेयर्स को यह जानने में आसानी होगी कि उनकी आय किस साल की है और उसका टैक्स कब देना है।

पुराने सिस्टम में क्यों होती थी कन्फ्यूजन?

पुराने इनकम टैक्स कानून में, इनकम कमाने का साल फाइनेंशियल ईयर (FY) कहलाता था और उसी इनकम पर टैक्स का असेसमेंट अगले साल किया जाता था। जिसे असेसमेंट ईयर (AY) कहा जाता था। उदाहरण के लिए: FY 2024-25 में कमाई गई इनकम को AY 2025-26 में रिपोर्ट और असेस किया जाता था। इस वजह से आम टैक्सपेयर के लिए यह समझना मुश्किल हो जाता था कि उनकी इनकम किस साल की है और उसका टैक्स किस साल में लागू होगा।

एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह जटिलता (कम्प्लेक्सिटी) खासकर नए फाइलर्स और छोटे बिजनेसमैन के लिए परेशानी का कारण बनती थी। कई बार लोग अपने ITR फॉर्म्स गलत साल के अनुसार भर देते थे। जिससे नोटिस और कंफ्यूजन की स्थिति (सिचुएशन) पैदा होती थी।

नया ‘टैक्स ईयर’ सिस्टम

नए कानून के अनुसार, अब टैक्स ईयर का मतलब होगा कि इनकम जिस साल कमाई गई, उसी साल उसका टैक्स फाइल और असेस किया जाएगा। यानी अब ‘प्रीवियस ईयर’ और ‘असेसमेंट ईयर’ की जटिल टर्म्स की जरूरत खत्म हो जाएगी।इस बदलाव से टैक्स सिस्टम ज्यादा इजी और सीधे-साधे रूप में काम करेगी। अब आसानी से यह समझ पाएंगे कि उनकी आय किस टैक्स ईयर की है और उसी साल ITR फाइल करना होगा। यह कदम टैक्स कंप्लायंस को बढ़ावा देने और टैक्स पेयर फ्रेंडली सिस्टम बनाने की दिशा में एक बड़ा सुधार है।

ITR फाइलिंग में बदलाव

नई व्यवस्था में इनकम जिस टैक्स ईयर में कमाई गई, उसी साल ITR फाइल होगी। इससे दो अलग-अलग सालों के बीच कन्फ्यूजन खत्म हो जाएगा।

  • टैक्स रेट्स या स्लैब्स में कोई बदलाव नहीं हुआ है।
  • केवल टर्मिनोलॉजी और प्रोसेस इजी हो गई है।
  • टैक्स नोटिस और फॉर्म्स में अब ‘टैक्स ईयर’ का ही मेंशन होगा।
  • नए फाइलर्स और छोटे बिजनेसमैन अब अधिक आसानी से ITR फाइल कर सकेंगे।

 टैक्स ईयर को इनकम से जुड़े फाइनेंशियल ईयर से मैच किया गया है। जिससे पुराने सिस्टम में मौजूद गैप खत्म हो जाएगा

2025-26 और 2026-27 ITR पर असर

यह बदलाव 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा। इसका सीधा असर ITR 2026-27 (टैक्स ईयर 2026-27) से दिखाई देगा। हालांकि, 2025-26 के ITR फॉर्म्स में भी लैंग्वेज और टर्म्स में बदलाव देखने को मिल सकता है।

  • नोटिस, असेसमेंट और अन्य टैक्स डॉक्यूमेंट्स में अब ‘टैक्स ईयर’ लिखा जाएगा।
  • टैक्सपेयर्स को अब अपने रिकॉर्ड और फाइलिंग को उसी साल के अनुसार मैच करना होगा।
  • इससे टैक्स कम्युनिकेशन और भी क्लियर और स्ट्रेटफॉरवर्ड होगा।

आम टैक्सपेयर के लिए मतलब

सरल शब्दों में, अब “पिछले साल की इनकम, अगले साल असेसमेंट” वाली जटिलता (कम्प्लेक्सिटी) खत्म हो जाएगी। इनकम कमाने और टैक्स फाइलिंग का साल एक ही होगा, जिससे टैक्स कंप्लायंस इजी और क्लियर हो जाएगा।

  • नए फाइलर्स के लिए सिस्टम अब यूजर फ्रेंडली होगा।
  • छोटे बिजनेसमैन और सैलरी लेने वालों को अपने टैक्स रिकॉर्ड समझने में आसानी होगी।
  • सरकार का यह कदम टैक्स कंप्लायंस बढ़ाने और टैक्स सिस्टम को इजीबनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है।

इस बदलाव से टैक्सपेयर अब अपने ITR फाइलिंग और टैक्स रिकॉर्ड्स को बेहतर तरीके से मैनेज कर पाएंगे, और पुराने कन्फ्यूजन वाली समस्याओं से रिलीफ मिलेगी।

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