भारत से 25% टैरिफ हटने के संकेत, अमेरिकी वित्त मंत्री के बयान के बाद बढ़ी उम्मीद

भारत पर 25% टैरिफ हटाने के संकेत, अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी बोले– बातचीत से मिल सकती है राहत।

Update: 2026-01-24 10:15 GMT

नई दिल्लीः भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर अभी भी इंतजार हो रहा है। इस बीच व्यापारिक रिश्तों को लेकर एक अहम संकेत सामने आया है। अमेरिका के ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने भारत पर लगाए गए 25 फीसदी टैरिफ को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि यह टैरिफ अमेरिका के लिए 'काफी सफल' रहा है, लेकिन इसे स्थायी व्यवस्था नहीं माना जा रहा। दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के दौरान उन्होंने कहा कि टैरिफ अपना मकसद पूरा कर चुका है।

स्कॉट बेसेंट के अनुसार, इस टैरिफ के बाद भारत द्वारा रूस से कच्चे तेल की खरीद में साफ गिरावट देखने को मिली है। उन्होंने माना कि फिलहाल यह टैरिफ लागू है, लेकिन भविष्य में इसे हटाने का रास्ता निकल सकता है। बेसेंट ने कहा, 'मुझे लगता है कि अब इसे हटाने का एक रास्ता बन सकता है।' उनके इस बयान से संकेत मिलते हैं कि बातचीत आगे बढ़ने पर भारत को राहत मिल सकती है।

भारत ने रूस से तेल खरीदने में कटौती की

यह बयान ऐसे समय आया है, जब रूस से तेल व्यापार को लेकर अमेरिका, G7 और यूरोपीय देश लगातार दबाव बना रहे हैं। अमेरिका का दावा है कि टैरिफ और प्रतिबंधों के चलते भारत ने रूसी तेल की खरीद में कटौती की है। रिपोर्ट्स के अनुसार, रिलायंस जैसी बड़ी भारतीय रिफाइनरियों ने जनवरी 2026 में रूसी तेल की खरीद रोक दी है।

भारत पर अब तक टैरिफ कितना है?

फिलहाल अमेरिका ने भारत से आने वाले कई उत्पादों पर कुल मिलाकर 50% तक का टैरिफ लगा रखा है। इसमें करीब 25% सामान्य टैरिफ शामिल है, जो भारत के लगभग 55% एक्सपोर्ट पर लागू होता है। इसके अलावा अगस्त 2025 से रूस से तेल खरीद को लेकर 25% का अतिरिक्त 'ऑयल पेनल्टी टैरिफ' भी लगाया गया है।

रूसी तेल पर प्राइस कैप का दबाव

अमेरिका, G7 और यूरोपीय देशों ने रूसी तेल पर प्राइस कैप सिस्टम लागू किया है। जनवरी 2026 तक यह सीमा 47.60 डॉलर प्रति बैरल तय है, जिसे 1 फरवरी 2026 से घटाकर 44.10 डॉलर किया जाएगा। तय कीमत से ऊपर तेल बिकने पर बीमा, शिपिंग और फाइनेंस जैसी सेवाएं नहीं दी जाएंगी।

500% टैरिफ बिल पर भारत की नजर

अमेरिका में 500% टैरिफ से जुड़ा नया बिल भी चर्चा में है। भारत का कहना है कि वह अपनी ऊर्जा जरूरतों को राष्ट्रीय हित और किफायती दामों के आधार पर तय करता है, लेकिन अमेरिकी फैसलों पर करीबी नजर रखी जा रही है। आने वाले समय में यह मुद्दा भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों के लिए अहम साबित हो सकता है।

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