भारत-अमेरिका ट्रेड डील में कौन सी वस्तुएं हैं शामिल, आ गई लिस्ट
भारत-अमेरिका के बीच ट्रेड डील के बाद 25 फीसदी एक्स्ट्रा टैरिफ कट गया है।500 अरब डॉलर की खरीद और 30 ट्रिलियन डॉलर बाजार की राह खुली है।
नई दिल्लीः भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से अटकी पड़ी ट्रेड डील आखिरकार हो गई। इस डील के बात चर्चा थी कि आखिर किन-किन सामानों को लेकर समझौता हुआ है। तो अब वाणिज्य मंत्रालय ने दोनों देशों के बीच हुए अंतरिम व्यापार समझौते के फ्रेमवर्क का दस्तावेज जारी किया है। इस समझौते के तहत दोनों देशों ने न सिर्फ टैरिफ में राहत दी है, बल्कि बाजार पहुंच, सप्लाई चेन और टेक्नोलॉजी सहयोग को लेकर भी बड़े फैसले लिए हैं।
इस डील के जरिए भारत अमेरिका से बड़े पैमाने पर खरीदारी करेगा, जबकि अमेरिका भारतीय उत्पादों के लिए अपने विशाल बाजार के दरवाजे खोलेगा।
टैरिफ में बड़ी राहत, भारत को सीधा फायदा
अमेरिका ने रूस से तेल खरीद को लेकर भारत पर लगाए गए अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ को पूरी तरह हटा दिया है। इसके साथ ही रेसिप्रोकल टैरिफ को 25 फीसदी से घटाकर 18 फीसदी कर दिया गया है। यह फैसला 7 फरवरी से प्रभावी हो गया है। यह कदम भारतीय निर्यातकों के लिए राहत भरा माना जा रहा है, खासकर उन सेक्टर्स में जो अमेरिकी बाजार पर निर्भर हैं।
अमेरिका से 500 अरब डॉलर की खरीद का रोडमैप
फ्रेमवर्क के अनुसार भारत अगले पांच वर्षों में अमेरिका से करीब 500 अरब डॉलर के उत्पाद खरीदेगा। इसमें ऊर्जा उत्पाद, विमान और उनके पुर्जे, बहुमूल्य धातुएं, एडवांस टेक्नोलॉजी प्रोडक्ट्स और कोकिंग कोयला शामिल हैं। यह खरीद भारत की इंडस्ट्रियल जरूरतों और इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार को मजबूती देगी।
इन उत्पादों पर घटेगा या खत्म होगा टैरिफ
भारत ने अमेरिकी औद्योगिक उत्पादों के साथ-साथ कई कृषि और खाद्य वस्तुओं पर टैरिफ कम करने या पूरी तरह हटाने पर सहमति दी है। इसमें सूखे डिस्टिलर्स ग्रेन्स (DDG), पशु आहार के लिए लाल ज्वार, ट्री नट्स, ताजे और प्रोसेस्ड फल, सोयाबीन तेल, वाइन और स्पिरिट जैसे उत्पाद शामिल हैं। इससे घरेलू बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और उपभोक्ताओं को ज्यादा विकल्प मिलेंगे।
ICT और मेडिकल डिवाइस सेक्टर में आसान रास्ता
भारत ने अमेरिकी इंफॉर्मेशन और कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी (ICT) उत्पादों पर लागू जटिल आयात लाइसेंसिंग प्रक्रिया को समाप्त करने का फैसला किया है। इसके साथ ही अमेरिकी मेडिकल डिवाइस के व्यापार में आ रही पुरानी बाधाओं को भी दूर करने पर सहमति बनी है।
समझौते के तहत छह महीने के भीतर यह तय किया जाएगा कि अमेरिकी या अंतरराष्ट्रीय मानकों को भारतीय बाजार में किन चुनिंदा क्षेत्रों में मान्यता दी जाएगी।
30 ट्रिलियन डॉलर का अमेरिकी बाजार खुलेगा
इस अंतरिम समझौते के जरिए भारत को अमेरिका के लगभग 30 ट्रिलियन डॉलर के बाजार तक बेहतर पहुंच मिलेगी। वाणिज्य मंत्रालय के मुताबिक इससे एमएसएमई सेक्टर, मछुआरे और महिला उद्यमियों को सबसे ज्यादा लाभ होगा। साथ ही सप्लाई चेन मजबूत होगी और व्यापार में आने वाली गैर-जरूरी रुकावटें हटेंगी।
टेक्नोलॉजी और डिजिटल ट्रेड में साझेदारी मजबूत
दोनों देश GPU, डेटा सेंटर्स और अन्य हाई-टेक उत्पादों में व्यापार बढ़ाने पर सहमत हुए हैं। इसके अलावा संयुक्त टेक्नोलॉजी सहयोग और डिजिटल ट्रेड के लिए स्पष्ट और पारस्परिक रूप से लाभकारी नियम तय करने की दिशा में भी कदम बढ़ाए गए हैं। डिजिटल व्यापार में भेदभावपूर्ण और बोझिल प्रथाओं को खत्म करने पर भी दोनों देशों की सहमति बनी है।