70 करोड़ की सड़कों में 70000 से ज्यादा गड्ढे !
स्वदेश वेब विशेष - मोटे कमीशन के खेल ने बिगाड़ी सड़कों की सेहत, विकास का दर्पण हुआ धुंधला
ग्वालियर/ वेब डेस्क। सड़कों को शहर का दर्पण कहा जाता है। विकास का पैमाना भी सबसे पहले सड़कों से ही नापा जाता है। लेकिन नगर निगम के अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत से ग्वालियर की सड़कों से चीख निकल रही है और विकास का दर्पण धुंधला होता जा रहा है। सड़कों में बड़े बड़े गड्ढे हैं और कहीं कहीं तो गड्ढों में सड़क है लेकिन आँख पर पट्टी बांधे नगर निगम के अधिकारियों को कुछ भी दिखाई नहीं देता।
शहरवासियों को प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराई जाने वाली बुनियादी सेवाओं में से एक है सड़क। चुनावों से पहले जनप्रतिनिधि भी बेहतर सड़कें बनवाने के प्रयास करते हैं। लेकिन थोड़े दिन बाद सबकुछ सिमट कर रह जाता है अधिकारियों के हाथों में । ग्वालियर में भी ऐसा ही है। यहाँ जनप्रतिनिधि सरकार से और अपनी निधि से करोड़ों रुपये की धनराशि सड़कों के लिए मंजूर करते हैं। ठेकेदारों के माध्यम से नगर निगम अधिकारी सड़कों का निर्माण कराते है और यहीं से शुरू होता है सांठगांठ का खेल।
ग्वालियर नगर निगम सीमा की किसी भी सड़क पर निगाह डालेंगे तो शायद ही कोई सड़क ऐसी मिलेगी जिसपर गड्ढे नहीं होंगे। मुख्यमार्गों की बात की जाये तो कम्पू क्षेत्र की सड़कें जो शहर के बाहर तक जाती है लेकिन बदहाल हैं - रॉक्सी, जयेन्द्रगंज, दौलतगंज, सराफा, लक्ष्मीगंज, हनुमान चौराहा, नईसड़क, गस्त का ताजिया, फालका बाजार, जिन्सी नाला, फूलबाग, पड़ाव, सिटी सेंटर, स्टेशन, बस स्टेण्ड क्षेत्र की कोई भी सड़क ऐसी नहीं है कि जिसे ये कहा जाये कि इसपर गड्ढा नहीं है। उपनगर ग्वालियर का हाल तो और भी खराब है। हजीरा से चार शहर के नाके की तरफ आप जायेंगे तो सड़क कम गड्ढे ज्यादा मिलेंगे। इस क्षेत्र की अंदरूनी सड़कों की हालत तो इतनी खराब है कि इसे लेकर कई बार स्थानीय लोग आंदोलन कर चुके हैं। सड़कों की लगभग ऐसी ही दशा उपनगर मुरार की है। यहाँ के किसी भी संतर या बाजार में चले जाएं तो गड्ढे ही गड्ढे दिखाई देंगे। सात नंबर चौराहे से गोले का मंदिर जाने वाली सड़क हो अथवा बड़ा गाँव जाने वाली सड़क यहाँ सपाट सड़क कम गड्ढे ज्यादा दिखाई देंगे। थाटीपुर मुरार को जोड़ने वाला मुख्यमार्ग भी गड्ढों से मुक्त नहीं हैं। हम यदि बात करें शहर की पॉश कॉलोनियों की तो उदाहरण के तौर पर बसंत विहार, चेतकपुरी, माधव नगर, हरिशंकरपुरम, श्रीराम कॉलोनी, विजया नगर सड़कों की हालत बहुत खराब हैं यहाँ सड़क पर चलना मुश्किल है। इस सबके बावजूद सड़कों के मेंटेनेंस पर किसी का ध्यान नहीं जाता। इन्हीं सड़कों से हमारे जनप्रतिनिधि और प्रशासन के अधिकारी दिन में कई बार निकलते हैं लेकिन लक्जरी गाड़ियों में बैठे होने के चलते गड्ढों से जनता को होने वाला दर्द उन्हें ना तो दिखाई देता है और ना ही महसूस होता है ।
नगर निगम 60 से 70 करोड़ रुपये इन सड़कों पर खर्च करती है। ठेकेदार सड़कों का निर्माण करते हैं और जो ठेकेदार जिस सड़क का निर्माण करता है उससे अनुबंध ये रहता है कि तीन साल तक वो सड़क का मेंटेनेंस करेगा और खराब होने की दशा में उसे ठीक करेगा लेकिन होता उलटा है। मोटे कमीशन के खेल के बीच बनने वाली शहर की सड़कों का मेंटेनेंस नगर निगम अधिकारी ठेकेदारों से ना करवाकर स्वयं करवाते है और सड़कों के पेंच रिपेयरिंग पर भी हर साल कई करोड़ रुपये खर्च करते है। लेकिन नतीजा ये हैं कि 70 करोड़ रुपये खर्च करने के बावजूद सड़कों में 70000 से ज्यादा गड्ढे मिल जायेंगे।
कुल मिलाकर शहर की सड़कें बनाते समय नगर निगम के अधिकारी और ठेकेदार अपनी जेब और फायदे के सामने जनता को होने वाली परेशानियों की अनदेखी करते हैं। जिसके कारण ही शहर का दर्पण कहलाने वाली सड़कें बदहाल हैं और विकास को मुंह चिढ़ा रहीं हैं।